सर्बिया चुनाव में ‘कॉकरोचों’ की जीत

Summary :

नेपाल और बांग्लादेश के बाद सर्बिया में छात्र आंदोलन सत्ता बदलने में कामयाब हो गए हैं। जी हां, 2 साल से चल रहे छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के चलते 14 साल से सत्ता में काबिज अलेक्जेंडर वुविच चुनाव हार गए हैं। चुनाव में उनकी दक्षिणपंथी पार्टी को छात्रों के नेतृत्व वाले विपक्षी आंदोलन ने कड़ी टक्कर दी थी। इस आंदोलन के तहत 2 साल से वुविच की सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा था। वहीं बाल्कन देश में हुआ यह सियासी उलटफेर बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थक वुविच 14 साल से बहुमत के…

नेपाल और बांग्लादेश के बाद सर्बिया में छात्र आंदोलन सत्ता बदलने में कामयाब हो गए हैं। जी हां, 2 साल से चल रहे छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के चलते 14 साल से सत्ता में काबिज अलेक्जेंडर वुविच चुनाव हार गए हैं। चुनाव में उनकी दक्षिणपंथी पार्टी को छात्रों के नेतृत्व वाले विपक्षी आंदोलन ने कड़ी टक्कर दी थी। इस आंदोलन के तहत 2 साल से वुविच की सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा था।

वहीं बाल्कन देश में हुआ यह सियासी उलटफेर बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थक वुविच 14 साल से बहुमत के साथ देश की सरकार चला रहे थे। अब चुनावी हार के बाद उन्होंने छात्र आंदोलन को उन्हें सत्ता से हटाने की विदेशी ताकतों की साजिश करार दिया है। इससे एक ऐतिहासिक चुनाव के बाद एक बड़ा राजनीतिक बदलाव आया है। वहां दो साल से छात्र, शिक्षक, किसान और आम लोग वुविच सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे।

इन आंदोलनकारियों ने अलग-अलग सैक्टर से अपने कैंडिडेट्स चुनाव मैदान में उतारे थे। इन सबके बीच जो शख्स इस विरोध- प्रदर्शन का मुख्य चेहरा बना और वुविच सरकार की ताबूत में अंतिम कील ठोंकने वाला साबित हुआ। वह एक यूनिवर्सिटी का आम प्रोफेसर है। उसने छात्रों के विरोध और गुस्से का समर्थन किया और सरकार की खिलाफत में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। सर्बिया में प्रदर्शनकारी छात्रों के इस चेहरे का नाम – इलिजा सर्डानोविक है।

इलिजा सर्डानोविक सर्बिया के लंबे समय से नेता रहे अलेक्जेंडर वुविच के लिए एक मुश्किल विरोधी साबित हुए, उन्हें विपक्षी आंदोलन के टॉप कैंडिडेट के तौर पर चुना गया था, जो 2012 में सर्बियाई प्रोग्रेसिव पार्टी के सरकार में आने के बाद से वुविच के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने रहे। खुद चुनाव लड़ने के बजाय, देश की यूनिवर्सिटी फैकल्टी में प्रोफेसर की अगुआई वाली असेंबली ने पार्लियामेंट्री चुनाव में खड़े होने के लिए 250 कैंडिडेट चुने थे। इसमें नोवी शहर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सर्डानोविक इस लिस्ट में सबसे ऊपर थे।

नोवी साद वही शहर है, जहां एक रेलवे स्टेशन की छत गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना से नाराज लोगों ने सर्बिया की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। यहीं से भ्रष्टाचार और घोटाले के खिलाफ आवाज बुलंद हुई। इसी शहर के एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर ने अलेक्जेंडर वुविच को चुनाव में कड़ी शिकस्त दी है। बाल्कन क्षेत्र के इस देश में यह एक बड़ा राजनीतिक बदलाव था। वुविच पिछले 14 वर्षों से लगभग पूरी सत्ता अपने हाथ में रखे हुए थे। उन्हें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का समर्थन हासिल था। उन्होंने छात्र आंदोलन को उन्हें सत्ता से हटाने की विदेशी ताकतों के नेतृत्व वाली कोशिश बताते हुए उसकी आलोचना की थी।

नतीजे सामने आते ही राजधानी बेलग्रेड और सर्बिया के दूसरे शहरों की सड़कों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग खुशी से झूमते हुए जश्न मनाने लगे। सर्बिया में हुए बेहद कड़े मुकाबले वाले संसदीय चुनाव में भारी मतदान हुआ और तनाव भी बढ़ा रहा। इस चुनाव में वुविच और उनकी दक्षिणपंथी सर्बियाई प्रोग्रेसिव पार्टी (एसएनएस) का मुकाबला विश्वविद्यालय के छात्रों से था। छात्रों ने सरकार पर भ्रष्टाचार और लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप लगाए थे। इस आंदोलन को देशभर में व्यापक जनसमर्थन मिला था।

वुविच ने चुनावी नतीजों के बाद अपनी पार्टी के कार्यक्रम में समर्थकों से कहा, ‘अब यह स्पष्ट है कि हम हार गए हैं और ‘स्टूडेंट्स लिस्ट’ जीत गई है।’ हालांकि, उन्होंने अपनी हार के लिए सर्बिया के स्वतंत्र मीडिया के साथ-साथ कुछ यूरोपीय देशों और ‘अमेरिकी डीप स्टेट’ के कथित हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया। स्टूडेंट्स लिस्ट का नेतृत्व विश्वविद्यालय के छात्रों ने किया, हालांकि छात्र स्वयं उम्मीदवारों की सूची में शामिल नहीं थे। इसके बजाय इसमें विशेषज्ञों, खिलाड़ियों, किसानों और कलाकारों जैसे लोगों को जगह दी गई।

यह इस समय सबसे अहम सवाल है। सर्बिया में प्रधानमंत्री का चुनाव जनता सीधे नहीं करती। संसदीय चुनाव में जीतने वाले दलों और सूचियों के समर्थन के आधार पर सरकार बनती है। संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, राष्ट्रपति निर्वाचित सूचियों के प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को प्रस्तावित करते हैं। इसके बाद संसद में प्रधानमंत्री, उनके कार्यक्रम और मंत्रिमंडल को बहुमत का समर्थन हासिल करना होता है। इलिचा सर्डानोविक छात्र समर्थित सूची के प्रमुख उम्मीदवार हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पद के लिए अंतिम फैसला अभी सरकार गठन की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

इलिजा सर्डानोविक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर हैं और स्टूडेंट लिस्ट कैंडिडेट्स में सबसे ऊपर हैं आंदोलन ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने का वादा किया। यूरोपीय संघ ने भी चुनाव पर करीबी नजर रखी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने छात्र आंदोलन को बधाई देते हुए कहा कि सर्बिया के लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान कर अपने देश का भविष्य तय किया है। उन्होंने कानून के शासन, मीडिया की स्वतंत्रता, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में सहयोग की पेशकश की।

Aakash Chopra