नवरात्रि में क्यों बोए जाते हैं जौ? जानें सुख-समृद्धि और खुशहाली से जुड़ी इस प्राचीन परंपरा का रहस्य

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Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में नवरात्रि को सबसे प्रमुख त्योहार माना जाता है। इस दौरान देवी की उपासना के लिए नवरात्रि के दिन अत्यंत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे साल में 4 बार नवरात्रि का त्यौहार आता है, जिसमें दो गुप्त नवरात्र, एक शारदीय और दूसरा चैत्र नवरात्रि होता है। इनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। शारदीय नवरात्रि दीपावली से पहले आश्विन के महीने में आता है और चैत्र मास में चैत्र नवरात्रि आती है। अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक, चैत्र नवरात्रि मार्च-अप्रैल महीने में आती है। आइए जानते हैं, नवरात्रि के दौरान…

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में नवरात्रि को सबसे प्रमुख त्योहार माना जाता है। इस दौरान देवी की उपासना के लिए नवरात्रि के दिन अत्यंत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे साल में 4 बार नवरात्रि का त्यौहार आता है, जिसमें दो गुप्त नवरात्र, एक शारदीय और दूसरा चैत्र नवरात्रि होता है। इनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। शारदीय नवरात्रि दीपावली से पहले आश्विन के महीने में आता है और चैत्र मास में चैत्र नवरात्रि आती है। अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक, चैत्र नवरात्रि मार्च-अप्रैल महीने में आती है। आइए जानते हैं, नवरात्रि के दौरान जौ क्यों बोए जाते हैं।

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर हो गया है। प्रतिपदा तिथि का समापन 20 मार्च को सुबह 4 बजकर 52 मिनट पर होगा। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत आज यानी19 मार्च 2026 से हो गई है। चैत्र नवरात्रि का समापन 27 मार्च को होगा।

Chaitra Navratri 2026 Reason: नवरात्रि के पहले दिन क्यों बोया जाता है जौ

Chaitra Navratri 2026 Reason
Chaitra Navratri 2026 Reason (Social Media)

शारदीय हो या चैत्र दोनों ही नवरात्रि के पहले दिन भक्तगण घर के मंदिर में जौ या ज्वारे बोते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जौ बोने से घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता का वास होता है। माना जाता है कि नवरात्रि में बोए गए जौ अकर अच्छ रूप से अंकुरित और विकसित होते हैं, तो इसका मतलब है कि आपके घर में समृद्धि और खुशहाली हमेशा बनी रहेगी।

Navratri Me Jau Bone ki Katha: नवरात्रि में जौ बोने की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, जब धरती पर दैत्य-असुरों का अत्याचार बढ़ गया था, तब मां दुर्गा ने उनका संहार करके मानव जाति के जीवन की रक्षा की थी। माना जाता है कि देवी दुर्गा और दैत्यों के संघर्ष के दौरान पृथ्वीलोक पर भयंकर अकाल आ गया था, चारों तरफ सूखा ही सूखा पड़ गया था। मां अंबे के द्वारा दैत्यों के संहार के बाद जब धरती फिर से हरी-भरी हुई, तब सबसे पहले जौ उगे, इसलिए जौ को समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है।

दूसरी धार्मिक मान्यता है कि जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की तब सबसे पहले जौ की फसल विकसित हुई थी। कहा जाता है कि नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के समय जौ की सबसे पहले पूजा की जाती है और उसे कलश में भी स्थापित किया जाता है। नवरात्रि के समय जौ बोने की परंपरा धरती पर संपन्नता का संदेश देती है।

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।