एक ब्रोंटो हाइड्रोलिक स्काई लिफ्ट के सहारे दिल्ली की दमकल व्यवस्था

Summary :

Prasad Nagar Fire Rescue Failure: दिल्ली में तेजी से खड़ी हो रही बहुमंजिला इमारतों के बीच दमकल विभाग की तैयारियों की हकीकत चिंताजनक तस्वीर पेश की है। करोड़ों की आबादी वाली राजधानी में आग से निपटने के लिए जरूरी आधुनिक संसाधनों का भारी अभाव सामने आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि पूरे शहर की फायर सेफ्टी व्यवस्था महज एक ब्रोंटो हाइड्रोलिक स्काई लिफ्ट के भरोसे टिकी नजर आती है, जो भी केवल कनॉट प्लेस फायर स्टेशन तक सीमित है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब शहर के अलग-अलग हिस्सों में ऊंची इमारतों में आग लगने की…

Prasad Nagar Fire Rescue Failure: दिल्ली में तेजी से खड़ी हो रही बहुमंजिला इमारतों के बीच दमकल विभाग की तैयारियों की हकीकत चिंताजनक तस्वीर पेश की है। करोड़ों की आबादी वाली राजधानी में आग से निपटने के लिए जरूरी आधुनिक संसाधनों का भारी अभाव सामने आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि पूरे शहर की फायर सेफ्टी व्यवस्था महज एक ब्रोंटो हाइड्रोलिक स्काई लिफ्ट के भरोसे टिकी नजर आती है, जो भी केवल कनॉट प्लेस फायर स्टेशन तक सीमित है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब शहर के अलग-अलग हिस्सों में ऊंची इमारतों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। सवाल उठता है कि क्या एक ही मशीन ट्रैफिक और लंबी दूरी को पार कर हर जगह समय पर पहुंच सकती है? हकीकत यह है कि देर होनी तय है और इस देरी की कीमत अक्सर लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। दमकल विभाग की यह कमजोर तैयारी न सिर्फ सिस्टम की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी बताती है कि बड़े हादसे के इंतजार में ही व्यवस्था जागती है।

तीन ही हाइड्रोलिक स्काई लिफ्ट उपलब्ध

वरिष्ठ फायर अधिकारियों के अनुसार, पूरे शहर में केवल तीन ही हाइड्रोलिक स्काई लिफ्ट उपलब्ध हैं द्वारका, प्रसाद नगर और कनॉट प्लेस में। इनमें से प्रसाद नगर की लिफ्ट पहले से खराब पड़ी है, जबकि द्वारका वाली मौके पर जाकर जवाब दे गई। फिलहाल केवल कनॉट प्लेस की एक मशीन ही सही हालत में है। ऐसे में सवाल उठता है कि करोड़ों की आबादी वाले शहर में ऊंची इमारतों में आग लगने पर दमकल विभाग आखिर किस भरोसे काम कर रहा है। करीब तीन से चार करोड़ रुपये कीमत वाली यह अत्याधुनिक मशीनें अगर जरूरत के समय काम न आए, तो इन्हें रखना भी लोगों के लिए ‘सफेद हाथी’ साबित हो रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ब्रोंटो हाइड्रोलिक स्काई लिफ्ट ऊंची इमारतों में फंसे लोगों को बचाने का सबसे अहम उपकरण है, लेकिन इसकी कमी और खराब रखरखाव ने दिल्ली की फायर सेफ्टी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

पालम में हाइड्रोलिक फायर टेंडर खराबी बनी थी मौत की वजह

गौरतलब है कि, पालम के राम मार्केट में भीषण आग की घटना ने इस बदहाल व्यवस्था की पोल खोल दी, जहां एक दुकान में लगी आग में नौ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राहत और बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा ब्रोंटो हाइड्रोलिक स्काई लिफ्ट की खराबी बनी। द्वारका फायर स्टेशन से पहुंची लिफ्ट मौके पर काम नहीं कर सकी, जिसके बाद कनॉट प्लेस से दूसरी मशीन मंगवानी पड़ी। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और नौ लोगों की जान जा चुकी थी।

फायर स्टेशन से महज चार किलोमीटर दूर हुआ हादसा

दिल्ली फायर सर्विस के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पालम के राम मार्केट में आगजनी की घटना द्वारका फायर स्टेशन से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर हुई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए फायर टेंडर, वॉटर टैंकर, रैपिड रेस्क्यू व्हीकल और एंबुलेंस मौके के लिए रवाना कर दीं। अधिकारी ने बताया कि दूरी कम होने के कारण टीम कुछ ही समय में घटनास्थल पर पहुंच गई थी, लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल था। चार मंजिला इमारत से उठती लपटें और धुएं के गुबार दूर तक दिखाई दे रहे थे। दमकल कर्मियों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए आग बुझाने और राहत-बचाव कार्य शुरू किया, जिससे आगे नुकसान को रोकने में मदद मिली।

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।