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सब तरफ हो हर्ष-अभिनंदन नववर्ष

अगर गम्भीरता से मूल्यांकन किया जाए तो पिछले कई वर्षों से देशभर के लाखों लोगों ने कुछ न कुछ खोया है। मैं यह बात इसलिए कह रही हूं कि वर्ष 2022 खत्म हो चुका है,

अगर गम्भीरता से मूल्यांकन किया जाए तो पिछले कई वर्षों से देशभर के  लाखों लोगों ने कुछ न कुछ खोया है। मैं यह बात इसलिए कह रही हूं कि वर्ष 2022 खत्म हो चुका है, आज नववर्ष 2023 का पहला दिन है और प्रभु के चरणों में सबकी खुशहाली के लिए प्रार्थना रख दी जाए और विश्वास है कि यह स्वीकार भी होगी। सब लोग हैल्दी रहें यही सबसे बड़ी खुशहाली है और इसी की हमें सबसे ज्यादा जरूरत है।  सच बात तो यह है कि वर्ष 2019 से लेकर 2022 की समाप्ति तक कोरोना ने हमें बहुत सताया है। हमने तरह-तरह के प्रतिबंध झेले हैं लेकिन कड़ी चुनौतियों और मुसीबतों के बीच भारत के लोगों ने जीना सीखा है और दुनिया को जीना ​िसखाया भी है। भगवान महावीर जी ने कभी यही पाठ दुनिया के लिए दिया था जिसमें जीयो और जीने दो का आह्वान किया गया था। भगवान कृष्ण ने भी गीता उपदेश दिया, जो होगा अच्छा होगा, कर्म करो फल की चिंता न करो। कोरोना में भारत के पीएम मोदी की आपदाओं को अवसर में बदलने के मंत्र को माना और देश सुरक्षित है। लेकिन यह बात सच है कि तैयारियां और सतर्कता हमें खुद ही रखनी है तभी सुरक्षित रह सकेंगे।
वर्ष 2023 के स्वागत के लिए सबकी अपनी-अपनी तैयारी है और अपना-अपना अंदाज है। सोशल मीडिया में सबके अपने-अपने अंदाज हैं। प्रजापिता ब्रह्मकुमारीज की बी.के. शिवानी दीदी का नजरिया बेहद सकारात्मक एवं हर्षमयी है, जिसमें वह कहती हैं कि 31 दिसम्बर की रात जैसे ही 12.00 बजेंगे हमें अपने परिवार एवं दोस्तों को बधाई देनी चाहिए। अपने आपको बधाई के साथ नववर्ष शुरू करने का आह्वान करें। दीदी ने कहा कि नववर्ष मेरे लिए शुभ हो और यह सबके लिए शुभ हो। यह सोचना चाहिए कि मुझे किसी को माफ करने की जरूरत है? किसी भी व्यथा को बाहर निकालने की जरूरत है। उन्होंने वही किया जो उनके लिए सही था। मैंने वही किया जो मुझे सही लगा और यह कहकर अपने कथन पर टिके रहें क्योंकि यह खत्म हुआ, अब इसे जाने दो आैर नववर्ष को आने दो। जो बीत गया सो बीत गया।
वहीं दक्षिण के एक संत ने सोशल मीडिया पर हर किसी को वर्ष 2023 की शुरूआत दयाभाव तथा हर किसी के लिए क्षमा के संग साथ करने का आह्वान किया है। उनका मानना है कि ऐसा करने से हर कोई महान बन सकता है, यही सच्ची महानता है। सोशल मीडिया पर वर्ष 2023 की फ्लाइट पर बैठने से पहले कुछ मंत्र भी दिए गए हैं। जो इस प्रकार हैं कि स्वस्थ रहें, प्यार, खुशी व साम्प्रदायिक सद्भाव और शांति हमारे अगले स्टॉप  होंगे। मित्रता का काकटेल खुशहाली का भाव, सर्वश्रेष्ठ खबरें इकट्ठ​ी करने  के साथ-साथ खुशी का केक काटें और सभी सदा प्रसन्न रहें। नववर्ष की यात्रा पर जाने से पहले 2022 के अच्छे-बुरे संस्मरणों वाला लगेज कूड़े में ही रहने दें। नववर्ष सबके लिए शुभ हो, यह सोचकर सुरक्षा बैल्ट कस लो, नववर्ष की यात्रा शुभ हो।
