नई दिल्ली : जेएनयू में एक बार फिर से प्रशासन और छात्रों के बीच ठन गई है। इस बार छात्र संघ चुनाव के दौरान हुए खर्चे का ब्योरा देने की बात पर दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं। जेएनयू छात्र कल्याण डीन ने गत दिनों नवनिर्वाचित जेएनयू छात्र संघ के मेंबर्स को पत्र लिखकर चुनाव के दौरान हुए खर्च का ब्योरा मांगा था। जिसमें यह साफ कहा गया है कि जीएसटी सहित चुनावी खर्चे का बिल जमा किया जाए। बिल नहीं जमा होने के शर्त पर छात्र संघ को भंग भी किया जा सकता है।
इसपर छात्र संघ का कहना है कि हमने डीएसडब्ल्यू को एक पत्र लिखकर 28 बिलों की कॉपी संग्लन की थी। बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन साजिश के तहत छात्र संघ को भंग करना चाहता है। वहीं प्रशासन का कहना है कि बिल में जीएसटी नहीं है। ज्ञात हो कि लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को चुनाव खर्च का ब्योरा विश्वविद्यालय को जमा करना होता है।
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इस पर छात्र संघ अध्यक्ष बालाजी ने बताया कि हमने चुनाव के बाद ए फोर कागज पर चुनाव का जो भी खर्च था उसका ब्योरा गत दिनों जमा करा चुके हैं। इसके बाद प्रशासन की ओर से खर्च का बिल मांगे गए तो हमने सभी खर्च के बिल भी उपलब्ध करा दिए। बावजूद इसके हमपर प्रशासन अतिरिक्त दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।


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