Maa Brahmacharini Ji Ki Aarti Lyrics: आज चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है, आज मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। ‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली। पिछले जन्म में भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए इन्होंने हज़ारों सालों तक कठोर तप किया था, इसीलिए इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा जाता है। यह स्वरूप अनंत फल देने वाला माना जाता है, जो भक्तों के जीवन में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की शक्ति का संचार करता है।
माना जाता है कि इनकी पूजा करने से जीवन में कभी सुख-सुविधाओं और धन की कमी नहीं होती। आज के दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजन के साथ उनकी आरती करने से पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
Maa Brahmacharini Ji Ki Aarti Lyrics: मां ब्रह्मचारिणी जी की आरती

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए।
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।


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