Satya Niketan incident : दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में हुई घटना के बाद प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को मुआवजा देने की मांग को लेकर डूसू के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मांग पर कार्रवाई का आश्वासन मिला है, लेकिन जब तक प्रभावित परिवारों को वास्तविक राहत नहीं मिलती, तब तक सत्याग्रह समाप्त नहीं किया जाएगा।
दीपांशु ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष मुआवजे की मांग को लेकर पत्र सौंपा था। इसके बाद वित्त अधिकारियों को भी इस संबंध में एडवाइजरी भेजे जाने की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से मिले सकारात्मक संकेत को वह महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, मांग को औपचारिक रूप से स्वीकार करने और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जाएगा।
जरूरत पड़ी तो धरना देंगे
दीपांशु ने कहा कि छात्रों और उनके परिवारों से जुड़े मामले में केवल बैठक, बातचीत या आश्वासन तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो वह धरने पर बैठेंगे। उनका कहना है कि सत्याग्रह का उद्देश्य केवल प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के लिए वास्तविक सहायता सुनिश्चित कराना है।
उन्होंने कहा कि जब तक मुआवजे की मांग पूरी तरह स्वीकार नहीं होती, तब तक छात्रों की आवाज उठाई जाती रहेगी। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को आगे भी बढ़ाया जाएगा।
छात्रों के मुद्दों पर साथ आने वालों का समर्थन
डूसू उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जो भी संगठन या राजनीतिक दल उनके साथ खड़ा होगा, वह उसके साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनका फोकस किसी एक राजनीतिक संगठन के साथ जाने के बजाय छात्रों के मुद्दों को मजबूती से उठाने पर है। दीपांशु ने कहा कि सत्य निकेतन मामले में प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को राहत मिलना प्राथमिकता है।


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