Jantar Mantar Protest: पथराव के बीच भी चट्टान की तरह अडिग रहे धालीवाल व अन्य पुलिस अधिकारी

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Jantar Mantar Protest : हौसलों की राह में चाहे कितने ही तूफान आए, जो वर्दी पहन ले, वो हर मुश्किल से टकराए। पत्थर बरसें या हालात हों बेकाबू, कर्तव्य की खातिर पुलिसकर्मी हर मोर्चे पर मुस्कुराए’। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ में से नारेबाजी, पथराव और उकसावे के बावजूद दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने जिस संयम, साहस और नेतृत्व का परिचय दिया, उसने साबित कर दिया कि वर्दी केवल अधिकार का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, धैर्य और सेवा का भी प्रतीक है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान स्पेशल सीपी से लेकर डीसीपी और एसीपी स्तर तक के अधिकारी खुद सड़क…

Jantar Mantar Protest : हौसलों की राह में चाहे कितने ही तूफान आए, जो वर्दी पहन ले, वो हर मुश्किल से टकराए। पत्थर बरसें या हालात हों बेकाबू, कर्तव्य की खातिर पुलिसकर्मी हर मोर्चे पर मुस्कुराए’।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ में से नारेबाजी, पथराव और उकसावे के बावजूद दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने जिस संयम, साहस और नेतृत्व का परिचय दिया, उसने साबित कर दिया कि वर्दी केवल अधिकार का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, धैर्य और सेवा का भी प्रतीक है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान स्पेशल सीपी से लेकर डीसीपी और एसीपी स्तर तक के अधिकारी खुद सड़क पर उतरकर पुलिस जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे।

जवानों का बढ़ाया हौसला

क्राइम ब्रांच के स्पेशल सीपी एचजीएस धालीवाल पूरे घटनाक्रम के दौरान अग्रिम मोर्चे पर नजर आए। भीड़ के ठीक सामने खड़े होकर उन्होंने हालात पर लगातार नजर बनाए रखी। प्रदर्शनकारियों की ओर से पत्थर फेंके गए और अभद्र भाषा का इस्तेमाल हुआ, लेकिन उन्होंने अपने जवानों का संयम नहीं खोने दिया। उनका संदेश साफ था कि पुलिस की सबसे बड़ी ताकत धैर्य, अनुशासन और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करना है। पथराव में जवानों के घायल होने के बावजूद उन्होंने अपने जवानों का हौंसला नहीं टूटने दिया। लगातार ड्यूटी के कारण जवान ठीक से सो भी नहीं पा रहे थे। एचजीएस धालीवाल उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे और प्रदर्शन कारियों के सामने जवानों का जोश जरा भी कम नहीं होने दिया।

स्पेशल सीपी (विजिलेंस) अजय चौधरी भी लगातार मैदान में मौजूद दिखाई दिए। जंतर-मंतर पर उपद्रवियों पर नियंत्रण करने में उनका अनुभव और रणनीति काम आई। वहीं ज्वाइंट सीपी ( सेंट्रल रेंज) मधुर वर्मा लगातार संवेदनशील इलाकों में स्टाफ के साथ पेट्रोलिंग करते नजर आए। विपक्ष में नेता राहुल गांधी ने जब अचानक प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया तब डीसीपी (साउथ-ईस्ट) डॉ. हेमंत तिवारी अहम भूमिका में नजर आए। पीएम सिक्योरिटी और लॉ एंड ऑर्डर को कायम रखने के लिए उन्होंने राहुल गांधी को उठाकर गाड़ी में बैठाया और पूरा रास्ता क्लीयर कराया।

घायल होकर भी नहीं छोड़ा मोर्चा

डीसीपी (नॉर्थ-ईस्ट) राहुल अलवाल ने बताया कि जिस दिन एसीपी विवेक भगत पर हमला हुआ, उस वक्त वहां कई अधिकारी तैनात थे। वह खुद अपने स्टाफ के साथ संसद मार्ग के पास भीड़ के सामने मौजूद थे। भीड़ के बीच में से पथराव हुआ। जिसमें उनके एक हैड कांस्टेबल का दांत तक टूट गया। एसीपी (खजूरी खास) यतिन शर्मा को चोट लगी। बावजूद इसके किसी ने भी अपना मोर्चा नहीं छोड़ा। राहुल अलवाल ने सीजेपी और सरकार के बीच सेतु का काम किया। वह सीजेपी प्रवक्ता सौरव और आशुतोष को संवाद के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के पास लेकर जाते थे।

प्रदर्शनकारियों का जीता दिल

जंतर-मंतर पर चले लंबे प्रदर्शन के दौरान डीसीपी (ईओडब्ल्यू) सुबोध गोस्वामी अपनी शांत और दोस्ताना कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहे। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में प्रदर्शनकारी उन्हें गुलाब का फूल भेंट करते दिखाई भी दिए। उन्होंने बातचीत के जरिए तनाव कम करने और माहौल शांत रखने का प्रयास किया। वहीं शाहदरा जिले के डीसीपी आरपी मीणा भी अपनी टीम के साथ लगातार कठिन परिस्थितियों में भी लगातार डटे रहे। उन्होंने एचएम रेजिडेंस व अन्य वीवीआईपी एरिया में सुरक्षा की कमान संभाली।

 

Sumant Chaudhary