RML अस्पताल में दवाओं और सर्जिकल सामान की कमी से मरीज बेहाल

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RML Hospital : राजधानी के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में दवाओं और सर्जिकल कंज्यूमेबल्स की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं में कई आवश्यक और जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध नहीं होने से उपचार प्रभावित हो रहा है। मरीजों का आरोप है कि उन्हें अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं के अभाव में बाहर से दवाएं और जरूरी चिकित्सा सामग्री खरीदनी पड़ रही है। जानकारी के अनुसार, पेंटाप्राजोल इंजेक्शन, ब्लड थिनर और कई एंटीबायोटिक्स जैसी महत्वपूर्ण दवाओं का स्टॉक प्रभावित है। इसके अलावा ऑपरेशन और विभिन्न…

RML Hospital : राजधानी के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में दवाओं और सर्जिकल कंज्यूमेबल्स की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं में कई आवश्यक और जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध नहीं होने से उपचार प्रभावित हो रहा है।

मरीजों का आरोप है कि उन्हें अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं के अभाव में बाहर से दवाएं और जरूरी चिकित्सा सामग्री खरीदनी पड़ रही है। जानकारी के अनुसार, पेंटाप्राजोल इंजेक्शन, ब्लड थिनर और कई एंटीबायोटिक्स जैसी महत्वपूर्ण दवाओं का स्टॉक प्रभावित है। इसके अलावा ऑपरेशन और विभिन्न जांचों के लिए सर्जिकल ग्लव्स, डिस्पोजेबल गाउन, बैंडेज तथा अन्य जरूरी कंज्यूमेबल्स भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों के परिजनों को निजी मेडिकल स्टोर से सामान खरीदना पड़ रहा है।

सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर

इस स्थिति का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर पड़ रहा है, जो मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं। इलाज के दौरान अतिरिक्त खर्च उठाने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि प्रशासनिक बदलाव और टेंडर प्रक्रिया में हुई देरी के कारण दवाओं और सर्जिकल सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

प्रशासन के अनुसार, स्थिति को सामान्य बनाने के लिए आपातकालीन खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नए टेंडर भी जारी किए जा रहे हैं।

हाईकोर्ट भी ले चुका है संज्ञान

हाल ही में मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया। अस्पताल में सुविधाओं की कमी और अनिवार्य एनएटी (न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग) मशीन के खराब होने जैसे मुद्दों पर अदालत ने अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट ने चिकित्सा अधीक्षक को विस्तृत रिपोर्ट और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।

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Avinay