पंजाब केसरी के ‘60 साल’ मुबारक

आज पंजाब केसरी को 60 साल हो गए हैं, इसलिए सभी पाठकों को पंजाब केसरी के…

आज पंजाब केसरी को 60 साल हो गए हैं, इसलिए सभी पाठकों को पंजाब केसरी के एक-एक कर्मचारी, पत्रकारों को बहुत-बहुत मुबारकबाद। यहां तक कि सभी हाॅकरों को भी बहुत-बहुत मुबारकबाद जो अखबार को पाठकों तक पहुंचाते हैं। क्योंकि पंजाब केसरी एक अखबार ही नहीं एक मिशन है, जिसके संस्थापक अमर शहीद लाला जगत नारायण जी और अमर शहीद रमेश चन्द्र जी ने इसे अपने खून से सींचा। यह उन दोनों का बलिदान है, जिन्होंने पंजाब केसरी को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। मेरे पति श्री अश्विनी जी ने जिस तरह लाला जी व रमेश जी की पत्रकारिता को नई ऊंचाइयां दीं आैर इसे राष्ट्रीय समाचार पत्र बनाया। मुझे गर्व है कि मेरे तीनों बेटे और भी आगे नई बुलंदी पर ले जा रहे हैं।

अमर शहीद लाला जी अपने जीवनकाल में ही चाहते थे कि पंजाब केसरी पंजाब से बाहर यानि इस महान दैनिक का संदेश राजधानी क्षेत्र व आसपास के हिन्दी प्रदेशों में फैलाएं और अपनी जड़ें मजबूत करें, वे चुनौतियों भरे दिन थे। आतंकवाद का माहौल था। ऐसे माहौल में मेरे पति एवं निर्भीक युवा पत्रकार श्री अश्विनी कुमार ने इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्हें उनके पिता और चाचा का आशीर्वाद भी साथ मिला। आदरणीय रमेश जी ने शहीद परिवार फंड शुरू किया। परन्तु इसी मध्य मेरे ससुर यानि अश्विनी जी के​ ​िपता श्री रमेश चन्द्र जी ने स्वतंत्र व निर्भीक पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। पंजाब की अखबार व शहीद परिवार फंड को आदरणीय चाचा जी ने सम्भाला। दिल्ली में नई चुनौतियों व पारिवारिक आघातों के बीच अश्विनी जी ने कलम-युद्ध की ज्योति को सुलगाए रखा। ऐसी मिसाल भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में शायद नहीं मिलती। इसके साथ-साथ अश्विनी जी ने हरियाणा के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी को तीव्रता के साथ महसूस किया। यहां पर सक्रिय राजनीति के क्षेत्र में स्वस्थ परम्पराओं के ​िलए अपने फर्ज को पूरी गम्भीरता के साथ महसूस किया और करनाल संसदीय क्षेत्र से एक अनूठे रिकॉर्ड के साथ संसद में प्रवेश किया। वहां संसद में भी उन्होंने जिस बुलंद आवाज के साथ प्रदेश व राष्ट्र के हितों को उठाया उसकी भी शायद मिसाल ढूंढना आसान नहीं होगा।

राज्य के हितों व पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा में अश्विनी जी ने अपने स्वास्थ्य पर भी ध्यान नहीं दिया और लगातार पूूज्य लाला जी व पूज्य रमेश जी के आदर्शों पर चलते हुए अपने प्रदेश के हितों के ​लिए जूझते रहे। अपने संसदीय क्षेत्र करनाल में 750 के करीब गांवों में शौचालयों की व्यवस्था, चौपाल की व्यवस्था, श्मशान घाट की व्यवस्थाएं करवाईं। कोई भी हरियाणा का ऐसा व्यक्ति नहीं जो उन्हें याद न करता हो। हमेशा मेरे फोन की घंटियां बजती रहती हैं, क्योंकि मेरा उनसे सीधा सम्पर्क रहता है। संघर्ष व चुनौतियों की इस मुश्किल डगर पर मैं हर कदम पर उनके साथ बनी रही। यह उन्हीं तीनों पीढ़ियों की ईमानदारी व स्वतंत्र तथा जुझारू पत्रकारिकता का ही परिणाम है कि आज मेरे तीनों बेटे आदित्य, अर्जुन, आकाश इस परम्परा को बुलंद किए हुए हैं। मुझे इस बात का गर्व है कि अतीत में भी और वर्तमान में भी हमने छोटे-छोटे हितों के लिए कभी अपने पाठकों को मीडियाकर्मियों के ​िहतों की बलि नहीं दी। हमारे परिवार ने समाचारों व विचारों के अलावा समाज के प्रति भी अपने कर्त्तव्यों के बारे में कभी कोताही नहीं बरती। स्वस्थ पत्रकारिता की नई पौध तैयार करने के लिए ‘जेआर मीडिया इंस्टीच्यूट’ (जगत नारायण, रमेश चन्द्र) की स्थापना और वृद्धों के सम्मान की रक्षा के​ लिए अलग-अलग स्थानों एवं शहरों में पंजाब केसरी वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की स्थापना की। अपने बुजुर्गों के स्वास्थ्य, मनोरंजन व तीर्थाटन आदि के साथ-साथ आध्यात्मिक योजनाओं को भी लागू किया है। इसके अलावा महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोजैक्ट आरम्भ किए हैं।

इन सारी योजनाओं की पृष्ठभूमि में हमारे तीनों कर्णधारों आदरणीय लाला जी, आदरणीय रमेश जी व अश्विनी जी की सोच व प्रेरणा काम करती रही है। जैसे पुरानी सभी परिभाषाएं बदल गई हैं वैसे ही मीडिया भी अब नए रूप में सामने आ रहा है। प्रिंट के साथ हम अब ​डिजिटल मीडिया में भी बहुत आगे निकल चुके हैं। हम सारा साल इसको सेलीब्रेट करेंगे। शुरूआत इसकी हरियाणा से कर रहे हैं। क्योंकि अमर शहीद लाला जगत नारायण जी और अश्विनी जी की कर्म भूमि हरियाणा रही है। मैं 60 वर्ष की इस यात्रा को निरंतर आगे ले जाने के लिए आप सबके आशीर्वाद, शुभकामनाओं के साथ चलेंगे। जिनके शुभकामना संदेश आए उनको मैं धन्यवाद देती हूं।

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