Anusuya Jayanti 2026: जब त्रिदेवों ने ली परीक्षा, पर खुद बन गए बालक! पढ़ें माता अनुसूया के त्याग और सतीत्व शक्ति की गाथा

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Anusuya Jayanti 2026 Katha: भगवान विष्णु का पसंदीदा महीना ‘वैशाख’ शुरू हो गया है। ब्रह्मा जी के अनुसार यह सभी महीनों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इस महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी बहुत खास मानी जाती है क्योंकि इस दिन माता अनुसूया का जन्म हुआ था। इस साल सोमवार, 6 अप्रैल को माता अनुसूया की जयंती मनाई जाएगी। माता अनुसूया को उनके त्याग, तपस्या और पति के प्रति अटूट निष्ठा के लिए जाना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली और बच्चों की तरक्की के लिए व्रत रखती हैं। चलिए जानते हैं वह कहानी, जिसकी वजह से उन्हें ब्रह्मा,…

Anusuya Jayanti 2026 Katha: भगवान विष्णु का पसंदीदा महीना ‘वैशाख’ शुरू हो गया है। ब्रह्मा जी के अनुसार यह सभी महीनों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इस महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी बहुत खास मानी जाती है क्योंकि इस दिन माता अनुसूया का जन्म हुआ था। इस साल सोमवार, 6 अप्रैल को माता अनुसूया की जयंती मनाई जाएगी।

माता अनुसूया को उनके त्याग, तपस्या और पति के प्रति अटूट निष्ठा के लिए जाना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली और बच्चों की तरक्की के लिए व्रत रखती हैं। चलिए जानते हैं वह कहानी, जिसकी वजह से उन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेवों) की माता बनने का सम्मान मिला।

Anusuya Jayanti 2026 Katha: अनुसूया माता की पौराणिक कथा

Anusuya Jayanti 2026 Katha
Anusuya Jayanti 2026 Katha (Source: Social Media)

धार्मिक कथाओं के अनुसार, माता अनुसूया ऋषि अत्रि की पत्नी थीं। उनके सतीत्व और भक्ति की चर्चा हर जगह थी। एक बार नारद मुनि ने पृथ्वी पर उनकी तारीफ सुनी और इससे बहुत खुश हुए। उन्होंने स्वर्ग जाकर देवी लक्ष्मी, सरस्वती और पार्वती के सामने अनुसूया के गुणों का खूब गुणगान किया।

नारद जी की बातें सुनकर तीनों देवियों को उत्सुकता हुई और उन्होंने त्रिदेवों से अनुसूया की परीक्षा लेने को कहा। तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश साधु का रूप धरकर ऋषि अत्रि के आश्रम पहुंचे। उस समय ऋषि घर पर नहीं थे, तो तीनों ने माता अनुसूया से भिक्षा मांगी। माता अनुसूया ने उन्हें भोजन के लिए बुलाया, लेकिन त्रिदेवों ने एक अजीब शर्त रख दी। उन्होंने कहा कि वे तभी भोजन करेंगे जब माता बिना वस्त्रों के उन्हें खाना परोसेंगी।

एक पतिव्रता स्त्री के लिए यह बहुत बड़ी दुविधा थी। लेकिन माता ने हार नहीं मानी और अपने तपोबल से जल छिड़क कर संकल्प लिया कि यदि उनका धर्म सच्चा है, तो ये तीनों साधु छोटे बच्चे बन जाएं। तुरंत ही त्रिदेव नन्हे बालक बन गए और माता ने उन्हें प्रेम से भोजन कराया।

जब काफी समय तक त्रिदेव वापस नहीं आए, तो तीनों देवियां चिंता में पड़ गईं और आश्रम पहुंचीं। वहां उन्होंने देखा कि उनके स्वामी तो बालक बनकर पालने में खेल रहे हैं। देवियों को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने माता अनुसूया से माफी मांगते हुए अपने पतियों को पहले जैसा बनाने की विनती की।

माता अनुसूया ने फिर से जल छिड़का और त्रिदेव अपने असली रूप में आ गए। माता की भक्ति से खुश होकर त्रिदेवों ने उन्हें वरदान दिया कि वे उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे। आगे चलकर त्रिदेवों ने माता अनुसूया और ऋषि अत्रि के घर ‘भगवान दत्तात्रेय’ के रूप में जन्म लिया।

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इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।