चंडीगढ़ : देश में पिछले कई दिनो से एनआरसी मामले में जहां भाजपा व विपक्ष में तनातनी का माहौल बना हुआ है और केंद्र व विपक्ष के नेता एनआरसी मामले में अलग अलग बयानो द्वारा अपना अपना पक्ष रख रहे है वहीं असम के तर्ज पर हरियाणा में भी अवैध प्रवासियों के राष्टीय रजिस्टर नागरिक की प्रक्रिया के संबंध में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र में इस पर अभी विचार किया जाएगा। जो भी केंद्र की तरफ से सभी राज्यों को निर्देश जारी किए जाएंगे।
उसी के मुताबिक सर्वे कर रजिस्टर किया जाएगा। जब उनसे पूछा गया कि इस संबंध में उनका का कहना है तो उन्होंने कहा कि ये निश्चित रूप से होना ही चाहिए।गौरतलब है कि असम में सोमवार को जारी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मसौदे से कुल 3.29 करोड़ आवेदकों में से 40 लाख से ज्यादा लोगों को बाहर किए जाने से उनके भविष्य को लेकर चिंता पैदा हो गई है। साथ ही एक राष्ट्रव्यापी राजनीतिक विवाद पैदा हो गया है। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) के मुताबिक, जिस व्यक्ति का सिटिजनशिप रजिस्टर में नहीं होता है उसे अवैध नागरिक माना जाता है।
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इसे 1951 की जनगणना के बाद तैयार किया गया था। इसमें असम के हर गांव के हर घर में रहने वाले लोगों के नाम और संख्या दर्ज की गई है। एनआरसी की रिपोर्ट से ही पता चलता है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं है।आपको बता दें कि वर्ष 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद कुछ लोग असम से पूर्वी पाकिस्तान चले गए, लेकिन उनकी जमीन असम में थी। लोगों का दोनों और से आना-जाना बंटवारे के बाद भी जारी रहा। इसके बाद 1951 में पहली बार एनआरसी के डाटा का अपटेड किया गया।
(आहूजा)


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