Master Plan 2047 Launched/ प्रगनेश सिंह : अगले दो दशकों में दिल्ली के बसने, चलने और विकसित होने का तरीका बदलने जा रहा है। लंबे इंतजार के बाद बृहस्पतिवार को जारी मास्टर प्लान-2047 में बढ़ती आबादी के बीच मकान, परिवहन, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए शहर के विकास का नया खाका तैयार किया गया है। सीमित जमीन के कारण अब दिल्ली को केवल बाहर की ओर फैलाने के बजाय उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने, ऊंची इमारतों और पुराने इलाकों के पुनर्विकास पर जोर रहेगा।
वर्ष 2047 तक अनुमानित 3.20 करोड़ आबादी को ध्यान में रखते हुए करीब 40 लाख नए किफायती घरों की क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, उपराज्यपाल टीएस संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 535 पन्नों का मास्टर प्लान जारी किया। इसे ‘विकसित भारत-2047’ के अनुरूप दिल्ली के दीर्घकालिक विकास का आधार बनाया गया है।
आवास की क्षमता बढ़ाने के लिए विशेष संरक्षित क्षेत्रों को छोड़कर इमारतों की ऊंचाई संबंधी नियमों में बदलाव किया गया है। विशेष क्षेत्रों से बाहर आवासीय प्लॉट पर बिना स्टिल्ट पार्किंग अधिकतम 15 मीटर और स्टिल्ट पार्किंग के साथ 17.5 मीटर तक निर्माण की अनुमति होगी। हालांकि लुटियंस बंगला जोन, सिविल लाइंस, कनॉट प्लेस, यमुना बाढ़ क्षेत्र, अरावली रिज और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित क्षेत्रों में मौजूदा पाबंदियां जारी रहेंगी। रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 30 मीटर चौड़ी सड़क के किनारे स्थित आवासीय प्लॉट के भूतल पर निर्धारित शर्तों के तहत व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति होगी।
डेटा सेंटर, साझा कार्यस्थल और क्लाउड किचन जैसी गतिविधियों को भी नई अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है। वहीं कम घनत्व वाले क्षेत्रों में नए फार्म हाउस बनाने पर रोक रहेगी। परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए दिल्ली मेट्रो नेटवर्क को भविष्य में 695 किलोमीटर तक पहुंचाने और छह नए आरआरटीएस कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। आनंद विहार, सराय काले खां और कश्मीरी गेट को मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। पूरे शहर के लिए एकीकृत पार्किंग प्रबंधन व्यवस्था भी प्रस्तावित है। अनधिकृत कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं सुधारने के लिए क्षेत्र आधारित पुनर्विकास का रास्ता खोला गया है। कम से कम 2,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में प्लॉटों को मिलाकर पुनर्विकास किया जा सकेगा और अधिकतम 350 एफएआर मिलेगा। पर्यावरण संरक्षण के तहत यमुना के करीब 180 वर्ग किलोमीटर बाढ़ क्षेत्र और अरावली रिज को संरक्षित रखा जाएगा।
मनोहर लाल ने कहा कि केंद्र, दिल्ली सरकार और नागरिक निकायों के बेहतर तालमेल से योजना का क्रियान्वयन प्रभावी होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे आवास, निवेश और रोजगार बढ़ाने वाला विकास केंद्रित प्लान बताया, जबकि उपराज्यपाल टीएस संधू ने इसे ‘विकसित दिल्ली’ के दीर्घकालिक विकास का आधार बताया।
न फैलेगी दिल्ली, न थमेगी रफ्तार, अब बदलेगा विकास का अंदाज
