भारत-जर्मनी दोस्ती की नई उड़ान

Summary :

तेजी से बदलती जटिल दुनिया में जहां कई मुद्दों और क्षेत्रों को लेकर विरोधाभास और संघर्ष है। ऐसी स्थिति में हर देश अपने लिए अलग-अलग रास्ते अपना रहे हैं। सहयोग के रास्तों पर ध्यान केन्द्रित करने से ही संघर्षों से बचा जा सकता है। आज की दुनिया में रक्षा संबंधों, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, विज्ञान और अनुसंधान, व्यापार आदि क्षेत्रों में व्यापक रूप से आगे बढ़ने की जरूरत है। भारत-जर्मनी अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। भारत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था। 7 मार्च 1951 भारत…

तेजी से बदलती जटिल दुनिया में जहां कई मुद्दों और क्षेत्रों को लेकर विरोधाभास और संघर्ष है। ऐसी स्थिति में हर देश अपने लिए अलग-अलग रास्ते अपना रहे हैं। सहयोग के रास्तों पर ध्यान केन्द्रित करने से ही संघर्षों से बचा जा सकता है। आज की दुनिया में रक्षा संबंधों, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, विज्ञान और अनुसंधान, व्यापार आदि क्षेत्रों में व्यापक रूप से आगे बढ़ने की जरूरत है। भारत-जर्मनी अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। भारत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था। 7 मार्च 1951 भारत और जर्मनी में आधिकारिक तौर पर राजनयिक संबंध स्थापित किए गए थे और इस वर्ष राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे हो रहे हैं।

जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर भारत में हैं। जर्मनी के चांसलर की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते को लेकर तनाव बना हुआ है। मर्ज ने चांसलर के तौर पर अपने पहले एशिया दौरे के लिए भारत को चुना है। इस तरह उन्होंने एक पुरानी परम्परा को तोड़ा है जिसमें जर्मन नेता आमतौर पर चीन या जापान जाते थे। इस रुख को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। यह जर्मनी की विदेश नीति की कैलकुलेशन में भारत के बढ़ते रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। भारत और जर्मनी की दोस्ती की पतंग लम्बी उड़ान भरेगी। इसका नजारा साबरमती के रिवर फ्रंट पर देखने को मिला। जब मर्ज ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अन्तर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लिया।

बाद में गांधी नगर के महात्मा मंदिर में दोनों नेताओं में बातचीत के दौरान महत्वपूर्ण समझौते हुए। दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर, दुलर्भ खनिजों, फ्री ट्रांजिट वीजा, रक्षा, स्पेस, रिन्यूएबल एनर्जी, पर्यावरण सहित 19 समझौते हुए। जर्मनी, यूरोपीय संघ में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2024-25 में भारत-जर्मनी के बीच वस्तुओं और सेवाओं का अरब डॉलर तक पहुंच गया। चांसलर मर्ज की यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक लम्बे समय तक चलने वाले जुड़ाव की शुरूआत करती है। गणतंत्र दिवस समारोह के लिए यूरोपीय संघ के नेता भारत आ रहे हैं। जिसके बाद फरवरी में दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रोन दिल्ली आएंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलने और ​नियम आधारित विश्व व्यवास्था को तोड़ने के हालिया कदम जैसे कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके देश में घुसकर गिरफ्तार करने और ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की योजनाओं के बाद जर्मनी का रुख भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जर्मनी ने ट्रंप के विरुद्ध रुख अपनाया है। जर्मनी, फ्रांस, इटली, पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क ने एक संयुक्त बयान जारी कर यह साफ कर दिया है कि आर्कििटक क्षेत्र की सुरक्षा यूरोप की शीर्ष प्राथमिकताओं में है और ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला करना डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों का अधिकार है। यूरोपीय नेताओं ने यह भी साफ कर दिया है कि डेनमार्क जिसमें ग्रीनलैंड शामिल है।

नाटो का हिस्सा है और क्षेत्र में सुरक्षा नाटो सहयोगियों खासकर अमेरिका के साथ मिलकर सामूहिक रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए क्योंकि भारत और जर्मनी एक बहुध्रुवीय विश्व का निर्माण करना चाहते हैं लेकिन समस्या यह है कि चीन को भारत एक रणनीतिक खतरा मानता है। वहीं जर्मनी चीन को प्रमुख व्यापारिक साझेदार मानता है। कुछ मतभेदों के बावजूद भारत जर्मनी में द्विपक्षीय वार्ता काफी महत्वपूर्ण है। भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां सक्रिय हैं। सूत्रों के अनुसार, “अधिक जर्मन कंपनियां मेक इन इंडिया कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उत्सुक हैं। ग्रीन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट पार्टनरशिप ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी, मेट्रो परियोजनाओं और सोलर रूफटॉप परियोजनाओं सहित राष्ट्रीय परियोजनाओं में योगदान दे रही है।”

जर्मनी लोगों को कौशल प्रदान करने में अग्रणी अन्तर्राष्ट्रीय भागीदार है। सूत्रों के अनुसार, “कई जर्मन संस्थाएं इस संबंध में भारतीय अधिकारियों और एजेंसियों के साथ साझेदारी कर रही हैं।” जर्मन सरकार नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के पेशेवरों के लिए कौशल विकास केंद्र स्थापित करने में सहायता करेगी। जर्मन कंपनियों ने भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा, अगली पीढ़ी के हरित अवसंरचना और संबंधित क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति स्थापित कर ली है। हरित हाइड्रोजन और इसके उत्पादों के क्षेत्र में सहयोग में वृद्धि होगी। निर्यात नियंत्रणों को उदार बनाने के ​बाद जर्मनी उच्च प्रौद्योगिकी उत्पादों का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। जर्मनी में लगभग 60 हजार भारतीय छात्र पढ़ते हैं। जर्मनी कुशल भारतीय पेशेवरों को आकर्षित कर रहा है। यह भारत के लिए शुभ संकेत है और यह दोस्ती एक नई उड़ान भरेगी।

Aditya Chopra

Aditya Chopra is well known for his phenomenal viral articles.