कैसे मिली श्रीराम को लंका पर विजय? जानें विजया एकादशी की पौराणिक व्रत कथा और पूजन के नियम

Vijaya Ekadashi Vrat Niyam
Vijaya Ekadashi Vrat Niyam: हिंदू धर्म में विजया एकादशी का खास महत्व है। यह एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आती है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह एकादशी शत्रुओं पर विजय दिलाने और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता सुनिश्चित करने वाली मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और साधक को भय और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। आइए जानें कि वर्ष 2026 में विजया एकादशी कब है, साथ में जानेंगे विजया एकादशी व्रत कथा, पूजा नियम और धार्मिक महत्व।

Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी कब है?

पंचांग गणना के अनुसार, एकादशी तिथि का विस्तार 12 से 13 फरवरी तक रहेगा। हालांकि, उदयातिथि की मान्यता के कारण व्रत 13 फरवरी को ही रखा जाएगा।

Vijaya Ekadashi Vrat Niyam: विजया एकादशी पूजा के नियम

Vijaya Ekadashi Vrat Niyam
Vijaya Ekadashi Vrat Niyam (Image: AI Generated)
  • प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले) धारण करें।
  • एक साफ चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें और कलश पूजन के साथ देव का आह्वान करें।
  • भगवान को पीले पुष्प, तुलसी दल, चंदन और मिठाई अर्पित करें। तुलसी का प्रयोग अनिवार्य है।
  • ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का 108 बार जाप करें या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • शाम के समय घी का दीपक जलाकर एकादशी की व्रत कथा सुनें और आरती करें।
  • रात में सोए नहीं, बल्कि भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें।
  • अगले दिन (द्वादशी तिथि) शुभ समय में ब्राह्मणों को दान देकर या भोजन कराकर स्वयं पारण करें।

Vijaya Ekadashi Vrat Katha: विजया एकादशी व्रत की कथा

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Vijaya Ekadashi Vrat Niyam (Image: AI Generated)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में, पांडवों के मन में फाल्गुन मास की एकादशी का महत्व जानने की उत्सुकता जागी। जब उन्होंने अपनी इस जिज्ञासा को भगवान श्रीकृष्ण के सामने रखा, तब माधव ने उन्हें बताया कि इस पावन व्रत की महिमा का ज्ञान सर्वप्रथम ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को दिया था। श्रीकृष्ण ने उसी ऐतिहासिक कथा को पांडवों को विस्तार से सुनाना शुरू किया।

कथा त्रेता युग की ओर ले जाती है, जब भगवान श्रीराम अपनी वानर सेना के साथ माता सीता को रावण के चंगुल से मुक्त कराने के लिए लंका की ओर बढ़ रहे थे। मार्ग में विशाल समुद्र को देख पूरी सेना असमंजस में पड़ गई कि इसे पार कैसे किया जाए। तब लक्ष्मण जी ने प्रभु राम को सुझाव दिया कि यहां से कुछ ही दूरी पर परम ज्ञानी वकदालभ्य मुनि का आश्रम है, वे ही इस कठिन परिस्थिति से निकलने का मार्ग बता सकते हैं।

जब श्रीराम मुनिवर के पास पहुंचे, तो मुनि ने उन्हें फाल्गुन कृष्ण पक्ष की ‘विजया एकादशी’ का विधान बताया। उन्होंने कहा कि यदि प्रभु अपनी पूरी सेना सहित भगवान विष्णु का यह व्रत पूर्ण श्रद्धा से करेंगे, तो उन्हें न केवल समुद्र पार करने का मार्ग मिलेगा, बल्कि शत्रुओं पर भी विजय प्राप्त होगी। श्रीराम और वानर सेना ने इस उपवास का पालन किया, जिसके पुण्य प्रताप से वे रामसेतु का निर्माण करने में सफल रहे और अंततः रावण का वध कर विजय श्री प्राप्त की।

Vijaya Ekadashi Vrat Mahatva: विजया एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व

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Vijaya Ekadashi Vrat Niyam (Image: AI Generated)
विजया एकादशी का व्रत न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि आर्थिक और शारीरिक कष्टों को भी दूर करता है। पुराणों के अनुसार, यह व्रत पिछले जन्मों के पापों का क्षय कर पुण्य की वृद्धि करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों, व्यवसायियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह दिन अपनी कार्यसिद्धि के संकल्प हेतु श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है।

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