आने वाले दो दशकों में दिल्ली केवल आकार में नहीं, बल्कि उसके बसने, चलने और विकसित होने के तरीके में भी बड़े बदलाव से गुजर सकती है। मास्टर प्लान-2047 का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सीमित जमीन वाली राजधानी अब बेतरतीब तरीके से बाहर की ओर नहीं फैलेगी, बल्कि जहां मेट्रो, सड़क, पानी और दूसरी बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं, वहां जमीन का अधिक प्रभावी इस्तेमाल कर ज्यादा लोगों को बसाया जाएगा।
इसके लिए ऊंची इमारतों, पुराने इलाकों के पुनर्विकास और सार्वजनिक परिवहन केंद्रित विकास पर जोर रहेगा। अगले 21 वर्षों में करीब 40 लाख नए घरों की क्षमता तैयार करने का लक्ष्य इसी रणनीति का हिस्सा है। दिल्ली की मौजूदा आबादी करीब 2.40 करोड़ बताई जा रही है और 2047 तक इसके लगभग 3.2 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। दूसरी ओर राजधानी में करीब 520 वर्ग किलोमीटर कृषि भूमि ही बची है और यमुना का खादर तथा अन्य पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र भी निर्माण के लिए नहीं खोले जा सकते। ऐसे में नई दिल्ली का रास्ता नई जमीन तलाशने से ज्यादा मौजूदा जमीन का बेहतर इस्तेमाल करना होगा।
695 किमी तक रफ्तार फरेगी मेट्रो
योजना के तहत मेट्रो, बस और दूसरे सार्वजनिक परिवहन गलियारों के आसपास आवास, दुकानें, कार्यालय और अन्य गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। इसे ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। दिल्ली मेट्रो के मौजूदा करीब 416 किलोमीटर नेटवर्क में भविष्य में लगभग 279 किलोमीटर और जोड़ने की संभावना है। इसके साथ करीब 383 किलोमीटर के क्षेत्रीय तीव्र परिवहन नेटवर्क के जरिए दिल्ली को गाजियाबाद, मेरठ, पानीपत, करनाल और अलवर जैसे शहरों से और मजबूती से जोड़ने की तैयारी है। कुछ क्षेत्रों में मेट्रो को चौबीस घंटे चलाने की संभावना भी तलाशी जाएगी।
पुराने दिल्लीवासियों के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव
मास्टर प्लान पुराने दिल्लीवासियों के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है। 50 वर्ष से अधिक पुराने फ्लैटों और आवासीय परिसरों के पुनर्विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। पुराने मकानों को गिराकर उसी जमीन पर आधुनिक सुविधाओं और ज्यादा आवासीय क्षमता वाले भवन तैयार हो सकेंगे। 2,000 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर 200 एफएआर का प्रावधान जमीन के बेहतर उपयोग की गुंजाइश बढ़ाएगा। पुरानी दिल्ली में भी कम इस्तेमाल हो रही जमीन और जर्जर भवनों के पुनर्विकास का रास्ता खोला जाएगा, लेकिन कोशिश शहर की ऐतिहासिक पहचान और विरासत को बचाए रखने की होगी।
जहां झुग्गी वहीं मकान नीति को बढ़ावा
झुग्गी बस्तियों और अनधिकृत कॉलोनियों को भी योजना से बाहर नहीं रखा गया है। ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ की नीति के तहत लोगों को उनके काम और मौजूदा सामाजिक परिवेश से दूर भेजने के बजाय उसी स्थान पर पक्के आवास देने पर जोर रहेगा। अनधिकृत कॉलोनियों में सड़क, पानी, सीवर और अन्य सुविधाओं को व्यवस्थित तरीके से सुधारने की योजना है। नए प्लान में दिल्ली में निर्माण और जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को भी काफी सरल करने की तैयारी है। जमीन उपयोग और गतिविधियों की मौजूदा 133 श्रेणियों को घटाकर करीब 35 किया जाएगा। इसके साथ ‘नकारात्मक सूची’ की व्यवस्था होगी। जिन गतिविधियों पर स्पष्ट प्रतिबंध होगा, उन्हें छोड़कर अन्य गतिविधियों को निर्धारित नियमों के तहत अनुमति मिल सकेगी। निर्माण मंजूरी के लिए एकल खिड़की व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने और हस्तांतरणीय विकास अधिकार यानी टीडीआर की व्यवस्था करने का प्रस्ताव भी है।
