निकाय चुनाव : पंजाब का जनादेश

Summary :

पंजाब की सियासत में स्थानीय निकाय चुनाव एक इबारत की तरह दर्ज हुए हैं। जिसमें सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी 102 नगर निकायों के चुनाव में 925 सीटें जीतने के साथ पहले नम्बर पर रही जबकि कांग्रेस 374 सीटें जीतकर दूसरे नम्बर पर रही है। शिरोमणि अकाली दल 189 सीटों के साथ तीसरे नम्बर पर रहा है, जबकि भाजपा चौथे नम्बर पर रही है। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 248 सीटों पर विजय हासिल कर सबको चौंका दिया है। आम धारणा यही है कि जिस पार्टी की सरकार सत्ता में होती है, स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाता उसी पार्टी को वोट दे देते…

पंजाब की सियासत में स्थानीय निकाय चुनाव एक इबारत की तरह दर्ज हुए हैं। जिसमें सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी 102 नगर निकायों के चुनाव में 925 सीटें जीतने के साथ पहले नम्बर पर रही जबकि कांग्रेस 374 सीटें जीतकर दूसरे नम्बर पर रही है। शिरोमणि अकाली दल 189 सीटों के साथ तीसरे नम्बर पर रहा है, जबकि भाजपा चौथे नम्बर पर रही है। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 248 सीटों पर विजय हासिल कर सबको चौंका दिया है। आम धारणा यही है कि जिस पार्टी की सरकार सत्ता में होती है, स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाता उसी पार्टी को वोट दे देते हैं। पंजाब के मतदाताओं ने भी सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को जितवा कर डबल इंजन की सरकारों की धारणा को पुख्ता बनाते हुए जनादेश दिया। शहरों की सरकार चुनने के लिए स्थानीय मुद्दे पृष्ठभूमि में चले गए थे और सारा का सारा चुनाव 2027 के विधानसभा चुनावों को सामने रखते हुए लड़ा गया। चुनावी मुद्दे भी वही रहे जो 8 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में रहने वाले हैं। 8 नगर निगमों में से आप ने मोहाली, बरनाला, बटाला, मोगा और ब​ठिंडा नगर निगमों पर कब्जा जमा लिया, जबकि कांग्रेस कपूरथला नगर​ ​िनगम और भाजपा ने अबोहर नगर निगम जीता।
भाजपा का गढ़ माने जाने वाले पठानकोट नगर निगम में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी लेकिन बहुमत हासिल नहीं कर पाई। आम आदमी पार्टी की बम्पर जीत से यह स्पष्ट है कि पंजाब के लोगों में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सरकार के कामकाज को बेहतर मानते हुए उस पर मोहर लगा दी है। पंजाब के जनादेश का अर्थ यही है कि भगवंत मान सरकार द्वारा बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार, महिलाओं को हर माह धन आैर नशों के विरुद्ध सरकार के अभियान और अन्य कल्याणकारी योजनाओं को सराहा है। इस तरह मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अग्निपरीक्षा पास कर ली है। विपक्ष कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल आैर अन्य पार्टियां राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था, गैंगस्टरों की बढ़ती वारदातें, हैड ग्रेनेड हमलों और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर शोर-शराबा मचाती रहीं लेकिन इनका कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ। आप पार्टी के बारे में पहले कहा जाता था कि नई पार्टी है पंजाब के शहरों ने उन्हें मौका दे दिया लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों के जनादेश ने बड़ा संदेश यह दिया कि पार्टी अब केवल शहरियों की पसंद नहीं है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी उसका जनाधार काफी बढ़ चुका है। आम आदमी पार्टी ने ​िवपक्ष के कई दिग्गज नेताओं के क्षेत्रों में जबरदस्त सेंधमारी की है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरेन्द्र सिंह राजा वडिंग के गढ़ माने गए गिदड़वाहा में आप को जबरदस्त जीत हासिल हुई। शिरोमणि अकाली दल के गढ़ बठिंडा में भी उसे हार का मुंह देखना पड़ा है। पंथक सीट आनंदपुर साहिब में भी आप पार्टी ने झाड़ू फेर दिया।
हाल ही में पंजाब भाजपा के अध्यक्ष बनाए गए केवल सिंह ढिल्लों के क्षेत्र बरनाला में भी आप पार्टी ने बम्पर जीत हासिल की। कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षाकृत निराशाजनक रहा जबकि शिरोमणि अकाली दल (शिअद) को भी नुक्सान हुआ। कांग्रेस और शिअद के प्रदर्शन का जिक्र करना इसलिए जरूरी है क्योंकि दोनों दलों ने लंबे समय तक पंजाब सूबे की सत्ता को संभाला है। ऐसी स्थिति में निकाय चुनाव में इन दलों के ऐसे हश्र की उम्मीद नहीं थी, वो भी तब जब पिछले साढ़े चार साल से पार्टी के आला नेता आप सरकार की घेराबंदी में जुटे हुए थे। इन दलों की घेराबंदी ध्वस्त हुई। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में 13 में से 7 सीटें जीतने के बाद कांग्रेस इस बात का दावा कर रही थी कि उन्होंने साल 2022 के विधानसभा चुनाव में आप की आंधी (117 में से 92 सीटों पर जीत) को रोक दिया है। आला नेता भी शहरी और ग्रामीण मतदाताओं पर पार्टी की पकड़ को मजबूत बता रहे थे। मगर साल 2026 के निकाय चुनाव के नतीजों ने तस्वीर ही बदल दी।
शिरोमणि अकाली दल के दो फाड़ होने से उसकी पंथक वोट बट चुकी है आैर कांग्रेस अभी भी गुटबाजी का ​िशकार है। यद्यपि चुनावों में भाजपा को ज्यादा सीटें हासिल नहीं हुई लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि भाजपा पंजाब में लगातार अपना जनाधार बढ़ा रही है। वर्ष 2021 के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा 2215 में से केवल 49 सीटें जीत पाई थी लेकिन इस बार उसने अपनी सधी हुई राजनीति के चलते 167 सीटें जीत ली हैं। ​िवजयी हुए निर्दलीय उम्मीदवारों में डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब दे आैर अकाली दल (पुनर्सृजत) के समर्थित उम्मीदवार भी हैं। चुनाव परिणामों ने संकेत दे दिए हैं कि अगामी विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होंगे।
विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के चुनावी गठबंधन की सम्भावनाएं तलाशी जा रही हैं। चुनावी गठबंधन से पहले केन्द्र की मोदी सरकार को और भाजपा हाईकमान को किसानों के लम्बित मुद्दों आैर शिरोमणि अकाली दल की पंथक मांगों के संबंध में ठाेस कदम उठाने होंगे तभी गठबंधन ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पैठ बना पाएगा। कांग्रेस को भी अपनी पार्टी में संगठनात्मक फेरबदल करने होंगे। देखना होगा कि विपक्षी पा​िर्टयां अपनी राजनीतिक रणनीति को किस प्रकार धार देती हैं। आम आदमी पार्टी में भगवंत मान का सियासी कद बढ़ गया है। पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल केन्द्र को जमकर निशाना बना रहे हैं। देखना होगा कि विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी का जादू कितना चलता है।

Aditya Chopra

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