आग से बचाव में दीवारें भी निभा सकती है अहम भूमिका, सुरक्षित विकल्प अपनाने की सलाह

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Fire Safety : देशभर में लगातार सामने आ रही भीषण आग की घटनाओं ने भवनों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब तक इमारतों की संरचनात्मक मजबूती और अग्निशमन व्यवस्था पर ही अधिक ध्यान दिया जाता था, लेकिन अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि घरों, स्कूलों, अस्पतालों और कार्यालयों की दीवारों पर लगी पेंट भी आग के दौरान लोगों की जान बचाने या खतरे में डालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बंद इमारतों में अक्सर आग से अधिक नुकसान जहरीले धुएं के कारण होता है। धुएं की वजह…

Fire Safety : देशभर में लगातार सामने आ रही भीषण आग की घटनाओं ने भवनों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब तक इमारतों की संरचनात्मक मजबूती और अग्निशमन व्यवस्था पर ही अधिक ध्यान दिया जाता था, लेकिन अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि घरों, स्कूलों, अस्पतालों और कार्यालयों की दीवारों पर लगी पेंट भी आग के दौरान लोगों की जान बचाने या खतरे में डालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अग्नि सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बंद इमारतों में अक्सर आग से अधिक नुकसान जहरीले धुएं के कारण होता है। धुएं की वजह से कुछ ही मिनटों में सीढ़ियां और गलियारे पूरी तरह भर जाते हैं, जिससे लोगों की दृश्यता कम हो जाती है, घबराहट फैलती है और दम घुटने से मौत का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, देश के अधिकांश भवनों में पारंपरिक एक्रेलिक और प्लास्टिक इमल्शन पेंट का इस्तेमाल किया जाता है। ये पेंट पेट्रोलियम आधारित पॉलिमर से बने होते हैं और आग लगने पर अतिरिक्त ईंधन की तरह काम कर सकते हैं। तेज गर्मी में ये कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन साइनाइड जैसी जहरीली गैसें छोड़ सकते हैं, जिससे लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने के लिए मिलने वाला समय काफी कम हो जाता है।

आग लगने पर जहरीले धुएं का खतरा घटा सकते हैं सिलिकेट मिनरल पेंट

इसी वजह से दुनिया भर में अब सिलिकेट मिनरल पेंट जैसे अकार्बनिक (इनऑर्गेनिक) कोटिंग सिस्टम की ओर ध्यान बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये पेंट पोटैशियम सिलिकेट और खनिज पदार्थों से तैयार किए जाते हैं। इनमें किसी प्रकार के ऑर्गेनिक पॉलिमर नहीं होते, इसलिए अत्यधिक तापमान में भी ये न तो आसानी से जलते हैं और न ही जहरीला धुआं उत्पन्न करते हैं। इन पेंट्स की एक खास विशेषता यह भी है कि ये दीवार की सतह पर केवल परत नहीं बनाते, बल्कि कंक्रीट, प्लास्टर, ईंट और पत्थर जैसी सतहों के साथ रासायनिक रूप से जुड़कर उनका स्थायी हिस्सा बन जाते हैं। इसी क्षेत्र में कार्यरत जाइडेक्स सिलिकेट मिनरल पेंट्स का दावा है कि उसके उत्पादों को क्लास-1 फायर रेजिस्टेंस प्रमाणन प्राप्त है, जो अग्नि प्रतिरोध की सर्वोच्च श्रेणी मानी जाती है।

कंपनी के अनुसार, परीक्षणों में यह पेंट आग को फैलाने के बजाय केवल सीमित रूप से प्रभावित होता है और लपटों को बढ़ावा नहीं देता। जाइडेक्स ग्रुप के प्रबंध निदेशक डॉ. मौलिक रंका का कहना है कि भारत का निर्माण क्षेत्र ऐसे दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां अग्नि सुरक्षा केवल भवन की संरचना तक सीमित नहीं रह सकती।

उनके अनुसार, भवनों के अंदर उपयोग होने वाली सामग्री और कोटिंग्स को भी अधिक सुरक्षित बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं और जहां निकासी अपेक्षाकृत कठिन होती है, वहां ऐसे सुरक्षित पेंट की आवश्यकता अधिक है। इनमें स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, होटल, सिनेमा हॉल, पुस्तकालय, बड़े व्यावसायिक परिसर और ऊंची आवासीय इमारतें शामिल हैं। जाइडेक्स के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) अमरेंद्र मिश्रा का कहना है कि भारत में अब स्वास्थ्य, पर्यावरण और अग्नि सुरक्षा को ध्यान में रखकर निर्माण सामग्री चुनने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। उनके अनुसार, सिलिकेट मिनरल पेंट अब केवल प्रीमियम या टिकाऊ विकल्प नहीं रह गए हैं, बल्कि इन्हें अग्नि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है।

Sumant Chaudhary