India LPG Crisis: गांधी नगर मार्केट में कारीगरों की भारी कमी, ऑर्डर घटने से कारोबार पर दोहरी मार, बंद होने पर की कगार पर फैक्ट्रियां

Summary :

India LPG Crisis: ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के चलते एलपीजी संकट ने राजधानी की अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। गैस की किल्लत ने प्रवासी करीगरों को पलायन करने को मजबूर कर दिया है, तो वहीं कारीगरों के पलायन के चलते फैक्ट्रियों की मशीनें धीरे-धीरे ठप होती जा रही हैं। ऐसे में उत्पादन रुक गया है और ग्राहकों की कमी ने कारोबार को और कमजोर कर दिया है। दोहरी मार झेल रहे व्यापारी अब नुकसान के दलदल में फंसते जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि दिन प्रतिदिन बंद होती जा रही इकाइयां इस संकट की गहराई को और उजागर…

India LPG Crisis: ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के चलते एलपीजी संकट ने राजधानी की अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। गैस की किल्लत ने प्रवासी करीगरों को पलायन करने को मजबूर कर दिया है, तो वहीं कारीगरों के पलायन के चलते फैक्ट्रियों की मशीनें धीरे-धीरे ठप होती जा रही हैं। ऐसे में उत्पादन रुक गया है और ग्राहकों की कमी ने कारोबार को और कमजोर कर दिया है। दोहरी मार झेल रहे व्यापारी अब नुकसान के दलदल में फंसते जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि दिन प्रतिदिन बंद होती जा रही इकाइयां इस संकट की गहराई को और उजागर कर रही हैं, जो इस गहराते संकट की साफ तस्वीर पेश कर रहे हैं।

व्यापारियों का कहना है कि गांधी नगर मार्केट में अधिकतर मजदूर यूपी, बिहार और बंगाल के लोग काम करते हैं। लेकिन युद्ध के चलते दिल्ली में हो रही गैस की किल्लत और लॉकडाउन के डर के चलते कारीगर पलायन कर रहे हैं। ऐसे में मार्केट में मैन्युफैक्चरिंग करने वाली फैक्ट्रियों में कारीगरों की भारी कमी हो गई है। ऐसे में कई फैक्ट्रियां धीरे धीरे बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। क्योंकि जिन फैक्ट्रियों में पहले 20 कारीगर काम करते थे, अब वहां सिर्फ 5 से 6 कारीगर काम कर रहे हैं।

ऐसे में मार्केट में कपड़ों का उत्पादन में करीब 30 से 40 फीसदी गिरावट आई है। इतना ही नहीं, उत्पादन की कमी का दूसरा कारण मार्केट में ग्राहकों न आने की वजह से भी देखने को मिल रहा है। ग्राहक न आने से ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उनका काम भी ठप पड़ता जा रहा है। फैक्ट्री में काम करने वाले नंदू ने बताया कि वह प्रतिदिन 2000 से जींस में काज-बटन लगने का काम करते थे, लेकिन अब वह दिन में सिर्फ 300 से 400 जींस में ही काज-बटन कर पा रहे हैं।

गैस की शर्त पर भी नहीं रुक रहे मजदूर

व्यापारियों का कहना है कि कारीगर अब साफ तौर पर गैस सिलेंडर की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बिना गैस के काम करना संभव नहीं है। बढ़ती महंगाई ने उनकी कमाई और खर्च के बीच का संतुलन बिगाड़ दिया है। जो कारीगर पहले 150 रुपये में काम कर लेता था, अब वही 250 रुपये की मांग कर रहा है, क्योंकि उसका रोजमर्रा का खर्च भी उतना ही बढ़ गया है। ऐसे हालात में कई मजदूर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। ऐसे में फैक्ट्रियों में काम करने वाले हाथ कम पड़ गए हैं, मशीनें खाली पड़ी हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है।

रिपोर्ट – प्रशांत चौहान

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Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।