अयोध्या, 23 सितंबर (आईएएनएस)। अयोध्या में दीपोत्सव 2026 इस बार परंपरा, तकनीक और वैश्विक भागीदारी के नए रंग में नजर आएगा। रामनगरी में करीब 30 लाख दीपों की रोशनी के साथ आसमान में 2,100 ड्रोन शो आकर्षण का केंद्र होगा।
रामायण आधारित सजावट, भव्य प्रवेश द्वार, सरयू में पुष्पक विमान का स्थायी इंस्टॉलेशन, डिजिटल रामायण, 3डी प्रोजेक्शन और लेजर शो के जरिए दीपोत्सव को और भव्य स्वरूप देने की तैयारी है। आयोजन में आम लोगों और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए मायजीओवी यूपी के माध्यम से सुझाव भी लिए जाएंगे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात के साथ दीपोत्सव की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं, शहर की सजावट, सुरक्षा, यातायात और आयोजन की व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
जयवीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि युवाओं को दीपोत्सव की तैयारियों से सक्रिय रूप से जोड़ा जाए और उन्हें प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं का वाहक एवं संवाहक बनाया जाए। उन्होंने कहा कि आयोजन को और नवाचारपूर्ण बनाने के लिए आम लोगों से मायजीओवी यूपी के जरिए सुझाव आमंत्रित किए जाएं और उपयोगी सुझावों को आयोजन की योजना में शामिल किया जाए। दीपोत्सव में 2,100 ड्रोन शो प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगा। बैठक में इसे दीपोत्सव के दिन के अलावा दो दिन बाद होने वाले जमघट में भी आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि स्थानीय लोगों और पर्यटकों को इसे दोबारा देखने का अवसर मिल सके।
इसके साथ लाइव प्रस्तुतियों, 3डी प्रोजेक्शन, लेजर शो और म्यूजिकल ग्रीन फायरवर्क्स को भी आयोजन का हिस्सा बनाने की तैयारी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दीपोत्सव की भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रियों या उनके प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने की योजना है। वहीं 30 से अधिक देशों में भारतीय दूतावासों और राजदूतों के माध्यम से प्रवासी भारतीयों को दीपोत्सव में शामिल होने का न्योता भेजने की तैयारी है। अयोध्या की सड़कों और सरयू तट को रामायण आधारित सजावट से सजाया जाएगा। धर्मपथ पर रामायण आधारित 10 प्रवेश द्वार बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। इसके अलावा अयोध्या आने वाले प्रमुख मार्गों पर तीन अन्य रामायण द्वार बनाए जाने की योजना है, जिनमें सुल्तानपुर और रायबरेली मार्ग भी शामिल हैं।
सरयू में पुष्पक विमान का स्थायी स्वरूप वाला इंस्टॉलेशन लगाने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। रामायण के अलग-अलग कांडों पर आधारित सड़क किनारे इंस्टॉलेशन लगाए जाएंगे। इनके साथ सरल भाषा में एक-एक पंक्ति में संबंधित कथा की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है, ताकि बच्चों को भी रामायण की कहानियां आसानी से समझ में आ सकें। अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने ऐसे सेल्फी प्वाइंट विकसित करने के निर्देश दिए, जिनसे पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित न हो।
वहीं, दीपोत्सव के दिन सुबह चार बजे से भजन प्रसारण की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। दीपोत्सव के दौरान 2,100 से अधिक बटुकों द्वारा सामूहिक सरयू आरती कराने की योजना है। इसके अलावा 240 से अधिक मंदिरों और मठों में दीप प्रज्ज्वलन तथा उद्योग एवं व्यापार संगठनों के सहयोग से 25 प्रमुख चौराहों को सजाया जाएगा। इससे शहर के प्रमुख इलाकों और सार्वजनिक स्थानों तक दीपोत्सव का उत्सवी माहौल पहुंचाने की तैयारी है। संस्कृति विभाग देश-विदेश की रामलीला मंडलियों की प्रस्तुतियां, पारंपरिक लोकनृत्य और साकेत कॉलेज से रामकथा पार्क तक झांकियों की शोभायात्रा आयोजित करेगा। कार्यक्रम में भरत मिलाप और भगवान राम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक को भी शामिल किया जाएगा।
पिछले वर्ष 100 बच्चों की भागीदारी वाली वानर सेना को इस बार और विस्तारित करने की योजना है। संग्रहालय परिसर में डिजिटल रामायण, राम वन गमन मार्ग पर आधारित मूर्तियां, राम थीम वाला बाजार तथा पुस्तकों और चित्रों की प्रदर्शनी लगाने की योजना है। इसके साथ ही ‘श्रीराम की वैश्विक यात्रा’ नाम से विशेष प्रस्तुति भी प्रस्तावित है। दीप प्रज्ज्वलन की व्यवस्थाओं और स्वयंसेवकों के समन्वय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई।
तैयारियों में जिला प्रशासन, श्री अयोध्याजी तीर्थ विकास परिषद और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की भागीदारी रहेगी। सुरक्षा, स्वच्छता, बिजली आपूर्ति, सड़कों की मरम्मत और राम की पैड़ी क्षेत्र में चल रहे कार्यों को समय से पूरा करने पर जोर दिया गया। बैठक में विभिन्न विभागों की 284 विकास परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं की कुल लागत 5,452.79 करोड़ रुपये है। इनमें 4,130.25 करोड़ रुपये की 152 परियोजनाओं के लोकार्पण और 1,322.54 करोड़ रुपये की 132 परियोजनाओं के शिलान्यास का प्रस्ताव शामिल है।
उत्तर प्रदेश में नई पीढ़ी को कला और संस्कृति से जोड़ने के लिए 2026 में प्रमुख कला कार्यशालाओं और शिविरों के आयोजन की तैयारी है। अयोध्या में 22 से 26 अक्टूबर तक डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के सहयोग से राम की पैड़ी/गुप्तार घाट पर ‘राम, रामायण और अयोध्या’ राष्ट्रीय कार्यशाला एवं व्याख्यान श्रृंखला आयोजित होगी। इसमें 25 कलाकार और 10 विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसी क्रम में लखनऊ में राज्य ललित कला अकादमी की ओर से 18 से 22 नवंबर तक ‘लोकधारा’ पारंपरिक एवं लोक चित्रकला कला शिविर आयोजित किया जाएगा। इसमें डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय के कला एवं शिल्प संकाय, एमिटी विश्वविद्यालय और यूनिटी कॉलेज सहयोगी संस्थान होंगे।
–आईएएनएस
विकेटी/डीकेपी
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



