दिल्ली हाई कोर्ट ने बृहस्पतिवार को ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) सरकार से अवमानना याचिका पर जवाब तलब किया। इस याचिका में कोर्ट द्वारा कोविड-19 नमूने एकत्र करने और गैर कानूनी तरीके से कार्य कर रहे ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश का अनुपालन नहीं करने पर प्राधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करने का अनुरोध किया गया है।
एक डॉक्टर ने कोर्ट में आवेदन दायर कर उन गैर कानूनी ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं को रोकने का अनुरोध किया है जो कोविड-19 जांच के लिए नमूनों को एकत्र करने के लिए अधिकृत नहीं है। साथ ही इसमें कहा गया है कि वे कोर्ट द्वारा पिछले साल पारित आदेश की अवमानना कर रहे हैं।
न्यायमूर्ति नज्मी वजीरी ने दिल्ली सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने आठ अप्रैल 2020 को दिए फैसले में कहा था कि कोविड-19 की जांच एनएबीएल सत्यापित प्रयोगशालाओं या ऐसी किसी एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) या भारतीय आयुर्विज्ञान अनुंसधान परिषद (आईसीएमआर) से मंजूरी प्राप्त हो।
दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने छह अगस्त 2020 को सभी हितधारकों को सुनने के बाद दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह उन ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कार्रवाई करे जो बिना पंजीकरण गैरकानूनी तरीके से काम कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता डॉ.रोहित जैन की ओर से पेश अधिवक्ता शशांक देव सुधी ने कहा कि यह मामला गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि कोविड-19 की दूसरी लहर पहले ही पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है और ऑनलाइन सेवा प्रदाता कारोबार के लिए कोविड-19 नमूनों को एकत्र कर उनकी जांच कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने अपने नवीनतम आवेदन में दावा किया कि कोर्ट ने प्राधिकारियों के जवाब के इंतजार में छह बार सुनवाई टाली जो न तो अवैध ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं और नहीं ही कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल कर रहे हैं।


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