MLA Hostel Canteen Controversy in Haryana : हरियाणा के प्रतिष्ठित एमएलए हॉस्टल, सेक्टर-3 स्थित कैंटीन में अव्यवस्था, लापरवाही और अभद्र व्यवहार का गंभीर मामला सामने आया है। सरकारी परिसर में संचालित इस कैंटीन में आम नागरिकों के साथ हुए दुर्व्यवहार ने व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
MLA Hostel Canteen Controversy in Haryana: मंत्री कृष्ण बेदी से की शिकायत

यमुनानगर निवासी अभिषेक और विनय ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत हरियाणा सरकार के मंत्री कृष्ण बेदी को भेजी है। शिकायत में उन्होंने बताया कि 28 अप्रैल को वे दोनों दोपहर के समय एमएलए हॉस्टल कैंटीन में भोजन के लिए पहुंचे थे। उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पर्ची कटवाई और ₹152 का भुगतान भी किया।
इसके बावजूद उन्हें करीब 45 मिनट तक इंतज़ार करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने कई बार स्टाफ से भोजन के बारे में जानकारी लेनी चाही, लेकिन हर बार अलग-अलग और उलझाने वाले जवाब मिले। कोई कर्मचारी पर्ची अंदर जमा करने को कहता, तो कोई लाइन में खड़े रहने का निर्देश देता। स्थिति और भी उलझन भरी तब हो गई जब एक कर्मचारी उनकी पर्ची बिना किसी स्पष्ट जानकारी के लेकर चला गया।
कर्मचारी ने किया अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल

इतना ही नहीं, पर्ची लेने के बाद भी उन्हें 25–30 मिनट तक और इंतज़ार करना पड़ा। लगभग एक घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद जब भोजन परोसा गया, तब भी रोटियों के लिए और इंतज़ार करने को कहा गया।
जब अभिषेक और विनय ने इस देरी पर आपत्ति जताई, तो एक कर्मचारी ने ऊंची आवाज़ में अपमानजनक लहजे में कहा,“खाना है तो खाओ, नहीं तो अपनी पर्ची लेकर निकलो।”
यह बात वहां मौजूद अन्य लोगों के सामने कही गई, जिससे दोनों को गहरा मानसिक आघात और सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ा।
परिसर में पसरी लापरवाही

शिकायत में यह भी बताया गया है कि कैंटीन में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब थी। कर्मचारियों द्वारा बिना ग्लव्स के खाना परोसा जा रहा था, जो स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी को दर्शाता है। सरकारी परिसर में इस तरह की लापरवाही लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकती है।
पीड़ितों ने अपनी शिकायत में मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और कैंटीन संचालन में सुधार लाया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि भविष्य में किसी भी नागरिक को इस तरह के अपमान और असुविधा का सामना न करना पड़े।
यह घटना न केवल MLA कैंटीन प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि सरकारी संस्थानों में आम जनता के साथ व्यवहार और सेवा की गुणवत्ता पर भी गंभीर चिंता पैदा करती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या वाकई सुधार के ठोस कदम उठाए जाते हैं।


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