कब है हरियाली अमावस्या? (Hariyali Amavasya 2026 Kab Hai)

पंचांग के अनुसार, सावन महीने की अमावस्या तिथि 11 अगस्त 2026 की रात 1 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी और 12 अगस्त 2026 की रात 11 बजकर 7 मिनट पर खत्म होगी। उदयतिथि के अनुसार, हरियाली अमावस्या का त्योहार 12 अगस्त को मनाया जाएगा।
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण (Hariyali Amavasya Par Surya Grahan)
इस बार हरियाली अमावस्या के दिन ही साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण भी लगने जा रहा है। यह ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और 13 अगस्त 2026 की सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर खत्म होगा। ग्रहण की वजह से लोगों के मन में यह सवाल है कि वे इस दिन दान और स्नान कब और कैसे कर पाएंगे।
दान और स्नान का शुभ मुहूर्त (Hariyali Amavasya Snan Daan Time)
यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका कोई सूतक काल नहीं माना जाएगा। इसका मतलब है कि आप बिना किसी डर या संकोच के पूरे दिन कभी भी स्नान और दान कर सकते हैं।
इस दिन सुबह 4:23 से 5:06 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा, जो स्नान-दान के लिए सबसे उत्तम है। इसके अलावा, पूजा-पाठ के लिए दिन में चार और शुभ मुहूर्त रहेंगे:
- चर मुहूर्त: सुबह 5:38 बजे से 7:20 बजे तक
- लाभ मुहूर्त: सुबह 7:20 बजे से 9:03 बजे तक
- अमृत मुहूर्त: सुबह 9:03 बजे से 10:45 बजे तक
- शुभ मुहूर्त: दोपहर 12:27 बजे से 2:10 बजे तक
सावन अमावस्या पूजा विधि (Sawan Amavasya Puja Vidhi)

- सुबह जल्दी उठकर नहाएं और साफ कपड़े पहनें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं।
- भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक और धूप (अगरबत्ती) जलाएं।
- उन्हें चंदन, अक्षत और फूल चढ़ाएं।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करके पूजा पूरी करें।
- इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और अपने पूर्वजों के नाम पर तर्पण करना भी बहुत अच्छा माना जाता है।
सावन अमावस्या का महत्व (Sawan Amavasya Significance)

हिंदू धर्म में अमावस्या के दिन पूर्वजों को याद करने और दान-पुण्य करने की परंपरा है। चूंकि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है, इसलिए इस दिन शिव जी की पूजा करने से इसका महत्व दोगुना हो जाता है। इसके साथ ही, यह त्योहार हमें पर्यावरण को बचाने का संदेश देता है। माना जाता है कि पेड़-पौधों में भगवान का वास होता है, इसलिए इस दिन नए पौधे लगाना और प्रकृति की सेवा करना बहुत पुण्य का काम माना जाता है।



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