…जो सपना देखना भी सिखा गए और जीना भी

Summary :

‘मिसाइल मैन’ के नाम से विख्यात डा. एपीजे अब्दुल कलाम (अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम) भारतीय इतिहास में एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति रहे हैं जो वैज्ञानिक थे। देश के महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ वह एक अद्भुत इंसान और एक प्रेरणादायक नेता भी थे। सादगी, मितव्ययिता और ईमानदारी जैसे विलक्षण गुणों की मिसाल डा. कलाम ने अपने इन्हीं गुणों की बदौलत समस्त देशवासियों का दिल जीत लिया था क्योंकि मौजूदा राजनीतिक परिवेश में ऐसे गुणों वाले व्यक्ति का मिलना दुर्लभ है। यही कारण है कि करोड़ों लोग आज भी उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते हुए उनकी कही बातों का अनुसरण करते हैं।…

‘मिसाइल मैन’ के नाम से विख्यात डा. एपीजे अब्दुल कलाम (अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम) भारतीय इतिहास में एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति रहे हैं जो वैज्ञानिक थे। देश के महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ वह एक अद्भुत इंसान और एक प्रेरणादायक नेता भी थे। सादगी, मितव्ययिता और ईमानदारी जैसे विलक्षण गुणों की मिसाल डा. कलाम ने अपने इन्हीं गुणों की बदौलत समस्त देशवासियों का दिल जीत लिया था क्योंकि मौजूदा राजनीतिक परिवेश में ऐसे गुणों वाले व्यक्ति का मिलना दुर्लभ है। यही कारण है कि करोड़ों लोग आज भी उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते हुए उनकी कही बातों का अनुसरण करते हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि उन्होंने जिस भी व्यक्ति के साथ काम किया, उसी के दिल को जीत लिया। देश की युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए वह कहते थे कि भारत के युवा वर्ग में हिम्मत होनी चाहिए कि वह कुछ अलग सोच सके, हिम्मत हो कि वह कुछ खोज सके, ऐसे नए रास्तों पर चलने की हिम्मत हो जो असंभव हो, उसे खोज सके और मुसीबतों को जीतकर सफलता हासिल कर सके। वह कहते थे कि आसमान की ओर देखें, हम अकेले नहीं हैं, पूरा ब्रह्माण्ड हमारा मित्र है और जो सपना देखते हुए मेहनत कर रहे हैं, उन्हें बेहतरीन फल देने का प्रयास कर रहा है। सपना सच हो, इसके लिए जरूरी है कि आप सपना देखें।
15 अक्तूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक गरीब परिवार में जन्मे अब्दुल कलाम गरीबी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त कर वैज्ञानिक बने थे, जिनके नेतृत्व में भारत कई उपग्रह तथा स्वदेशी मिसाइलें बनाने में सफल हुआ और परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र भी बना। उन्होंने डीआरडीओ तथा इसरो की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर उन्हें सफल बनाया। अपने जीवनकाल में उन्होंने ‘विंग्स ऑफ फायर’, ‘इग्नाइटेड माइंड’, ‘इंडिया 2020: ए विजन फॉर न्यू मिलेनियम’ इत्यादि 30 से भी ज्यादा पुस्तकें लिखी। 1999 से 2001 के बीच वे भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार रहे तथा 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति बनने के बाद जब वे राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे तो उनके साथ सामान के रूप में केवल दो सूटकेस थे, जिनमें से एक में उनके कपड़े तथा दूसरे में उनकी प्रिय पुस्तकें थी। आज जहां नेतागण छुट्टियों पर घूमने जाने के लिए बेताब रहते हैं और संसद की कार्यवाहियों से भी गैरहाजिर रहते हैं, वहीं डा. कलाम ने राष्ट्रपति रहते अपने पूरे राजनीतिक जीवन में केवल दो छुट्टियां ली थी, एक अपने पिता के देहांत पर और दूसरी अपनी मां की मृत्यु के अवसर पर।
देश के सर्वोच्च पद पर रहते हुए कलाम साहब ने अपने कार्यकाल में सादगी, मितव्ययिता और ईमानदारी की जो मिसाल पेश की, वह आज और कहीं देखने को नहीं मिलती। ऐसा ही एक वाकया स्मरण आता है, जब एक बार उनका पूरा परिवार (कुल 52 सदस्य) उनसे मिलने दिल्ली आया। स्टेशन से सभी को राष्ट्रपति भवन लाया गया, जहां सभी आठ दिनों तक ठहरे। उन पर खर्च हुई एक-एक पाई कलाम साहब ने अपनी जेब से खर्च की। उन्होंने अपने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया था कि उनके इन अतिथियों के लिए राष्ट्रपति भवन की कारें इस्तेमाल नहीं की जाएंगी और उनके सारे खर्च का विवरण भी अलग से रखा गया। आठ दिन बाद सभी के दिल्ली से वापस चले जाने पर कलाम साहब ने अपने निजी बैंक खाते से 3.52 लाख रुपये का चेक काटकर राष्ट्रपति कार्यालय को भेज दिया। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने कभी किसी का कोई उपहार अपने पास नहीं रखा। किसी ने एक बार उन्हें दो पैन उपहार स्वरूप दिए थे लेकिन वे भी उन्होंने राष्ट्रपति पद से विदाई के समय लौटा दिए थे। यह महान विभूति 27 जुलाई 2015 को भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग में एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों को सम्बोधित करते हुए अचानक दिल का दौरा पड़ने पर सदा के लिए चिरनिद्रा में लीन हो गई।
-योगेश कुमार गोयल

Team Desk