जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय के बाहर एक दिन पहले संशोधित नागरिकता अधिनियम के विरोध में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में सोमवार को उनके माता-पिता और स्थानीय अभिभावक भी आ गए। अधिकतर आसपास के इलाकों से आए अभिभावकों का कहना था कि जब उनके बच्चों पर हमला हो रहा हो तो वे घरों में नहीं बैठे रह सकते।
सायरा बानो (55) के दो बच्चे विश्वविद्यालय में पढ़ते हैं। उन्होंने कहा, “कोई भी मां जामिया के छात्रों पर की जा रही ज्यादती को बर्दाश्त नहीं करेगी।” जहीर अहमद (60) ने कहा कि वह “नफरत की राजनीति” के खिलाफ अपनी बेटी के साथ प्रदर्शन में जा रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर महिलाओं के एक समूह का नेतृत्व कर रहीं 52 वर्षीय शाहीन कौसर ने कहा कि छात्रों को “घसीटा गया, धकेला गया, लातें मारी गई और लाठियों से पीटा गया।”
कौसर ने कहा, “यह सिर्फ मेरे बच्चे की बात नहीं है। यह उन सभी लोगों के बारे में है जो अपने परिवार को पीछे छोड़कर यहां आए हैं। यह बच्चे हमारे देश के सभी कोनों से आए हैं और सभी हमारे बच्चे हैं।” करीब 50 महिलाओं, छात्राओं और उनके परिवार के सदस्यों के एक समूह ने मांग की कि रविवार को छात्रों पर की गई पुलिस ज्यादती के मद्देनजर गृहमंत्री अमित शाह इस्तीफा दें।
नाम न जाहिर करने की इच्छा व्यक्त करते हुए एक छात्रा ने कहा, “मेरा नाम महत्वपूर्ण नहीं है, मेरी आवाज है। हम पीछे नहीं हटेंगे। हमारी बहनों और भाइयों को बालों से पकड़कर सड़कों पर घसीटा गया। उनके कपड़े फाड़ दिये गए और उन्हें मरने के लिये छोड़ दिया गया।” छात्रा ने कहा, “यह फलस्तीन नहीं है। अमित शाह के इस्तीफे तक हम पीछे हटने वाले नहीं।” महिलाओं ने हाथों में चूड़ियां ले रखी थीं और दिल्ली पुलिस से उन्हें पहनने को कहा।


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