ताली बजाने से मिलेंगे कई लाभ, बच्चे हों या बड़े सभी के लिए फायदेमंद ‘फ्लावर क्लैप’

Summary :

नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। अनियमित दिनचर्या और खानपान में गड़बड़ी कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं को दावत के समान है। ऐसे में कई योगासन हैं, जिनके अभ्यास से शारीरिक और मानसिक समस्याओं को कोसो दूर भेजा जा सकता है। ऐसा ही एक अभ्यास ताली बजाने से प्रेरित है, जिसे फ्लावर क्लैप या पुष्प ताली कहते हैं। फ्लावर क्लैप एक आसान और प्रभावी अभ्यास है, जो ताली बजाने की क्रिया से प्रेरित है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, यह अभ्यास बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है। इसे क्लैपिंग थेरेपी का…

नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। अनियमित दिनचर्या और खानपान में गड़बड़ी कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं को दावत के समान है। ऐसे में कई योगासन हैं, जिनके अभ्यास से शारीरिक और मानसिक समस्याओं को कोसो दूर भेजा जा सकता है। ऐसा ही एक अभ्यास ताली बजाने से प्रेरित है, जिसे फ्लावर क्लैप या पुष्प ताली कहते हैं।

फ्लावर क्लैप एक आसान और प्रभावी अभ्यास है, जो ताली बजाने की क्रिया से प्रेरित है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, यह अभ्यास बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है। इसे क्लैपिंग थेरेपी का हिस्सा माना जाता है, जिसमें हाथों की ताली से शरीर के कई एक्यूप्रेशर पॉइंट्स एक्टिव होते हैं।

फ्लावर क्लैप अभ्यास की विधि भी बेहद आसान है और यह कहीं भी किया जा सकता है। एक्सपर्ट के अनुसार, इसके लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं या आराम से बैठ जाएं। दोनों हाथों को छाती के सामने लाएं। अब हाथों को फूल की तरह खोलें – उंगलियां फैलाकर और हथेलियां थोड़ी गोलाकार बनाकर। फिर जोर से ताली बजाएं, जैसे फूल खिल रहे हों। ताली बजाते समय हाथ ऊपर की ओर उठाएं और फिर नीचे लाएं, जैसे बारिश की बूंदें गिर रही हों।

इस दौरान ताली की आवाज तेज और लयबद्ध होनी चाहिए। शुरू में 5-10 मिनट तक रोजाना करें। सुबह खाली पेट या ताजी हवा में अभ्यास करना सबसे अच्छा है। बेहतर परिणाम के लिए हथेलियों पर सरसों या नारियल का तेल लगाकर क्लैपिंग करें। धीरे-धीरे गति बढ़ाएं, लेकिन ज्यादा जोर न लगाएं।

फ्लावर क्लैप के अभ्यास से शरीर को कई लाभ मिलते हैं। हाथों में 340 से अधिक एक्यूप्रेशर पॉइंट्स होते हैं, नियमित क्लैपिंग से ये पॉइंट्स उत्तेजित होते हैं, जिससे किडनी, फेफड़े, हृदय, पाचन तंत्र और कमर जैसे अंगों का स्वास्थ्य बेहतर होता है। यह रक्त संचार को बढ़ाता है, जिससे दिल की सेहत सुधरती है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी यह बेहद फायदेमंद है, इससे तनाव, चिंता और मूड स्विंग्स कम होते हैं। हैप्पी हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे मन प्रसन्न रहता है। बच्चों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है, क्योंकि यह संज्ञानात्मक विकास, एकाग्रता और मोटर स्किल्स को मजबूत करता है। वहीं, बड़े लोगों में यह जोड़ों की जकड़न दूर करता है, इम्युनिटी बढ़ाता है और थकान मिटाता है।

खास बात है कि इसके लिए किसी तरह के कोई उपकरण की जरुरत नहीं, इसलिए इसे घर, पार्क या ऑफिस में आसानी से किया जा सकता है।

–आईएएनएस

एमटी/एएस

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.