Ramlila Maidan Teachers Protest: पूरे भारत में शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के जुड़े आदेश के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी को लेकर शिक्षकों में नाराजगी है। इसी विरोध प्रदर्शन के लिए आज शनिवार को हजारों की संख्या में उत्तर प्रदेश सहित 20 राज्यों के शिक्षकों ने रामलीला मैदान में हुंकार भरी। शिक्षकों ने एक सुर में कहा कि केंद्र सरकार उनकी मांग नहीं मानती तो वे संसद का भी घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ केंद्र को नया कानून बनाना चाहिए।
दिल्ली के रामलीला मैदान में शिक्षक एकजुट
टीचर्स फाउंडेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले आज दिल्ली के रामलीला मैदान में शिक्षक एकजुट हुए। उन्होंने एक सुर में नए कानून को वापस लेने की मांग की। शिक्षकों की मांग है कि जिन शिक्षकों की आरटीई कानून लागू होने से पहले नियुक्ति हो चुकी है उनको इस बाध्यता से मुक्त रखा जाए।
इस नए नियम से पूरे देश के 20 लाख शिक्षक प्रभावित होने वाले हैं। इसलिए रामलीला मैदान से शिक्षकों ने एक सुर में इस कानून को रद्द करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि केंद्र सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती तो वह संसद तक का घेराव करने से पीछे नहीं हटेंगे। दिल्ली के पड़ोसी राज्यों से सैकड़ों बसों और निजी वाहनों से भी शिक्षकों ने प्रदर्शन में भाग लिया।
नए नियम से नाराज हैं शिक्षक
शिक्षकों का कहना है कि 15 साल नौकरी करने के बाद अब उन्हें परीक्षा पास करने को कहा जा रहा है। उनका तर्क है कि जैसे नीट, यूपीएससी या जूडिशीएरी की परीक्षा पास करके 15 साल की नौकरी के बाद दोबारा कोई नीट, यूपीएससी या ज्यूडिशियरी की पास कर पाएगा? ऐसे ही 15 साल या उससे अधिक समय तक नौकरी करने के बाद उनके लिए परीक्षा पास करना मुश्किल है। टीचर्स का दावा है कि इस नए नियम से कम से कम 20-25 लाख टीचर्स प्रभावित होंगे।
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