बदलेगी कारोबार की तस्वीर
कारोबार की तस्वीर भी बदलेगी। 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों के किनारे इमारतों के भूतल पर व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने की योजना है। थोक बाजारों में अधिक निर्माण की गुंजाइश दी जा सकती है, जबकि बड़े गोदामों के लिए जमीन के इस्तेमाल को नियंत्रित किया जाएगा। नरेला को नवाचार और रोजगार केंद्र तथा द्वारका को चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। नरेला, द्वारका और रोहिणी जैसे क्षेत्रों में बड़े खेल ढांचे भी विकसित किए जा सकते हैं।
पूरी दिल्ली के लिए एकीकृत पार्किंग योजना तैयार होगी
शहर में निजी गाड़ियों पर निर्भरता कम करना भी योजना के केंद्र में है। पूरी दिल्ली के लिए एकीकृत पार्किंग योजना तैयार होगी और मेट्रो से अच्छी तरह जुड़े क्षेत्रों में हर इमारत के साथ बड़ी पार्किंग बनाने की सोच को बदला जा सकता है। इसके पीछे विचार है कि बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होने पर लोग निजी कार के बजाय मेट्रो, बस और अन्य साधनों का इस्तेमाल करें। ऐसे बहु-माध्यम परिवहन केंद्र भी बनाए जाएंगे, जहां मेट्रो, बस, रेल और दूसरे परिवहन साधनों के बीच आसानी से बदलाव किया जा सके।
यमुना किनारे बनेगा 52 किमी का साइकिल ट्रैक
दिल्ली के विकास का दूसरा बड़ा पहलू पर्यावरण होगा। यमुना के खादर को अनियंत्रित निर्माण से बचाने के साथ नदी किनारे करीब 52 किलोमीटर साइकिल ट्रैक की योजना है। दिल्ली के पार्क, जंगल, जैव विविधता पार्क और हरित पट्टियों को जोड़कर एक हरित नेटवर्क विकसित किया जाएगा। करीब 22 प्रतिशत हरित क्षेत्र को बनाए रखने और मजबूत करने के साथ तालाबों, झीलों, आर्द्रभूमियों और प्राकृतिक नालों को पुनर्जीवित करने पर जोर रहेगा। बढ़ती गर्मी और ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव से निपटने के लिए अधिक स्थानीय पेड़-पौधे और प्राकृतिक समाधान अपनाने की बात भी योजना में है।
शहरी गांवों में दुकान-कैफे से होम-स्टे तक हो सकेगा कारोबार
दिल्ली के शहरी गांवों को नए मास्टर प्लान में केवल पुरानी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र के रूप में नहीं देखा गया है। गांवों में वर्षों से घर, दुकान, कार्यालय, रेस्तरां, कारीगरी, गेस्ट हाउस और दूसरे कारोबार एक साथ चलते आए हैं। इसलिए इन्हें पूरी तरह एकल आवासीय ढांचे में बांधने के बजाय उनके मिश्रित स्वरूप को योजनाबद्ध करने की कोशिश की गई है। खुदरा दुकान, कार्यालय, रेस्तरां, कैफे, को-वर्किंग स्पेस, घर आधारित उद्यम, हस्तशिल्प, स्टार्टअप, गेस्ट हाउस, होम-स्टे और सर्विस्ड आवास जैसी गतिविधियों को जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया गया है। हर शहरी गांव के लिए स्थानीय निकाय निवासियों और आरडब्ल्यूए की भागीदारी से क्षेत्र सुधार योजना बना सकेगा। इसमें उन सड़कों की पहचान होगी जिन्हें कम से कम 7.5 मीटर तक चौड़ा करना जरूरी है।
हर एक लाख आबादी पर छह हेल्थ सेंटर और तीन अस्पताल का मानक
