दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, खाली करनी होगी डूसिब की जमीन

Summary :

Supreme Court Approves Delhi High Court Decision : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डूसिब) की ओर से अलॉट की गई जमीन पर कब्जा जमाए लोगों को जगह खाली करने का आदेश देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डूसिब की जमीन पर कब्जा करने वाली ईश्वर कामधेनु रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड, कवात्रा हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, कवात्रा टेंट एंड कैटरर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों को जमीन खाली करनी पड़ेगी। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के 10 अगस्त के आदेश के…

Supreme Court Approves Delhi High Court Decision : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डूसिब) की ओर से अलॉट की गई जमीन पर कब्जा जमाए लोगों को जगह खाली करने का आदेश देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डूसिब की जमीन पर कब्जा करने वाली ईश्वर कामधेनु रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड, कवात्रा हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, कवात्रा टेंट एंड कैटरर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों को जमीन खाली करनी पड़ेगी। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के 10 अगस्त के आदेश के खिलाफ दायर कवात्रा हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि वे इस फैसले और आदेश में दखल देने के इच्छुक नहीं हैं।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल लीव पेटिशन (एसएलपी) को खारिज कर दिया। बता दें कि यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट की डिविजन बेंच के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें कब्जा रखने वालों को उनके लाइसेंस की अवधि अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने से मना कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि कॉन्ट्रैक्ट के तहत व्यवस्था एक तय समय के लिए थी और कब्ज़ा रखने वाले, एग्रीमेंट में तय अधिकतम समय-सीमा से ज़्यादा समय तक कब्जा बनाए रखने का दावा नहीं कर सकते।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने इस दलील को भी खारिज कर दिया था कि ज़मीन पर कब्जा रखने वालों द्वारा किया गया निवेश या आर्थिक नुकसान की आशंका, कॉन्ट्रैक्ट की अवधि के बाद भी लाइसेंस जारी रखने का आधार बन सकती है। हाईकोर्ट ने कब्जाधारियों को पंडाल और अन्य ढांचों को हटाने और जगह खाली करने के लिए 10 अगस्त से एक हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, जमीन खाली करने की समय-सीमा 17 अगस्त थी और हाईकोर्ट द्वारा दिया गया एक हफ्ते का अतिरिक्त समय 17 अगस्त को खत्म गया। ऐसे में अब जमीन पर कब्जा वापस लेने का मामला अब डूसिब के पास है। बता दें कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब कब्जा करने वालों ने तर्क दिया कि उनके समझौतों की धारा 6 के तहत, वे नई नीलामी, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और सफल बोलीदाताओं के साथ समझौते होने तक कब्जा बनाए रख सकते हैं।

हांलाकि दिल्ली हाई कोर्ट ने इस व्याख्या को खारिज कर दिया और कहा कि इस धारा में डूसिब द्वारा समझौतों को ज्यादा से ज्यादा छह महीने तक बढ़ाने की बात कही गई थी, अगर मूल अनुबंध की अवधि खत्म होने तक नई नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई हो। चूंकि कब्जा करने वाले पहले ही छह महीने का अधिकतम विस्तार ले चुके थे, इसलिए बेंच ने माना कि वे सिर्फ इसलिए और विस्तार नहीं मांग सकते कि नई टेंडर प्रक्रिया अधूरी रह गई थी।

तीन कंपनियों को बड़ा झटका

बता दें कि इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डूसिब) द्वारा अलॉट की गई जमीन पर कब्जा रखने वाली ईश्वर कामधेनु रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड, कवात्रा हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, कवात्रा टेंट एंड कैटरर्स प्राइवेट लिमिटेड को बड़ा झटका दिया था और जमीन पर कब्जा बनाए रखने की उनकी मांग को खारिज कर दिया था। जिसके बाद कवात्रा हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हांलाकि, पहले हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ये देखना होगा कि डूसिब अब कब्जाधारियों के कब्जे से जमीन वापस लेने के लिए कब कार्रवाई शुरु करता है।

Sumant Chaudhary