नक्सलवाद की लानत से भारत बाहर निकला तो नशे के श्राप से जूझ रहा है देश। नाना प्रकार के नशे बर्बाद कर रहे हैं जनता को, जो तरह-तरह की शराब, मारिजुआना, तंबाकू, व्हाइटनर, महीनों की पहनी हुई कीट काली जुराबों के कटपीस आदि। क्या इसमें सफलता मिलेगी? इसमें कितनी चुनौतियां हैं? बेशक, यह अभियान मात्र एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि मां-बाप के आंसुओं को पोंछने, युवाओं के सपनों को बचाने और परिवारों की खुशियों को लौटाने का पवित्र संकल्प है। 2047 तक भारत को पूर्ण नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य उन लाखों माताओं की रातों की नींद और पिताओं के टूटे दिल को न्याय दिलाने का वादा है, जिनके बच्चे नशे की भेंट चढ़ चुके हैं।
वास्तव में होता क्या था कि नशे के सौदागरों पर पहले सख्त कार्रवाई नहीं होती थी, यदि होती भी थी तो नाम मात्र को ही। नशेड़ियों और नशा करने वालों पर अब ढंग से कसाई हो रही है। वर्ष 2025 में एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ने अकेले 1,33,965 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 21000 करोड़ रुपये है। साथ ही 79,543 किलोग्राम ड्रग्स को नष्ट भी किया गया। पूरे देश में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई छापेमारियों में कुल जब्ती की मात्रा और भी अधिक है। ये आंकड़े साफ़ पैग़ाम देते हैं कि भारत अब नशे की लानत के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति पर बढ़ रहा है।
ऐसा लगता है कि सरकारी नेतृत्व ने दृढ़ संकल्प कर लिया है कि नशे की बीमारी का पूर्ण इलाज कर दिया जाए। गृह मंत्री अमित शाह कई बार कह चुके हैं, “एक ग्राम भी नशा भारत में नहीं घुसेगा।” उनका यह शून्य सहनशीलता का नारा अब हर सुरक्षा एजेंसी का मंत्र बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार दोहराते हैं कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हमारा युवा नशे की जंजीरों से पूरी तरह मुक्त होगा। अब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के साथ मिलकर नया अभियान शुरू किया गया है जिसमें डॉग स्क्वाड भी शामिल है। सब से गूढ समस्या यह है कि नशे का परिवारों पर विनाशकारी प्रभाव होता है।
एक समय लॉटरी के नशे पर नकेल कसी गई थी जिससे लाखों परिवार बच गए थे। नशा एक ऐसा ज़हर है जो धीरे-धीरे, पीने वाले के शरीर और पूरे परिवार को खोखला कर देता है। कल्पना कीजिए कि एक मां सुबह अपने बेटे का इंतजार करती है, लेकिन वह नशे की हालत में लौटता है। पिता का सपना बेटे को डॉक्टर या इंजीनियर बनाना था, लेकिन नशे ने उसे रास्ते से भटका दिया। नशे ने न केवल युवाओं की जान ली है, बल्कि परिवारों को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से चूर-चूर कर दिया है। घरेलू हिंसा, चोरी, आत्महत्या और सामाजिक कलह में भारी वृद्धि हुई है। नक्सलवाद की तरह नशे पर भी ज़ोरदार आक्रामकता की है, सरकार ने। जिस अभूतपूर्व दृढ़ता से नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चलाया गया, उसी आक्रामकता को अब नशे के खिलाफ मोड़ दिया गया है।
सुरक्षा बलों ने लाल गलियारे को लगभग साफ कर दिया। अब उसी रणनीति से ड्रग सिंडिकेट्स, तस्करों और उनके नेटवर्क पर प्रहार किया जा रहा है। भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी मुख्य रूप से दो क्षेत्रों से हो रही है। एक ओर गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार, लाओस और थाईलैंड) से सिंथेटिक ड्रग्स की आपूर्ति जारी है, वहीं गोल्डन क्रिसेंट (अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान) से अफीम, हेरोइन और ओपिओइड्स जैसी खतरनाक दवाओं की तस्करी बढ़ रही है। कैनाबिस (गांजा) एक पौधा है जिसके पत्तों और फूलों से नशीला पदार्थ बनाया जाता है। यह दर्द निवारक और भूख बढ़ाने में उपयोगी माना जाता है लेकिन इसके अधिक सेवन से मानसिक स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित होता है।
ओपिओइड्स मॉर्फिन जैसी दर्द निवारक दवाएं हैं जो बेहद लत लगाने वाली होती हैं और ओवरडोज से सांस रुकने का खतरा रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक नशीली वस्तुओं का सांस्कृतिक प्रचलन भी समस्या है। सरकार की सक्रिय पहल सराहनीय है। सरकार इन चुनौतियों का बख़ूबी सामना कर रही है। एनडीपीएस (नारकोटिक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम) को सख्त बनाया गया है। यह कानून इन पदार्थों के उत्पादन, खेती, निर्माण, बिक्री, खरीद, परिवहन, भंडारण, आयात-निर्यात और उपयोग को सख्ती से नियंत्रित करता है। इसमें गांजा, अफीम, कोकीन, हेरोइन, चरस, एलएसडी आदि शामिल हैं। कानून में छोटी मात्रा और व्यावसायिक मात्रा का प्रावधान है।
छोटी मात्रा में पकड़े जाने पर कम सजा और उपचार की सुविधा है, जबकि बड़ी मात्रा में कठोर सजा, तथा कुछ मामलों में मृत्युदंड भी हो सकता है। इसका उद्देश्य नशीले पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग को रोकना तथा लतग्रस्त व्यक्तियों को पुनर्वास प्रदान करना है। यह भारत में ड्रग्स नियंत्रण का मुख्य आधारशिला कानून है। नशा मुक्त भारत 2047 के सपने को साकार करने के लिए अमित शाह ने कमर कस ली है तो क्या जब 2047 में भारत अपनी आजादी का शताब्दी उत्सव मनाएगा, तब देश नशा मुक्त होगा? नशा मुक्त भारत का सपना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। नक्सलवाद मुक्त भारत की तरह देश नशा मुक्त भारत भी बन सकता है।


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