कौन हैं भगवान काल भैरव?
पुराणों के अनुसार, काल भैरव को ‘काशी का कोतवाल’ (रक्षक) और तंत्र-मंत्र का देवता माना जाता है। भगवान शिव ने असुरों का अंत करने और धर्म की रक्षा के लिए यह रूप लिया था। काल भैरव का मतलब है वह देव जो समय और मृत्यु पर जीत हासिल कर चुके हों, इसलिए इनकी पूजा अक्सर रात के समय की जाती है।
Significance of Kalashtami Night: क्यों खास होती है कालाष्टमी की रात?

मान्यता है कि कालाष्टमी की रात भगवान काल भैरव की पूजा के लिए सबसे अच्छी होती है। इन्हें नकारात्मक शक्तियों को रोकने वाला देव माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस रात ब्रह्मांड की ऊर्जा बहुत बढ़ जाती है, जिससे पूजा-पाठ और साधना का असर जल्दी होता है। इसी वजह से साधु और साधक इस रात को खास मानते हैं।
Kalashtami Mysterious Night: क्या वाकई तांत्रिक शक्तियां बढ़ जाती हैं?
यह बात पूरी तरह से विश्वास और परंपराओं पर टिकी है। तंत्र शास्त्र कहता है कि अमावस्या और कालाष्टमी जैसी रातों में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जाएं सक्रिय रहती हैं। इस समय तंत्र साधना करने वालों को अपनी शक्तियों में जल्दी कामयाबी मिलने की उम्मीद रहती है।
Kalashtami 2026: यह रात रहस्यमयी क्यों है?
माना जाता है कि कालाष्टमी की रात काल भैरव अपने भक्तों की रक्षा के लिए जागते हैं और उनके दुख दूर करते हैं। इसे रहस्यमयी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस समय वातावरण शांत होता है और ध्यान लगाना आसान होता है। पुराने समय से ही साधु-संत इस रात को साधना के लिए सबसे सही मानते आए हैं।
कालाष्टमी पर क्या करें?
- इस दिन काल भैरव की पूजा करें।
- सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ होता है।
- “ॐ काल भैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें।


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