Hanuman Ji Tulsi Story: जब छप्पन भोग से भी नहीं भरा पेट

यह पुरानी कहानी तब की है जब भगवान राम अयोध्या लौट आए थे। एक दिन माता सीता ने हनुमान जी को प्यार से भोजन पर बुलाया। उन्होंने हनुमान जी के लिए 56 तरह के पकवान और स्वादिष्ट व्यंजन बनवाए। हनुमान जी खाने बैठे और देखते ही देखते सारा खाना खत्म कर दिया, फिर भी उनकी भूख शांत नहीं हुई। माता सीता ने फिर से खाना बनवाया, लेकिन हनुमान जी उसे भी खा गए। धीरे-धीरे महल का सारा अनाज खत्म होने लगा, जिसे देखकर माता सीता चिंता में पड़ गईं।
परेशान होकर माता सीता ने भगवान राम से हनुमान जी की भूख मिटाने का तरीका पूछा। राम जी का सुझाव मानकर माता ने एक तुलसी का पत्ता लिया और उस पर ‘राम’ नाम लिख दिया। जैसे ही हनुमान जी ने वह पत्ता खाया, उनका पेट तुरंत भर गया। तब माता सीता समझ गईं कि हनुमान जी को अनाज की नहीं, बल्कि श्री राम की भक्ति की भूख थी। तभी से यह माना जाता है कि हनुमान जी को तुलसी चढ़ाने से वे बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं।


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