नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में फंड आवंटन को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा के बीच एक बार फिर टकराव देखने को मिला। शुक्रवार को एमसीडी मुख्यालय में आयोजित स्थायी समिति की बैठक में आप पार्षदों ने लंबित विकास फंड का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया।
आप ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक भेदभाव के चलते विपक्षी पार्षदों के वार्डों का विकास रोक रही है। पार्टी का कहना है कि सभी पार्षदों को क्षेत्र के विकास के लिए दो-दो करोड़ रुपए देने का वादा किया गया था, लेकिन सात महीने बीतने के बावजूद आप पार्षदों को पूरी राशि नहीं मिली है। इसके अलावा बैठक में दिल्ली की बदहाल सफाई व्यवस्था, बढ़ते प्रदूषण, स्वास्थ्य सेवाओं, मिड-डे-मील की गुणवत्ता और सौंदर्यीकरण जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए गए।
एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या आम आदमी पार्टी के पार्षदों का फंड रोककर भाजपा दिल्ली की जनता से बदला ले रही है? उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष बजट पर चर्चा के दौरान स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने प्रत्येक पार्षद को अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए दो करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी, लेकिन सात महीने गुजरने के बाद भी आप पार्षदों को केवल 50 लाख रुपए ही मिले हैं। शेष डेढ़ करोड़ रुपए कब और कैसे दिए जाएंगे, इसको लेकर कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा जब से एमसीडी की सत्ता में आई है, तब से खोखले वादे करके दिल्ली की जनता और पार्षदों को गुमराह कर रही है। यदि पार्षदों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड ही नहीं मिलेगा तो उनके वार्डों में सड़क, सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम कैसे होंगे? उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने पार्षदों को फंड उपलब्ध करा रही है, जबकि आम आदमी पार्टी के पार्षदों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
उन्होंने प्रदूषण के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरते हुए कहा कि स्थायी समिति की बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि आने वाले दिनों में दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है। ऐसे में एमसीडी ने इससे निपटने के लिए क्या ठोस तैयारी की है? छठ पूजा नजदीक है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इस बार श्रद्धालुओं के लिए उचित घाटों और व्यवस्थाओं का इंतजाम किया जाएगा या नहीं। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आप सरकार के दौरान छठ पूजा की बेहतर व्यवस्था के लिए प्रत्येक पार्षद को 40 हजार रुपए का फंड दिया जाता था। अब भाजपा सरकार को बताना चाहिए कि क्या इस बार छठ पूजा का बजट बढ़ाया गया है और पार्षदों को यह राशि उपलब्ध कराई जा रही है या नहीं।
नारंग ने दीपावली पर वार्डों में रोशनी की व्यवस्था और बारिश के बाद फैलने वाली बीमारियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पूछा कि मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगू की रोकथाम के लिए एमसीडी ने क्या कदम उठाए हैं। उनका कहना था कि दिल्ली में सफाई व्यवस्था लगातार खराब हो रही है और प्रदूषण से निपटने के लिए भी भाजपा के पास कोई ठोस कार्ययोजना नजर नहीं आ रही है।
नारंग ने कहा कि दिल्ली में लगातार इमारतें गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक और इमारत गिरने की घटना हुई। इससे पहले सत्य निकेतन और दक्षिणी दिल्ली में भी ऐसे हादसे हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एमसीडी के बिल्डिंग विभाग और अधिकारियों के साथ कथित गठजोड़ के कारण अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। आप ने स्थायी समिति की बैठक में इन मुद्दों को उठाकर भाजपा से जवाबदेही तय करने की मांग की।
वहीं, एमसीडी की सह-प्रभारी प्रीति डोगरा ने कहा कि भाजपा और स्थायी समिति पिछले सात महीनों से आप पार्षदों को फंड के नाम पर गुमराह कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने पार्षदों को सीएमडीएफ के तहत पैसा उपलब्ध करा दिया है, जिससे उनके वार्डों में विकास कार्य हो रहे हैं, लेकिन आप पार्षदों के फंड पर रोक लगाई जा रही है।
प्रीति डोगरा ने कहा कि भाजपा को डर है कि यदि आप पार्षदों को विकास के लिए पर्याप्त फंड मिल गया तो वे अपने क्षेत्रों में बेहतर काम कराकर जनता का विश्वास जीत लेंगे। उन्होंने कहा कि स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा को यह समझना चाहिए कि उनकी जिम्मेदारी केवल भाजपा के पार्षदों के प्रति नहीं, बल्कि पूरी दिल्ली की जनता के प्रति है।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल बड़ी-बड़ी घोषणाओं और वादों से दिल्ली नहीं चलने वाली। गरीबों और आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करने के लिए जमीन पर काम करना जरूरी है। यदि भाजपा दिल्ली की जनता के लिए काम नहीं कर सकती तो उसे सत्ता में बने रहने के बजाय इस्तीफा दे देना चाहिए। प्रीति डोगरा ने दावा किया कि जनता आने वाले समय में भाजपा को एमसीडी और दिल्ली की सत्ता से बाहर कर देगी।
–आईएएनएस
पीकेटी/डीकेपी
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