धन्यवाद मोदी जी!

अगर आज की तारीख में महिलाओं का योगदान देखा जाए तो यह उदाहरणीय है। यह भी सच है कि भारत में महिला सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की बुनियादी आवश्यकता है। आज के दौर में जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है तब महिलाओं की भागीदारी और उनकी स्थिति को मजबूत करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में महिला सशक्तिकरण को लेकर कई गंभीर प्रयास किए गए हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना है। मोदी जी की नीयत और नीति को स्वीकर भी किया जा रहा है। इस कड़ी में सबसे पहले अगर हम महिला सशक्तिकरण की अवधारणा को समझें तो इसका अर्थ केवल महिलाओं को अधिकार देना नहीं है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की क्षमता, आत्मनिर्भरता और समान अवसर प्रदान करना है। मोदी जी जो कहते हैं वह करके दिखाते हैं। महिला आरक्षण को लेकर वह खुद बहुत उत्साहित हैं। उनकी वेबसाइट नरेन्द्र मोदी डाॅट इन पर वह लिखते हैं कि संसद की 16 अप्रैल को ऐतिहासिक बैठक होगी।
बहुत समय पहले भारत में लंबे समय तक महिलाओं को सामाजिक बंधनों और परंपराओं के कारण पीछे रखा गया लेकिन अब धीरे-धीरे स्थिति बदल रही है। शिक्षा, रोजगार और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। मातृशक्ति मजबूत हो रही है। रिकाॅर्ड गवाह हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने महिला सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसका उद्देश्य लड़कियों की शिक्षा और उनके अस्तित्व को सुरक्षित करना है। इसके अलावा उज्ज्वला योजना के माध्यम से महिलाओं को धुएं से मुक्त रसोई प्रदान की गई जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार हुआ। जन-धन योजना के जरिए महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया गया। मुझे याद है कि महिलाओं को खुले में शौच से मुक्ति का काम मोदी जी के प्रयासों से सम्भव हो पाया। तब 2014 में मेरे पति श्री अश्विनी मिन्ना जी करनाल से सांसद थे। महिलाएं विशेषकर जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ी थीं वह इस समस्या का उल्लेख करती थीं। बाद में यह मुहिम देश भर में सफल रही। बड़ी बात यह है कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने का निर्णय है। मोदी जी कहते हैं कि महिला आरक्षण बिल, जिसे लंबे समय से लागू करने की मांग की जा रही थी, अब एक नई उम्मीद के रूप में सामने आया है। इस बिल के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव है। मोदी जी कहते हैं ​िक म​हिलाएं जब प्रशासनिक निर्णयों में ​िहस्सा लेती हैं तो उनका अनुभव और दूरदृष्टि बहुत काम आती है। इसीलिए मेरा मानना है कि महिलाओं के आरक्षण विधेयक का समर्थन हर कोई करे आैर लोकतंत्र में उनकी भागीदारी मजबूत करे। मेरा मानना है कि यह कदम न केवल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाएगा, बल्कि नीति निर्माण में उनकी आवाज को भी मजबूत करेगा। हालांकि, इस आरक्षण का पूर्ण प्रभाव 2029 के आम चुनावों के बाद देखने को मिल सकता है, क्योंकि इसके कार्यान्वयन के लिए परिसीमन प्रक्रिया आवश्यक है। 2029 का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी का एक नया अध्याय खोल सकता है। भविष्य में यह आरक्षण प्रभावी रूप से लागू होता है तो संसद में महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। राजनीति में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। महिलाएं समाज की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं, इसलिए उनका राजनीतिक निर्णयों में शामिल होना आवश्यक है। इस बिल के पास हो जाने के बाद संसद में लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। देखा जाए तो पंचायत स्तर पर महिलाओं के लिए पहले से ही आरक्षण लागू है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कई महिला सरपंचों और स्थानीय नेताओं ने अपने क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
जब महिलाएं राजनीति में सक्रिय होती हैं तो नीतियां अधिक समावेशी और संतुलित बनती हैं। हालांकि, चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। महिलाओं को राजनीति में आने के लिए सामाजिक बाधाओं, आर्थिक सीमाओं और कई बार सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जमीनी सच यह भी है कि राजनीतिक दलों में भी महिलाओं को पर्याप्त टिकट नहीं दिए जाते जिससे उनकी भागीदारी सीमित रहती है। ऐसे में महिला आरक्षण बिल इन समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकता है। महिला सशक्तिकरण केवल सरकारी नीतियों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज की सोच में बदलाव भी जरूरी है। परिवार और समाज को महिलाओं को समान अवसर देने होंगे। आज के समय में लड़कियों की शिक्षा को प्राथमिकता देना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना बेहद आवश्यक है। आज भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं-चाहे वह विज्ञान हो, खेल हो, सेना हो या राजनीति। वे देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। 2029 के चुनाव के बाद जब अधिक महिलाएं संसद में पहुंचेंगी तो यह न केवल राजनीतिक संतुलन को बदलेगा, बल्कि देश के विकास की दिशा को भी एक नया आयाम देगा। अगर मूल्यांकन किया जाए तो मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि महिला आरक्षण और विधेयक सशक्तिकरण भारत के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास, महिला आरक्षण की पहल और समाज में बढ़ती जागरूकता मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकते हैं, जहां महिलाएं केवल सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता हों। आने वाले वर्षों में, 2029 के मद्देनजर, भारत की राजनीति और समाज में महिलाओं की भूमिका और भी मजबूत और प्रभावशाली होगी तथा यह असली महिला सशक्तिकरण की परिभाषा होगी जिसका श्रेय निश्चित रूप से मोदी जी को दिया जाना चाहिए। निश्चित रूप से महिला आरक्षण मोदी जी का एक बड़ा प्रण है।

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