 एक व्यक्ति के आचरण की, उसके चरित्र की, उसकी ताकत की असली पहचान मुसीबत के वक्त होती है। प्रभु हमें धैर्यशीलता प्रदान करे। जीवन के क्षेत्र में बीमारी और कोरोना के अलावा कई और चुनौतियां भी आती हैं जिन्हें हम झेलते हैं और सब कुछ अपने अनुकूल बना लेते हैं। अब क्योंकि नववर्ष है हमें जीवन के हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए संकल्प जरूर ले लेना चाहिए। पहला संकल्प अवश्य फलवती होता है। आज नववर्ष का पहला दिन है हम सब परोपकार के लिए तत्पर रहें, मुसीबत के वक्त दूसरों की सेवा करें, माता-पिता की सेवा करें, छोटों को प्यार करें और आगे बढ़ें। यह मंत्र हर कोई जीवन में उतार ले तो दुनिया के आधे कष्ट दूर हो सकते हैं। अगर परिवार और समाज से ऊपर उठकर राष्ट्र की बात की जाए तो यही उम्मीद की जानी चाहिए कि राष्ट्रीय स्तर पर जो भी चुनौतियां हैं हमारा देश उन पर विजय पाए और इस तरह आगे बढ़े कि वह दुनिया के लिए एक उदाहरण बन जाए। भारत आज की तारीख में दुनियाभर में अपनी संस्कृति के लिए एक अलग पहचान रखता है, उसका परचम सदा ऊंचा ही लहराता रहे यही आज के दिन हमारी अभिलाषा इसलिए है कि क्योंकि हम भारतीय हैं। भारतीय लोगों की, भारतीय राजनीति और लोकतंत्र की पहचान भी यही है कि यहां आलोचनाओं के बीच, अपने-अपने सुरताल के बीच राष्ट्रीयता के मामले में सब एक होते हैं। यही एकता हमारे भारत की भारतीयता है और हमें हिन्दोस्तान और हिन्दुस्तानी कहा जाता है, यही हिन्दुतत्व हमारा धर्म और संस्कृति भी है। 
शिक्षा के क्षेत्र में हमने पिछले तीन वर्षों में बहुत चुनौती भरा समय देखा है। यही स्थिति अर्थव्यवस्था की भी है। अब नए वर्ष में केवल मेहनत के दम पर सच्चा कर्म होना चाहिए। उस अर्जुन की तरह हमें कर्मशील बनना है जिसके समक्ष अपना एक लक्ष्य था। शिक्षा हो, उद्योग हो या जीवन का क्षेत्र हो आज नए वर्ष पर हमें अपने लक्ष्य को निर्धारित करना चाहिए। उसकी प्राप्ति के लिए डट जाना चाहिए। वर्ष 2022 की घटनाओं पर बहुत कुछ लिखा जा सकता है लेकिन बीत गया सो बीत गया अब हमें एक सुन्दर वर्तमान और शानदार भविष्य बनाना है। अगर मेहनत करेंगे, नीयत और नीति साफ रखेंगे तो सब कुछ पाया जा सकता है। 
मेडिकल जगत में भारत ने कम से कम 40 से ज्यादा देशों को वैक्सीन सप्लाई करके परोपकार और मानवता का धर्म निभाया है। देश में 220 करोड़ कोरोना डोज दी जा चुकी हैं, इसी के दम पर हम आजादी के अमृतकाल की बेला में आजाद सांसें ले रहे हैं और अब तो नेजल वैक्सीन भी आ चुकी है। कुल मिलाकर एक-दूसरे के साथ खड़े रहना यह हमारी भारतीयता है। मेडिकल जगत में कोरोना खात्में के लिए मास्क, सेनीटाइजेशन से लेकर बूस्टर डोज तक भारत ने सबकुछ पाया। दुनिया के जाने-माने देश उच्च स्तरीय मेडिकल सुविधाएं होने के बावजूद भी बहुत कुछ गंवा चुके हैं परन्तु मुसीबत में एकजुट रहकर बहुत कुछ पाया है, स्टूडेन्टस, उद्योगपति, देश के यूथ, सीनियर सिटीजन, बेटियां और महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र में शान के साथ आगे बढ़ें यह हमारी कामना है लेकिन यह सच है कि आज का दिन अर्थात एक जनवरी का अपना ही महत्व है। हमारे अंदर भी किसी न​ किसी प्रियजन को लेकर पीड़ा हो सकती है लेकिन फिर भी जीना है और इसी मंत्र के साथ आगे बढ़ना है। सब रहें खुशहाल, मुबारक हो नया साल। सदा खुश रहें-छोटों को प्यार करें, बड़ों का सम्मान करें, इसी मंत्र के साथ मिलकर काम करें। यही जीवन है जिसके बारे में कहा गया है।
‘‘जीवन चलने का नाम,  चलते रहो सुबह और शाम।’’

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