दिल्ली के नए मास्टर प्लान में स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण सोच यह है कि लोगों को छोटे इलाज के लिए हर बार बड़े अस्पताल तक न जाना पड़े। मास्टर प्लान 2047 में हर 10 हजार आबादी पर एक स्थानीय स्वास्थ्य सुविधा, जबकि हर एक लाख आबादी पर छह हेल्थ सेंटर और तीन अस्पताल का मानक रखा गया है। सबसे ज्यादा राहत घनी आबादी वाले पुराने इलाकों को हो सकती है। वॉल्ड सिटी, नियमित अनधिकृत कॉलोनियों, पुनर्वास क्षेत्रों और शहरी गांवों में क्लीनिक, डिस्पेंसरी, पैथोलॉजी लैब, नमूना संग्रह और डायग्नोस्टिक सेंटर जैसी छोटी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सामान्य भूखंड आकार और सड़क चौड़ाई की शर्त में छूट का रास्ता दिया गया है।
नरेला बनेगा एजुकेशन हब सेंटर
मास्टर प्लान-2047 योजना में हर 10 हजार आबादी पर एक प्रारंभिक शिक्षा केंद्र, छठी तक एक स्कूल और 12वीं तक एक स्कूल का संकेतात्मक मानक रखा गया है। इनके लिए क्रमशः 500, 2,000 और 4,000 वर्गमीटर जमीन का मानक रखा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नया आवासीय क्षेत्र बनाते समय ही स्कूल के लिए जमीन छोड़ी जाए। स्कूलों को केवल कक्षा-कक्षों का समूह मानने की जगह खेल और दूसरे विकास को भी जरूरी माना गया है। अनुमेय निर्मित क्षेत्र का कम से कम 15 प्रतिशत पाठ्येतर गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करना होगा।
2,538 बाजार सड़कें बरकरार, एक भी नई नोटिफाई नहीं हुई
दिल्ली की हजारों आवासीय सड़कों पर वर्षों से चल रहे कारोबार को लेकर मास्टर प्लान-2047 ने स्थिति काफी हद तक साफ कर दी है। पहले से अधिसूचित 2,183 मिश्रित उपयोग और 355 व्यावसायिक सड़कें, यानी कुल 2,538 सड़कें, आगे भी जारी रहेंगी। लेकिन मास्टर प्लान अवधि में नई मिश्रित या व्यावसायिक सड़क अधिसूचित नहीं की जाएगी। हालांकि इसके साथ एक नया रास्ता भी दिया गया है। 30 मीटर या उससे चौड़ी ऐसी सड़क जो मिश्रित या व्यावसायिक घोषित नहीं है, उससे लगे आवासीय भूखंड में निर्धारित शुल्क देकर भूतल अथवा स्टिल्ट के ऊपर पहली मंजिल पर गैर-प्रदूषणकारी कारोबार किया जा सकेगा।लेकिन कारोबार की अनुमति अब केवल अधिकार नहीं होगी। सभी अधिसूचित बाजार सड़कों के लिए तीन वर्ष में सुधार योजना तैयार और पांच वर्ष में लागू करनी होगी।
वर्ष 2047 में दिल्ली की जलापूर्ति की मांग होगी करीब 1600 एमजीडी
दिल्ली के पानी का संकट मास्टर प्लान-2047 के सबसे गंभीर हिस्सों में है। वर्ष 2047 तक करीब 3.2 करोड़ आबादी के लिए पानी की मांग लगभग 1600 एमजीडी होने का अनुमान है। मौजूदा उपलब्धता लगभग 1000 एमजीडी है और विभिन्न योजनाओं से 401 एमजीडी अतिरिक्त पानी जोड़कर इसे करीब 1401 एमजीडी तक ले जाने की योजना है। यानी योजनाबद्ध बढ़ोतरी के बावजूद मांग और उपलब्धता के बीच दबाव बना रह सकता है। भविष्य की जरूरत के लिए इरादत में 80 एमजीडी, द्वारका फेज-दो में 50 एमजीडी, नजफगढ़ में 75 एमजीडी और छतरपुर में 80 एमजीडी के नए जल शोधन संयंत्र प्रस्तावित हैं। इसके अलावा 2047 की आबादी को देखते हुए 325 एमजीडी क्षमता के और संयंत्रों की जरूरत बताई गई है।अतिरिक्त पानी का बड़ा भरोसा रेणुकाजी, लखवाड़ और किशाऊ बांध परियोजनाओं पर है। इनसे 275 एमजीडी का अनुमान दर्ज है, लेकिन मास्टर प्लान स्वयं इसे अत्यंत प्रारंभिक आकलन बताता है।
दिल्ली का 22 किमी यमुना हिस्सा ही ढो रहा करीब 76 फीसदी प्रदूषण भार
