जनता को राहत

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबरें मिल रही हैं। ईरान ने जिस होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को युद्ध में अपना हथियार बनाया हुआ है उसका कोई खतरा अब भारत के लिए नहीं रहा। ईरान ने भारत, रूस, चीन, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी है और साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि शत्रु देशों के जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की कोई अनुमति नहीं दी जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग अवरुद्ध होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट की शुरूआत हो चुकी है। ईरान जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से मोटी रकम भी वसूल रहा है। इसे भारत की सफल कूटनीति ही कहा जाएगा कि मिसाइलों, रॉकेटों और कलस्टर बमों के धमाकों के बीच तेल और गैस से भरे जहाज बिना रोक-टोक के भारत पहुंच रहे हैं। जब दु​िनया भर में पैट्रोल आैर डीजल के भाव बढ़ रहे हैं तो भारत इसके प्रभाव से बच नहीं सकता।
पिछले दिनों भारत में प्रीमियम पैट्रोल और औद्योगिक डीजल की कीमतों में वृृद्धि की गई थी। अब एक बड़ी प्राइवेट तेल कम्पनी नायरा एनर्जी ने पैट्रोल की कीमत में साढ़े पांच रुपए और डीजल में तीन रुपए की वृद्धि कर दी है। नायरा एनर्जी देशभर में 6967 पैट्रोल पम्पों का संचालन करती है। कम्पनी द्वारा कीमतें बढ़ाना इस बात का संकेत है कि तेल कम्पनियां कच्चे तेल के भाव बढ़ने से काफी दबाव में हैं। इसी बीच केन्द्र की मोदी सरकार ने आम आदमी को राहत देने के लिए पैट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की है। पैट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपए प्रति लीटर कर दिया है। जबकि डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह से खत्म कर दी गई है। सरकार ने तेल कम्पनियों के नुक्सान की भरपाई के लिए एक्साइज ड्यूटी घटाई है। सरकार को राजस्व में होने वाले घाटे की भरपाई प्रधानमंत्री के राजकोष से की जाएगी। एक्साइज ड्यूटी केन्द्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला वह टैक्स है जो किसी वस्तु के उत्पादन पर वसूला जाता है। क्योंकि पैट्रोल और डीजल जीएसटी के दायरे से बाहर हैं, इसलिए इन पर केन्द्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों का वैट लगता है। यही कारण है कि ईंधन के खुदरा दामों में टैक्स का ​िहस्सा काफी बड़ा होता है। अगर पैट्रोल आैर डीजल महंगे होते हैं तो महंगाई बढ़ती है। खाद्य पदार्थों, सब्जियों और रोजमर्रा के सामान और किराये भाड़े बढ़ जाते हैं। सरकार ने महंगाई को नियंत्रित करने को प्राथमिकता दी है। मोदी सरकार खुद घाटा झेलेगी ताकि इससे आम आदमी को महंगाई न झेलनी पड़े। यदि एक्साइज कटौती का पूरा फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है तो पैट्रोल, डीजल के दाम 10 रुपए तक घटाए जा सकते हैं। हालांकि पैट्रोल और डीजल के दाम घटने की सम्भावनाएं नहीं हैं। क्योंकि तेल कम्पनियां इस कटौती का इस्तेमाल अन्तर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की महंगाई को संतुलित करने के ​िलए करेंगी।
सरकार ने सर्वदलीय बैठक में भी इस बात का भरोसा दिया था कि देश के पास तेल आैर गैस की कोई कमी नहीं है लेकिन ईरान, अमेरिका, इजराइल जंग के बीच देशभर में अफवाहों का बाजार गरम है, जिसके चलते पैनिक बाइंग बढ़ी है। पिछले 2 दिनों में मांग 15 प्रतिशत ज्यादा बढ़ी है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु में पैट्रोल पम्पों पर लम्बी कतारें और झड़पें देखने को मिली हैं। अफवाहों का बाजार गरम करने में सोशल मीडिया सबसे आगे है। आम भारतीय की मानसिकता ऐसी है ​कि वह अपनी गा​िड़यों में जरूरत से ज्यादा तेल भरवा लेना चाहते हैं, जबकि ऐसा कोई संकट नजर नहीं आ रहा। हर किसी की जुबान पर कोरोना महामारी की तरह लॉकडाउन लगाए जाने की चर्चा है। जबकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि लॉकडाउन की कोई सम्भावनाएं नहीं हैं। सरकार लगातार तेल और गैस की खरीदारी कर रही है। अपोलो ओशियन और जग वसंत एलपीजी लेकर भारत पहुंच चुके हैं आैर कुछ दिनों में होर्मुज में फंसे अन्य भारतीय जहाज एक-एक करके पहुंचने वाले हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर जी-7 देशों के ​िवदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के ​िलए फ्रांस में हैं। हालांकि भारत जी-7 का सदस्य नहीं है लेकिन इस प्रभावशाली समूह के मौजूदा अध्यक्ष फ्रांस ने भारत को साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया है।
पिछले कुछ सप्ताह में भारत ने पश्चिम एशिया में संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त कराने और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने पर केंद्रित कूटनीतिक प्रयास किए हैं। भारत का मानना है कि यदि इस नौवहन मार्ग पर अवरोध जारी रहा तो भारत सहित कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। जी-7 दुनिया की सात सबसे उन्नत अर्थव्यवस्थाओं कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका का समूह है। यूरोपीय संघ भी इसका सदस्य है। जी-7 अपने सदस्य देशों के लिए ऐसा प्रमुख मंच है जहां वे वैश्विक स्तर पर मौजूद प्रमुख आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए चर्चा और समन्वय करते हैं।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग खोलने के अपने अल्टीमेटम की सीमा 10 दिन तक बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया युद्ध भारत के लिए एक चेतावनी भी है और एक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने का अवसर भी है। ऊर्जा असुरक्षा कोई अचानक आने वाली समस्या नहीं है, यह एक प्रणालीगत आैर व्यवस्थागत समस्या है। भारत अपने कच्चे तेल का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। जब भी युद्ध होते हैं सप्लाई लाइन अवरुद्ध होती तो तेल की कीमतों में उछाल आता है। महंगाई बढ़ती है और राजकोषीय दबाव बढ़ जाता है। भारत के पास यह एक अवसर है कि वह ऊर्जा को लेकर भविष्य का ​िनर्धारण कैसे करता है। मोदी सरकार नीतिगत मामलों में बहुत तेजी से काम कर रही है, उसे अपनी ऊर्जा संरचना को ​फिर से प्रभावित करना होगा। फिलहाल मोदी सरकार ने जनता को राहत देकर सराहनीय कदम उठाया है।

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