एंड-स्टेज फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को एक ही छत के नीचे मिलेगी जांच

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Health News : बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने एंड-स्टेज लंग डिसीज से जूझ रहे मरीजों के लिए कम्प्रेहेंसिव लंग ट्रांसप्लांट प्रोग्राम शुरू किया है। इसके तहत मरीजों की जांच से लेकर फेफड़ा प्रत्यारोपण, एडवांस्ड क्रिटिकल केयर और ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक निगरानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। अस्पताल के मुताबिक, इससे इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी), सीओपीडी, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, पल्मोनरी हाइपरटेंशन और ब्रोंकिएक्टेसिस जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को लाभ मिल सकेगा। वहीं, कार्यक्रम का संचालन थोरैसिक सर्जरी एवं लंग ट्रांसप्लांटेशन के सीनियर डायरेक्टर डॉ. प्रमोज जिंदल के नेतृत्व में किया जा रहा है। इसके लिए थोरेसिक सर्जन,…

Health News : बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने एंड-स्टेज लंग डिसीज से जूझ रहे मरीजों के लिए कम्प्रेहेंसिव लंग ट्रांसप्लांट प्रोग्राम शुरू किया है। इसके तहत मरीजों की जांच से लेकर फेफड़ा प्रत्यारोपण, एडवांस्ड क्रिटिकल केयर और ऑपरेशन के बाद लंबे समय तक निगरानी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। अस्पताल के मुताबिक, इससे इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी), सीओपीडी, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, पल्मोनरी हाइपरटेंशन और ब्रोंकिएक्टेसिस जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को लाभ मिल सकेगा।

वहीं, कार्यक्रम का संचालन थोरैसिक सर्जरी एवं लंग ट्रांसप्लांटेशन के सीनियर डायरेक्टर डॉ. प्रमोज जिंदल के नेतृत्व में किया जा रहा है। इसके लिए थोरेसिक सर्जन, पल्मोनोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ, इंटेंसिविस्ट, कार्डियक एनेस्थेटिस्ट, इंफेक्शन विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट, रिहैबिलिटेशन एक्सपर्ट और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम बनाई गई है।

इस अवसर पर डॉ. जिंदल ने कहा कि एंड-स्टेज लंग डिसीज में जब दवाइयां, ऑक्सीजन थेरेपी और अन्य उपचार पर्याप्त असर नहीं करते, तब चुनिंदा मरीजों के लिए लंग ट्रांसप्लांट जीवन को लंबा और बेहतर बनाने का विकल्प हो सकता है। कार्यक्रम में एडवांस्ड क्रिटिकल केयर, ईसीएमओ सपोर्ट और विशेषज्ञ टीम को एकीकृत किया गया है।

बता दें कि अस्पताल के वाइस प्रेसिडेंट-हॉस्पिटल ऑपरेशंस एवं यूनिट हेड डॉ. सुहास परनामी ने कहा कि कार्यक्रम के जरिए उत्तर भारत में जटिल ऑर्गन ट्रांसप्लांट और टर्शियरी केयर को मजबूत करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि गंभीर फेफड़ों की बीमारी वाले मरीजों को समय रहते ट्रांसप्लांट मूल्यांकन के लिए रेफर करना जरूरी है। इससे मरीज को सर्जरी से पहले बेहतर तरीके से तैयार करने और उपचार के परिणाम सुधारने में मदद मिल सकती है।

Sumant Chaudhary