नवरात्रि में बरसेगी असीम शक्ति! दुख-दरिद्रता मिटाने के लिए करें श्री दुर्गा चालीसा का पाठ, यहां देखें लिरिक्स

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Shri Durga Chalisa Lyrics in Hindi: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का बेहद खास महत्व है। चैत्र नवरात्रि से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी हो जाती है। चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आध्यात्मिक शुद्धि और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इन नौ दिनों देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की अराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में श्रद्धापूर्वक देवी दुर्गा की आराधना करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को रामनवमी के साथ संपन्न होगा। इन नौ…

Shri Durga Chalisa Lyrics in Hindi: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का बेहद खास महत्व है। चैत्र नवरात्रि से हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी हो जाती है। चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आध्यात्मिक शुद्धि और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इन नौ दिनों देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की अराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में श्रद्धापूर्वक देवी दुर्गा की आराधना करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च को रामनवमी के साथ संपन्न होगा। इन नौ दिनों दुर्गा चालीसा का पाठ करना बहुत फलदाई माना जाता है। यहां पर श्री दुर्गा चालीसा की लिरिक्स दी गई हैं।

Shri Durga Chalisa Lyrics in Hindi: श्री दुर्गा चालीसा

Shree Durga Chalisa
Shree Durga Chalisa (Social Media)

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥

शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥

रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥

तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥

अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥

क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥

मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥

कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥

सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥

नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुँलोक में डंका बाजत॥

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे।
रक्तन बीज शंखन संहारे॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥

रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥

परी गाढ़ सन्तन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥

आभा पुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥

प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥

शंकर आचारज तप कीनो।
काम क्रोध जीति सब लीनो॥

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥

शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥

शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥

मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥

आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपु मुरख मोही डरपावे॥

शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥

करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।।

जब लगि जियऊं दया फल पाऊं।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥

श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥

देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

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Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।