Delhi News : भारतीय रेलवे में अब एलपीजी और डीजल की जगह पाइपलाइन से मिलने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। इसके लिए इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) और उत्तरी रेलवे के दिल्ली डिवीजन के बीच एक अहम समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत दिल्ली, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के 22 रेलवे प्रतिष्ठानों में पीएनजी की सप्लाई की जाएगी। इससे रेलवे के ईंधन खर्च में कमी आने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।यह पहल केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पीएनजी ड्राइव 3.0 के तहत शुरू की गई है।
इसका उद्देश्य बड़े संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पारंपरिक ईंधन की जगह पाइपलाइन से मिलने वाली प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल बढ़ाना है। इससे देश में प्राकृतिक गैस की खपत बढ़ेगी और दूसरे देशों से एलपीजी आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर उत्तरी रेलवे के दिल्ली डिवीजन के डीआरएम पुष्पेश रमन त्रिपाठी, आईजीएल के अध्यक्ष सुभंकर सेन, प्रबंध निदेशक कुमार शंकर और निदेशक (वाणिज्यिक) मोहित भाटिया सहित दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।
रेलवे के खर्च में आएगी कमी
इस मौके पर डीआरएम पुष्पेश रमन त्रिपाठी ने कहा कि पीएनजी के इस्तेमाल से भारतीय रेलवे के ईंधन खर्च में काफी कमी आएगी। आने वाले समय में रेलवे अस्पतालों और आवासीय कॉलोनियों तक भी पीएनजी कनेक्शन पहुंचाने की योजना है। उन्होंने कहा कि यह समझौता आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस सहयोग के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का भी आभार जताया।
आईजीएल के अध्यक्ष सुभंकर सेन ने कहा कि भारतीय रेलवे ने एलपीजी की जगह पीएनजी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए आईजीएल को अपना सहयोगी चुना है। इससे बड़ी मात्रा में एलपीजी की खपत कम होगी। साथ ही गैस आयात पर निर्भरता और सब्सिडी का बोझ घटाने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना का फायदा केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में रेलवे के दूसरे क्षेत्रों में भी पीएनजी का इस्तेमाल बढ़ सकता है।
22 रेलवे स्थानों पर शुरू होगी सप्लाई
योजना के पहले चरण में दिल्ली, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के 22 रेलवे स्थानों पर पीएनजी उपलब्ध कराई जाएगी। इनमें दिल्ली सराय रोहिल्ला, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, आनंद विहार टर्मिनल, हजरत निजामुद्दीन और नई दिल्ली की विभागीय मशीनीकृत लॉन्ड्री शामिल हैं। इसके अलावा अधिकारियों के विश्राम गृह, बेस किचन, रनिंग रूम, अधीनस्थ विश्राम गृह और गार्ड व टीटीई लॉबी में भी पीएनजी का इस्तेमाल किया जाएगा। लॉन्ड्री में पीएनजी से बॉयलर चलाए जाएंगे।
रोजाना 500 किलो एलपीजी और 2500 लीटर डीजल की होगी बचत
आईजीएल के मुताबिक, शुरुआत में इन रेलवे प्रतिष्ठानों में रोजाना करीब 3,000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर पीएनजी की खपत होने का अनुमान है। इससे हर दिन लगभग 500 किलो एलपीजी और 2,500 लीटर डीजल की खपत की जगह प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल किया जा सकेगा। आईजीएल के प्रबंध निदेशक कुमार शंकर ने कहा कि यह साझेदारी रेलवे और गैस वितरण कंपनियों के बीच सहयोग का नया मॉडल बनेगी। वहीं, निदेशक (वाणिज्यिक) मोहित भाटिया ने कहा कि यह समझौता केवल गैस सप्लाई तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ और बेहतर ऊर्जा व्यवस्था की ओर बढ़ाया गया कदम है।
10 हजार एससीएमडी तक पहुंच सकती है मांग
आईजीएल की योजना आने वाले वर्षों में इस नेटवर्क का विस्तार करने की है। अजमेर, बांदा, रेवाड़ी और मुजफ्फरनगर सहित अन्य क्षेत्रों में पाइपलाइन और कनेक्शन बढ़ने के बाद पीएनजी की रोजाना मांग 8,000 से 10,000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर तक पहुंचने की उम्मीद है। इस पहल से रेलवे में ईंधन का प्रबंधन आसान होगा, नियमित सप्लाई मिलेगी और एलपीजी व डीजल पर निर्भरता कम होगी। साथ ही देश में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।


Download Android App
Download iOS App




