Makar Sankranti से पहले Lohri की धूम! जानें सूर्यास्त के बाद पूजा का समय और इसका ऐतिहासिक महत्त्व

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Lohri Date 2026: साल का पहला महीना जनवरी त्योहारों के बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस महीने सकट चौथ, मकर संक्रांति और लोहड़ी जैसे पर्व आते हैं। मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है, जो पंजाब का मुख्य पर्व है और लोग इस पर्व को बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। लोहड़ी की रौनक लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है, क्योंकि इस दिन सिख समुदाय के लोग आग जलाकर उसकी परिक्रमा लगाते हैं और उसमें तिल, गुड़, मूंगफली चढ़ाते हैं। लोहड़ी का पर्व नई फसल की खुशी में मनाया जाता है और सिख समुदाय में…

Lohri Date 2026: साल का पहला महीना जनवरी त्योहारों के बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस महीने सकट चौथ, मकर संक्रांति और लोहड़ी जैसे पर्व आते हैं। मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है, जो पंजाब का मुख्य पर्व है और लोग इस पर्व को बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। लोहड़ी की रौनक लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है, क्योंकि इस दिन सिख समुदाय के लोग आग जलाकर उसकी परिक्रमा लगाते हैं और उसमें तिल, गुड़, मूंगफली चढ़ाते हैं।

लोहड़ी का पर्व नई फसल की खुशी में मनाया जाता है और सिख समुदाय में इस पर्व का खास महत्व माना गया है। आइए जानते हैं, इस साल कब मनाई जाएगी, Lohri Date 2026 और इस दिन आग जलाने का क्या महत्व है।

Lohri Date 2026: लोहड़ी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त

Lohri time 2026
Lohri time 2026 (Source: AI)

लोहड़ी का पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है और इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को है। ऐसे में Lohri Shubh Muhurat 13 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। लोहड़ी का पर्व सूर्यास्त के बाद मनाते हैं और 13 जनवरी को सूर्यास्त का समय शाम 5 बजकर 44 मिनट है। इसलिए सूर्यास्त के बाद 2 घंटे का समय लोहड़ी के लिए बेहद ही शुभ है।

Lohri Shubh Muhurat: लोहड़ी का ऐतिहासिक महत्व

Lohri Shubh Muhurat
Lohri Shubh Muhurat (Source: AI)

लोहड़ी के पर्व पर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनने और गाने की परंपरा है। दुल्ला भट्टी मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में पंजाब के एक प्रसिद्ध लोकनायक थे। उन्होंने मध्य एशिया के गुलाम बाजारों में बेचे जाने से कई हिंदू लड़कियों को बचाया था। कहा जाता है कि उन्होंने सुंदरी और मुंदरी नामक दो लड़कियों की रक्षा की, जो बाद में पंजाब की Lohri History लोककथाओं का हिस्सा बन गईं।

Lohri Significance: लोहड़ी का क्या महत्व है?

Lohri Significance
Lohri Significance (Source: AI)

इस पर्व के दिन से रात छोटी होनी शुरू हो जाती है और दिन बड़े होते हैं। लोहड़ी का त्योहार पारंपरिक तौर पर रबी फसल की कटाई से संबंधित है। इस दिन शाम के समय लोहड़ी की अग्नि की चारों ओर सभी मिलकर परिक्रमा करते हैं और नाचते, गाते हैं। अग्नि में तिल, गुड़, गजक आदि भी अर्पित किया जाता है। रबी की फसल को भी अग्नि में डाला जाता है। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने के खुशी में मनाते हैं। लोहड़ी के दिन कई जगहों पर पतंग उड़ाई जाती है और लड्डू बांटा जाता है।

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।