Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने परीक्षा केंद्रों से जुड़ा एक अहम और संवेदनशील निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत अब राज्य में होने वाली शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं में परीक्षार्थियों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक उतारने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। सरकार के इस कदम से खासतौर पर विवाहित महिलाओं और सिख समाज के युवाओं को बड़ी राहत मिली है।
Haryana News: महिलाओं को मंगलसूत्र के साथ परीक्षा की अनुमति
अब हरियाणा की विवाहित महिलाएं परीक्षा केंद्र में मंगलसूत्र पहनकर प्रवेश कर सकेंगी। पहले कई बार सुरक्षा जांच के दौरान महिलाओं से मंगलसूत्र उतरवाने की शिकायतें सामने आती थीं। इससे न सिर्फ उनकी भावनाएं आहत होती थीं, बल्कि परीक्षा से पहले मानसिक दबाव भी बढ़ जाता था। मुख्यमंत्री ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि महिलाओं की गरिमा और आस्था का पूरा सम्मान किया जाए।

CM Nayab Singh Saini: सिख परीक्षार्थियों को कृपाण और कड़ा धारण करने की छूट
सरकार के नए निर्देशों के अनुसार सिख परीक्षार्थी अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार कृपाण और कड़ा पहनकर परीक्षा दे सकेंगे। सिख धर्म में ये वस्तुएं केवल प्रतीक नहीं, बल्कि आस्था और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि हरियाणा विविध संस्कृतियों और परंपराओं की भूमि है, जहां हर समुदाय की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
सुरक्षा और श्रद्धा के बीच संतुलन
सरकार ने यह भी साफ किया है कि परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जिन परीक्षार्थियों को मंगलसूत्र या कृपाण-कड़ा पहनकर परीक्षा देनी है, उन्हें निर्धारित समय से कुछ पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना होगा। इस अतिरिक्त समय में सम्मानजनक तरीके से सुरक्षा जांच की जाएगी, ताकि परीक्षा की शुचिता बनी रहे और किसी भी तरह की अनुचित गतिविधि की संभावना न हो।

परीक्षार्थियों के मनोबल को मिलेगा बल
इस फैसले से परीक्षार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बिना किसी तनाव के परीक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे समावेशी सोच का उदाहरण बताया है। उनका मानना है कि इससे परीक्षा केंद्रों का माहौल भी अधिक सकारात्मक बनेगा।
समावेशी शासन की मिसाल
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का यह कदम दिखाता है कि सरकार नियमों के साथ-साथ जनता की भावनाओं को भी महत्व देती है। विकास और आधुनिक व्यवस्था के साथ परंपराओं का सम्मान करना इस निर्णय की सबसे बड़ी खासियत है। यह पहल न केवल महिलाओं और सिख समाज के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आई है कि हरियाणा में आस्था और प्रशासन साथ-साथ चलते हैं।
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