महिला दिवस

Summary :

आज हम सब महिला दिवस मना रहे हैं। यह दिन सिर्फ मनाने और बधाई देने का नहीं बल्कि नारी के सम्मान शक्ति और योगदान को पहचानने का दिन है। नारी इस सृष्टि की सबसे सुन्दर और शक्तिशाली रचना है। वो जीवन देने वाली है। यानी धारणी है, जीवन को पालने वाली और दिशा देने वाली भी है। एक बेटी के रूप में वह घर में खुशियां लाती है, एक बहन के रूप में स्नेह देती है। एक पत्नी के रूप में जीवन की साथी बनती है और एक मां के रूप में पूरी पीढ़ी का निर्माण करती है। हमारी भारतीय…

आज हम सब महिला दिवस मना रहे हैं। यह दिन सिर्फ मनाने और बधाई देने का नहीं बल्कि नारी के सम्मान शक्ति और योगदान को पहचानने का दिन है। नारी इस सृष्टि की सबसे सुन्दर और शक्तिशाली रचना है। वो जीवन देने वाली है। यानी धारणी है, जीवन को पालने वाली और दिशा देने वाली भी है। एक बेटी के रूप में वह घर में खुशियां लाती है, एक बहन के रूप में स्नेह देती है। एक पत्नी के रूप में जीवन की साथी बनती है और एक मां के रूप में पूरी पीढ़ी का निर्माण करती है। हमारी भारतीय संस्कृति में नारी को बहुत ऊंचा स्थान दिया गया है। हम सब अपने अनुभवों से जानते हैं, जहां नारी का सम्मान होता है वहीं देवताओं का वास होता है। चाहे वो नारी का कोई भी रूप हो। आजकल तो रील बन रही है कि अगर आपको अपना चन्द्रमा ऊंचा करना है तो सुबह-सुबह मां के पांव को हाथ लगाओ। अगर जीवन में तरक्की करनी है तो मां की सेवा करो। मेरे तीनों बेटे-बहुएं (जो मॉडर्न और एजुकेटिड हैं) सुबह उठते हैं। मेरे पांव छूते हैं और मेरे प्रति बहुत आदर सम्मान रखते हैं।
यही नहीं आज की महिला हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। चाहे वह शिक्षा हो, विज्ञान हो, राजनीति हो, व्यापार हो या खेल का मैदान। नभ-थल-जल हो लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि समाज में हर महिला को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर मिले। क्योंकि जब एक महिला आगे बढ़ती है तो वह केवल स्वयं नहीं बढ़ती, पूरा परिवार, समाज आैर राष्ट्र आगे बढ़ता है। इसलिए आज महिला दिवस के अवसर पर हम सबको यह संकल्प लेना चाहिए कि हर महिलाओं का सम्मान हो। हमारी प्रतिभा की पहचान हो और एक ऐसे समाज का निर्माण हो जहां हर महिला सुरक्षित, सशक्त और सम्मानित हाे। क्योंकि नारी केवल शक्ति नहीं, वह सृजन की सबसे बड़ी शक्ति है। जब हम समाज आैर देश की प्रगति की बात करते हैं तो हमें यह याद रखना चाहिए कि किसी भी समाज और देश की असली शक्ति उसकी नारी होती है।
अगर आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन अगर आप एक महिला को शिक्षित करते हैं तो पूरा परिवार आैर आने वाली पीढ़ी शिक्षित होती है। नारी केवल जीवन देने वाली नहीं वह संस्कार देने वाली और समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। नारी सहनशीलता, संवेदनशीलता और शक्ति का सबसे सुन्दर संगम है।
महिला ​िदवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि यह याद दिलाने का दिन है कि नारी का सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण हर ​दिन होना चाहिए क्योंकि नारी केवल परिवार की शक्ति नहीं बल्कि राष्ट्र की प्रेरणा है। देश के युग पुरुष स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि महिलाओं की स्थिति में सुधार किए बिना दुनिया का कल्याण सम्भव नहीं है। कोई भी पक्षी एक पंख के सहारे नहीं उड़ सकता। इसलिए हर क्षेत्र में महिलाओं को भागीदार बनाना होगा। आज के दौर में नारी शक्ति पूरे आसमान को मुट्ठी में करने को बेकरार है और अनेक ने बहुत सारी उपलब्धियां हासिल की हैं। नारी तू नारायणी वाक्य से अभिप्राय यह है कि स्त्री केवल इंसान नहीं है, बल्कि साक्षात देवी लक्ष्मी और शक्ति का
स्वरूप है।
नारी सशक्तिकरण की ​िदशा में आज की तारीख में सरकार बहुत कुछ कर रही है। क्या छोटे शहर और महानगर देश की नारी कड़ी मेहनत कर रही है। वह जमीन पर रहकर कड़ा श्रम करना जानती है तो आसमान में विमान उड़ाने में सक्षम है। आटो, कार चलाने से लेकर मैट्रो चलाती है। बॉर्डर पर डटकर ड्यूटी निभाती है और देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति पद की भी शोभा बढ़ा सकती है। आज महिला दिवस है, नारी के श्रम को सलाम करने का दिन है और नारी हमारे देश की शान बनकर पूरी दुनिया में एक उदाहरण स्थापित कर रही है। सच तो यही है कि घर की शोभा गृहिणी से होती है। गृहिणी के बिना घर को घर नहीं कहा जा सकता। संवेदनशील सेवा समर्पिता की आकृति वो पत्नी के रूप में समाहित हो जाती है। घर के हर सदस्य का ध्यान रखने का दायित्व यह निभाती है। परिवार के हर सदस्य के दुःख में दुःखी होती है। सभी की समस्याआें का समाधान करने का प्रयत्न करती है। इस रूप में यह खुद को भूलकर दूसरों के लिए जीने लगती है। किसको किस समय क्या चाहिये व किस की क्या पसंद है, ये ध्यान वो खुद की जरूरतों को भुला कर रखती है। अब वह अपनी घरेलू जिम्मेदारियों के साथ खुद की पहचान बनाने में भी आगे है। इसलिए कहा जाता है कि एक नारी के सौ रूप हैं और वो नारी से महारानी बनकर अब आगे आ रही है। नारी आज आधी आबादी का हिस्सा मानी जाती है परन्तु यह बड़े ही खेद का विषय है कि आज इस अति आधुनिक युग में, जिसमें मानवीय भावनाओं का स्थान धीरे- धीरे समाप्त होता जा रहा है नारी को लेकर एक अलग अवधारणा बनने लगी है। यद्यपि आज वह अपने सबसे प्रखर रूप में हमारे सामने है।
आज की नारी ने पुरुषों से कंधे से कन्धा मिलाकर यह साबित कर दिया है कि वह अब अबला नहीं रह गई। चिकित्सा, राजनीति, विज्ञान, तकनीकी, साहित्य और कला सभी क्षेत्रों में आज हम नारी को आगे पाते हैं। केवल महिला सशक्तिकरण का नारा देने से काम चलने वाला नहीं है। महिलाओं का सशक्तिकरण तभी संभव हो सकता है जब हम उसे अधिकार देंगे, बिन अधिकार कैसा सशक्तिकरण? कड़वा सच यही है कि ऐसे अपराध रोकने व अपरा​िधयों को सजा दिलाने की व्यवस्था ही सच्चे महिला सशक्तिकरण और महिला दिवस की सार्थकता को दर्शाता है। नारी एक देवी है, वह दुर्गा है, भवानी है, चंडी है और नारी के योगदान को नारी दिवस पर हमारा हमारा कोटि-कोटि नमन है।

Kiran Chopra