पेपर लीक-तंत्र ‘वीक’

Summary :

23 लाख छात्र पेपर लीक होने के बाद नीट-यूजी परीक्षा रद्द किए जाने की खबर मिलने के बाद काफी हताश हैं। छात्र खुद को फिर से अनिश्चितता और चिंता के भंवर में फंसे हुए महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें ​िफर से परीक्षा की तैयारी करनी पड़ेगी। पेपर लीक होना कोई नई बात नहीं है। अब तक एनटीए द्वारा आयोजित 14 राष्ट्रीय परीक्षाओं में से कई बार पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले उजागर हो चुके हैं। इनमें से जेईई मेन्स 2025 उत्तर कुंजी के दोषपूर्ण होने पर प्रश्नपत्र में 12 प्रश्न वापिस लेने पड़े थे। देश में कई भर्ती…

23 लाख छात्र पेपर लीक होने के बाद नीट-यूजी परीक्षा रद्द किए जाने की खबर मिलने के बाद काफी हताश हैं। छात्र खुद को फिर से अनिश्चितता और चिंता के भंवर में फंसे हुए महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें ​िफर से परीक्षा की तैयारी करनी पड़ेगी। पेपर लीक होना कोई नई बात नहीं है। अब तक एनटीए द्वारा आयोजित 14 राष्ट्रीय परीक्षाओं में से कई बार पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले उजागर हो चुके हैं। इनमें से जेईई मेन्स 2025 उत्तर कुंजी के दोषपूर्ण होने पर प्रश्नपत्र में 12 प्रश्न वापिस लेने पड़े थे। देश में कई भर्ती परीक्षाओं में पहले ही बड़े घोटाले सामने आ चुके हैं। 3 मई को हुई नीट परीक्षा के बाद लाखों छात्र राहत महसूस कर रहे थे लेकिन कुछ ही दिनों बाद सोशल मीडिया पर गेस पेपर और पेपर लीक की चर्चाएं तेज होने लगीं। शुरूआत में तो इसे अफवाह माना गया लेकिन फिर राजस्थान से गिरफ्तारियों और हिरासत की खबरें सामने आने लगीं। मामला इतना बढ़ गया कि पूरी परीक्षा ही रद्द करनी पड़ी। परीक्षा रद्द होने के बाद सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ा है जो कई महीनों से तैयारी कर रहे थे। कई छात्र मानसिक दबाव में हैं।
अभिभावकों की चिंता यह है कि अगर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं तो मेहनती छात्रों का भरोसा कैसे कायम होगा। इसके साथ ही एनटीए के उद्देश्य और कार्यक्षमता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। नेशनल टैस्टिंग एजैंसी या​िन एनटीए ने दावा किया था ​िक नीट परीक्षा को पूर्ण सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कराया गया है। सुरक्षा के लिए हाईटेक इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की नकल या पेपर लीक को रोका जा सके। प्रश्नपत्र भी जीपीएस ट्रैकिंग वाले वाहनों से भेजे गए थे। इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा आयोजित करना निस्संदेह एक बड़ी चुनौती है। इस वर्ष की एनईईटी परीक्षा 550 से अधिक शहरों में लगभग 5,580 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। एनटीए ने प्रौद्योगिकी आधारित सुरक्षा उपायों के उपयोग पर जोर दिया है लेकिन परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों के कथित वितरण से पता चलता है कि एक त्रुटिरहित प्रणाली अभी भी दूर की बात है। 2024 एनईईटी विवाद के बाद केंद्र ने एनटीए के कामकाज में सुधार के लिए सुझाव देने हेतु पूर्व आईएसआरओ अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया। एजेंसी ने अभी तक समिति द्वारा रेखांकित डिजिटल-प्रथम दृष्टिकोण को पूरी तरह से लागू नहीं किया है और इसकी सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश-परीक्षा प्रक्रिया के सभी चरणों में जवाबदेही में सुधार पर अमल करने में ढिलाई बरती है। एनटीए निजी परीक्षा केंद्र संचालकों और लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं पर बहुत अधिक निर्भर है, जबकि झारखंड में 2024 एनईईटी परीक्षा सहित कई प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं ने इन विक्रेताओं और कोचिंग उद्योग के बीच संबंधों को उजागर किया है। साथ ही एजेंसी ने बाहरी संचालकों पर दोष मढ़कर विफलताओं के लिए संस्थागत जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा है।
अब तक मिली रिपोर्टों के अनुसार प्रश्नपत्र प्रिटिंग के समय ही लीक करने वालों के हाथों तक पहुंच चुका था। अगर ऐसा साबित होता है तो यह परीक्षा सुरक्षा में बहुत बड़ी चूक मानी जाएगी। गेस पेपर में ​िदए गए प्रश्नों में 120 से ज्यादा प्रश्नपत्र में शामिल प्रश्नों के हुबहू निकले। सोशल मीडिया के जरिये गैस पेपर लाखों छात्रों तक पहुंचे। एनटीए द्वारा जांच सीबीआई को सौंपने के बाद अब धड़ाधड़ गिरफ्तारियां की जा रही हैं। भ्रष्टाचार के बाजार में लाखों का लेन-देन भी सामने आ रहा है। प्रतिभाशाली छात्रों के सपने खंडित हो गए हैं लेकिन इस घटना को केवल कानून-व्यवस्था के उल्लंघन तक सीमित करना संस्थागत विफलता की भयावहता को कम आंकना होगा। यह राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) पर एक गंभीर आरोप है, जिसे देश की कुछ सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं के संचालन का दायित्व सौंपा गया है। 2017 में परीक्षा को पेशेवर बनाने के उद्देश्य से गठित एनटीए को प्रक्रियाओं को मानकीकृत करने और खंडित राज्य-स्तरीय प्रणालियों की विसंगतियों को दूर करने का दायित्व सौंपा गया था। इसके विपरीत, पेपर लीक और अनियमितताओं के बार-बार लगने वाले आरोपों से इसका रिकॉर्ड लगातार धूमिल होता रहा है। नवीनतम एनईईटी विवाद दो वर्षों में मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े दूसरे बड़े विवाद ने उन परीक्षाओं की पवित्रता की रक्षा करने की एजेंसी की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन पर हजारों युवाओं का भविष्य टिका है। यद्यपि एनटीए ने दुबारा परीक्षा कराने के लिए दुबारा शुल्क और फिर से पंजीकरण कराने की जरूरत को खत्म कर दिया है लेकिन बार-बार होने वाले घोटालों ने नीट की वर्तमान उपयोगिता पर ही सवालिया निशान खड़े कर ​िदए हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि 3 घंटे की परीक्षा में 180 बहुविकल्पीय प्रश्नों के आधार पर ​िकसी युवा की डॉक्टर बनने की योग्यता का आंकलन कैसे किया जा सकता है। को​िचंग संस्थान रटने को ही अधिक महत्व दे रहे हैं। परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने के लिए एनटीए के पुनर्गठन की जरूरत समझी जा रही है। नीट परीक्षा को कम्प्यूटर आधारित टेस्ट में बदलने की मांग की जा रही है। अगर कम्प्यूटर आधारित परीक्षा अपनाई जाती है तो वह सुर​िक्षत और पारद​र्शी होगी। छात्रों को हमें ऐसी प्रणाली प्रदान करनी होगी जो उनकी मेहनत को महत्व दे। परीक्षा में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इसे ठीक करने के लिए सबसे पहले जवाबदेही तय करनी होगी। परीक्षा लीक का अर्थ तंत्र ‘वीक’ (कमजोर) होना ही है।

Aditya Chopra

Aditya Chopra is well known for his phenomenal viral articles.