यमुना की स्थिति पर मास्टर प्लान का एक आंकड़ा ही समस्या की गंभीरता बता देता है। वजीराबाद से ओखला तक करीब 22 किलोमीटर हिस्सा पूरी यमुना की लंबाई का दो प्रतिशत से भी कम है, लेकिन नदी के लगभग 76 प्रतिशत प्रदूषण भार के लिए जिम्मेदार है। इसी हिस्से को पुनर्जीवित करने के लिए करीब 1,700 हेक्टेयर बाढ़ क्षेत्र में 13 बड़ी पुनरुद्धार परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इनमें वेटलैंड बहाल करना, प्राकृतिक निचले क्षेत्रों को पानी रोकने के लिए विकसित करना और जैव विविधता बढ़ाना शामिल है।सक्रिय बाढ़ क्षेत्र को निर्माण निषिद्ध क्षेत्र माना गया है। सामान्य निर्माण नहीं होगा और अनधिकृत निर्माण हटाने का प्रावधान है।
2047 में दिल्ली रोज पैदा करेगी 25,764 टन कूड़ा, आज से लगभग दोगुना
वर्ष 2026 में शहर से करीब 13,500 टन प्रतिदिन नगर ठोस कचरा निकलने का अनुमान है, जो 2047 तक बढ़कर करीब 25,764 टन प्रतिदिन हो सकता है। इसलिए मास्टर प्लान ने कूड़े को शहर के दूसरे छोर पर भेजने की पुरानी व्यवस्था के बजाय उसे जितना संभव हो, वहीं संभालने पर जोर दिया है जहां वह पैदा होता है। आवासीय सोसायटी, कॉलोनी, अपार्टमेंट और बाजारों को गीले कूड़े की कम्पोस्टिंग या बायो-मीथेनेशन स्थानीय स्तर पर करनी होगी। सबसे कड़ा प्रावधान यह है कि कूड़ा स्थानीय स्तर पर नहीं संभालने वाली सोसायटी, आरडब्ल्यूए या मार्केट एसोसिएशन पर स्थानीय निकाय ऊंचा टैक्स स्लैब लगा सकते हैं। यानी 2047 की दिल्ली में कूड़ा केवल नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं रहेगा, घर, सोसायटी और बाजार भी समाधान का हिस्सा होंगे।
मास्टर प्लान में तीनों लैंडफिल साइट को खत्म करने का प्लान
दिल्ली के तीन बड़े कूड़े के पहाड़ों को हटाने को लेकर मास्टर प्लान से जुड़े सर्विस प्लान में स्पष्ट समयसीमा दी गई है। ओखला डंपसाइट को अक्टूबर 2026, भलस्वा को दिसंबर 2026 और गाजीपुर को दिसंबर 2027 तक पुराने कूड़े से मुक्त कर जमीन वापस हासिल करने का लक्ष्य है। लेकिन डंपसाइट साफ होने के बाद पूरी जमीन पार्क बन जाएगी, ऐसा नहीं है। एनजीटी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए बताया है कि कम से कम एक तिहाई जमीन पर घना जंगल विकसित किया जा सकता है, एक तिहाई पर कूड़ा प्रसंस्करण या उससे जुड़ी सुविधाएं और शेष जमीन का अन्य उपयुक्त उपयोग संभव है। इसका मतलब यह है कि कूड़े के पहाड़ हटने से आसपास के लोगों को दुर्गंध और प्रदूषण से बड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन इन जगहों की भविष्य की भूमिका कूड़ा प्रबंधन में पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।
2047 में दिल्ली की बिजली मांग होगी 25,500 मेगावाट
वर्ष 2047 में राजधानी की अधिकतम बिजली मांग करीब 25,500 मेगावाट तक पहुंच सकती है। इसके लिए बड़े पैमाने पर ट्रांसमिशन नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी है। दो नए 765 केवी, 10 नए 400 केवी और 37 नए 220 केवी सब-स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। लैंड पूलिंग क्षेत्रों में प्राथमिकता से और दूसरे हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से बिजली की लाइनें भूमिगत करने की दिशा दी गई है। घनी बस्तियों में लटकते और उलझे तारों को भी व्यवहार्यता के आधार पर भूमिगत किया जा सकेगा। 12 मीटर या अधिक चौड़ी सड़कों में जहां संभव हो, ऑप्टिकल फाइबर के लिए अलग स्थान रखा जाएगा। सार्वजनिक जगहों पर सीसीटीवी, सेंसर और सूचना प्रणाली से युक्त स्मार्ट पोल तथा शहर के संचालन के लिए एकीकृत कमांड सेंटर विकसित किए जा सकते हैं।



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