Job Fraud Scam: बेरोजगारी के दौर में जब युवा बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर दिन-रात सोशल मीडिया और नौकरी देने वाली वेबसाइट्स खंगालते हैं, तब कुछ साइबर ठग उनकी मजबूरी को अपना हथियार बना लेते हैं। नौकरी की तलाश में भटक रहे मासूम युवाओं को सुनहरे सपने दिखाकर यह गिरोह पहले भरोसे में लेता था और फिर धीरे-धीरे उनकी मेहनत की कमाई ठग लेता था। शाहदरा डिस्ट्रिक्ट की साइबर थाना पुलिस ने ऐसे ही एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना रहा था। पुलिस ने इस मामले में 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर आठ करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा किया है। आरोपियों की पहचान प्रदीप सिंह उर्फ अल्फा, संदीप सिंह, हरसिमरन पाल सिंह, गेवी, विशाल कुमार, अजीत कुमार पांडे, साहिल, सैयद जीशान अली, सैयद आदिल हुसैन, परमेंद्र सिंह, स्वराज कुमार गुप्ता, राजू कोंवर, अनिल कुमार अहिरवार और गुरदीप सिंह के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से 18 मोबाइल फोन, 19 सिम कार्ड, एक लैपटॉप, तीन एटीएम कार्ड, चार चेकबुक और दो फर्जी मुहरें बरामद की गई हैं। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है।
जॉब विज्ञापन डालकर बेरोजगार युवाओं को निशाना
डीसीपी शाहदरा राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि इस गिरोह का पर्दाफाश एसीपी मोहिंदर सिंह की निगरानी में एसएचओ विजय कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने किया। टीम में इंस्पेक्टर श्वेता शर्मा, एसआई श्याम बिहारी, विवेक, एएसआई राजदीप तथा हेड कांस्टेबल जावेद, दीपक, नरेंद्र, कपिल और सचिन शामिल थे। पुलिस को 25 अप्रैल को गीता कॉलोनी स्थित एक होटल में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर छापेमारी की गई, जहां से अलग-अलग राज्यों के 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान गिरोह के दो अन्य सदस्यों को लुधियाना से दबोचा गया, जिसके बाद कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 14 हो गई। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी सोशल मीडिया और नौकरी पोर्टलों पर फर्जी जॉब विज्ञापन डालकर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाते थे। बाद में उन्हें टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर रजिस्ट्रेशन फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट और अन्य बहानों से लाखों रुपये की ठगी की जाती थी।
म्यूल खातों के जरिए छिपाते थे ठगी की रकम
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी साइबर ठगी से हासिल रकम को छिपाने के लिए म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे कई बैंक खाते मिले, जिनका उपयोग ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और असली स्रोत छिपाने के लिए किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार एक बैंक खाते से 40 से अधिक शिकायतें जुड़ी मिली हैं, जिनमें करीब 1.5 करोड़ रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है। वहीं आरोपियों के कब्जे से बरामद एक एटीएम कार्ड करीब तीन करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा पाया गया। शुरुआती जांच में ही गिरोह द्वारा किए गए कुल फ्रॉड की रकम आठ करोड़ रुपये से अधिक सामने आई है। पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल डेटा और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहन जांच कर गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
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