सस्ते आवासों के लिए जमीन और प्लानिंग से जुड़े सुधार जरुरी: राजीव गौबा

Summary :

National conference organized : आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा मंगलवार को किफायती आवास सुधारों पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। किफायती आवास की नई सोच: योजना से टिकाऊ इकोसिस्टम तक विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में वरिष्ठ नीति-निर्माता, विशेषज्ञ और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों तथा प्रमुख वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए, ताकि किफायती आवास इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सुधारों और नए तरीकों पर चर्चा की जा सके। सम्मेलन में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा मुख्य अतिथि के रूप में और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के शहरी विकास विभाग के सचिव…

National conference organized : आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा मंगलवार को किफायती आवास सुधारों पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। किफायती आवास की नई सोच: योजना से टिकाऊ इकोसिस्टम तक विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में वरिष्ठ नीति-निर्माता, विशेषज्ञ और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों तथा प्रमुख वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए, ताकि किफायती आवास इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सुधारों और नए तरीकों पर चर्चा की जा सके।

सम्मेलन में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा मुख्य अतिथि के रूप में और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के शहरी विकास विभाग के सचिव सतेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में हाउसिंग फॉर ऑल के जॉइंट सेक्रेटरी और मिशन डायरेक्टर कुलदीप नारायण ने हाउसिंग सुधारों पर प्रकाश डाला। वहीं, अपने संबोधन में राजीव गौबा ने बड़े पैमाने पर किफायती आवास (अफोर्डेबल हाउसिंग) का विस्तार करने के लिए जमीन और प्लानिंग से जुड़े सुधारों की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि शहरों में किफायती आवास बढ़ाने के लिए ज़मीन की उपलब्धता और शहरी प्लानिंग में सुधार बहुत जरूरी हैं, और ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन की उपलब्धता बेहतर बनाने के उपाय जरुरी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि किफायती आवास के लिए तय जमीन पर ‘लैंड-यूज़ चेंज फीस’ (जमीन के इस्तेमाल में बदलाव की फीस) माफ करने और किफायती आवास यूनिट्स को स्टाम्प ड्यूटी से छूट देने पर विचार किया जाए, ताकि प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता और किफायतीपन को बेहतर बनाया जा सके।

उन्होंने प्रवासी मज़दूरों, युवा प्रोफेशनल्स, छात्रों और औद्योगिक मजदूरों के लिए किराए के आवास का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ किरायेदारी के ढांचे में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। वहीं, सतेंद्र सिंह ने नीति आयोग और समिति की किफायती घरों को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक ढांचा नाम की अच्छी तरह से रिसर्च की गई रिपोर्ट तैयार करने के लिए उनकी सराहना की।

Sumant Chaudhary