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भारत और पड़ोसी देश

भारत दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण देश तो है ही बल्कि अब समूचे विश्व में एक ऐसी ताकत के तौर पर उभरा है जिसको वैश्विक शक्तियां नजरंदाज नहीं कर सकतीं।

भारत दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण देश तो है ही बल्कि अब समूचे विश्व में एक ऐसी ताकत के तौर पर उभरा है जिसको वैश्विक शक्तियां नजरंदाज नहीं कर सकतीं। भारत का महत्व इससे और भी बढ़ गया है कि रूस जैसे मित्र देश ने भी यूक्रेन युद्ध के मामले पर भारत की मध्यस्थता को खुले दिल से स्वीकार कर लिया है। भारत की सीमाएं अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल, चीन, भूटान, म्यांमार, बंगलादेश तथा समुद्री सीमा मालदीव से मिलती हैं। किसी भी राष्ट्र के लिए अपनी कूटनीतिक क्षमता को बढ़ाने के लिए पड़ोस को सुव्यवस्थित करना अनिवार्य है। शीत युद्ध के उपरांत भारत ने अपनी पड़ोस नीति में गुणात्मक परिवर्तन किया है। भारत द्वारा पड़ोसी देशों में लोकतांत्रिक शक्तियों को हमेशा नैतिक सहायता दी गई। इतिहास की बात करें तो भारत ने बंगलादेश में मुक्तिवाहिनी का समर्थन कर उसे पाकिस्तान में आजादी दिलाई, श्रीलंका में शांति सेना भेजी और अफगानिस्तान में लोकतंत्र की बहाली का प्रयास भी किया। भारत ने आपदा के समय अपने पड़ोसियों का साथ दिया। नेपाल का भूकम्प राहत कार्यक्रम, डोकलाम के मुद्दे पर भूटान का सहयोग तथा मालदीव की सहायता करके अपना कर्त्तव्य ​​निभाया।
 भारत ने बंगलादेश के साथ स्थलीय और जलीय सीमा विवाद भी सुलझाया। पाकिस्तान और चीन के साथ हमारे संबंध मधुर नहीं। पाकिस्तान लगातार छद्म युद्ध के रूप में आतंकवाद को प्रोत्साहित कर रहा है। पुलवामा, पठानकोट जैसे आतंकी हमलों की साजिश पाकिस्तान की जमीन पर रची गई। भारत ने भी आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता की नीति का पालन करते हुए पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक कर मुंहतोड़ जवाब दिया। चीन लगातार भारत की क्षेत्रीय अखंडता को विघटित करने का प्रयास करता रहा है लेकिन अब भारत चीन से आंख से आंख मिलाकर बात कर रहा है, आंखें झुका कर नहीं। पाकिस्तान और चीन के रुख की ओर देखते हुए भारत ने अब पड़ोसी देशों को सुव्यवस्थित करना शुरू कर दिया है। 
भारत के पड़ोसी श्रीलंका के नाम से अब ‘श्री’ हट चुका है। श्रीलंका में राष्ट्रपति आवास के बाहर गुरुवार को हुए ​हिंसक विरोध-प्रदर्शन के बाद अब देशभर में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। घोर आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका में लोग भूखे मर रहे हैं। पैट्रोल-डीजल की भारी किल्लत के बाद पैट्रोल पम्पों पर सेना तैनात कर दी गई है। साथ ही बिजली संकट भी पैदा हो गया है। 2015 के बाद महंगाई रिकार्ड तोड़ रही है। अस्पतालों में दवाइयां खत्म हो चुकी हैं। उसके पास देश चलाने के लिए पैसा नहीं है। चीन के कर्ज जाल में फंसकर श्रीलंका की यह हालत हुई है, इसके साथ-साथ श्रीलंका की गलत आर्थिक नीितयां भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। 
कोरोना महामारी के दौरान उसका पर्यटन उद्योग ठप्प हो गया। अर्थशा​​स्त्रियों का कहना है कि सरकार के कुप्रबंधन और लगातार कर्ज लेने के कारण इतने बुरे हालात पैदा हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि श्रीलंका में एक परिवार का शासन है और वह ही देश की बदतर हालात के लिए जिम्मेदार है। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के बड़े भाई महिन्द्रा राजपक्षे देश के प्रधानमंत्री हैं। वे भी पहले राष्ट्रपति रह चुके हैं। उनके छोटे भाई बासिल देश के वित्त मंत्री हैं। सबसे बड़े भाई चमल कृषि मंत्री हैं, वहीं उनके भतीजे नमल देश के खेल मंत्री हैं। श्रीलंका ने स्वाभाविक मित्र भारत को नजरंदाज कर चीन से ऐसी मित्रता की, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा है। भारत संकट की घड़ी में उदार हृदय से श्रीलंका की मदद कर रहा है और अब तक 2.4 अरब डालर की वित्तीय सहायता दे चुका है। अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने के बाद लाखों लोगों के सामने खाद्यान्न संकट पैदा हुआ है। भारत अफगानिस्तान में भी गेहूं और अन्य सामान तथा दवाइयां वहां भेज रहा है।
जहां तक नेपाल का संबंध है, प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा जुलाई 2014 में काफी राजनीतिक उठापटक के बाद नेपाल की सत्ता सम्भालने के बाद भारत की यात्रा पर हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की है। बैठकों के दौरान ढांचागत परियोजनाओं के विकास पर चर्चा हुई और कुछ नई परियोजनाएं शुरू करने का ऐलान किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने नई दिल्ली में हैदराबाद हाउस से वीडियो कांफ्रैंसिंग के जरिये भारत-नेपाल के बीच रेल सेवा का उद्घाटन किया। जयनगर-जनकपुर-कुर्था रेल लाइन पर रेल सेवा का परिचालन दोबारा बहाल हुआ है। जयनगर ​​बिहार में है और कुर्था नेपाल के धनुषा जिले के जनकपुर जोन में है। रेल खंड पर इनरवा स्टेशन पर कस्टम चैकिंग प्वाइंट बनाया गया है। इससे जनकपुर धाम जाने वाले यात्रियों को काफी सुविधा होगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास होगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि नेपाल भी चीन नीतियों से पीड़ित है। देउबा की भारत यात्रा से भारत के साथ रिश्तों में काफी सुधार आया है, अन्यथा केपी शर्मा ओली के शासनकाल में नेपाल-भारत संबंधों में काफी तल्खी आ गई थी। कोरोना काल में भी भारत ने श्रीलंका को मुफ्त वैक्सीन दी थी, यूक्रेन में फंसे नेपाली छात्रों को ​निकालने में भी मदद की थी। मोदी सरकार की सफल कूटनीति के चलते ही पड़ोसी देश भारत से जुड़ रहे हैं। इसका बड़ा कारण यही है कि भारत पड़ोसी देशों की संप्रभुत्ता का सम्मान करता है। पड़ोस के साथ संबंध मजबूत होने चाहिए क्योंकि आप दोस्त बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं।
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com

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