मुंबई, 16 जुलाई (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पेट्रोल में अनिवार्य एथेनॉल मिश्रण की नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि देशभर के लाखों वाहन मालिक, खासकर युवा और मध्यम वर्ग, बढ़ते एथेनॉल मिश्रण को लेकर चिंता जता रहे हैं और सरकार को उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने का विकल्प देना चाहिए।
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में आदित्य ठाकरे ने कहा कि अधिकांश परिवारों के लिए दोपहिया या चारपहिया वाहन खरीदना कोई विलासिता नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, बचत और कई मामलों में लंबी अवधि की ईएमआई का परिणाम होता है। ऐसे में लोग अपने वाहन से वही प्रदर्शन और माइलेज की अपेक्षा करते हैं, जिसका वादा निर्माता कंपनियां करती हैं।
आदित्य ठाकरे ने पत्र में कहा कि कई नागरिकों का दावा है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने से उनके वाहनों का माइलेज कम हो रहा है और प्रदर्शन भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सड़कों पर चल रहे बड़ी संख्या में वाहन मूल रूप से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किए गए थे। ऐसे में वाहन मालिकों को बिना विकल्प दिए इस नीति का असर झेलना पड़ रहा है।
यूबीटी नेता ने एथेनॉल उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गन्ना देश की सबसे अधिक पानी खपत करने वाली फसलों में से एक है। ऐसे समय में जब देश के कई हिस्से जल संकट का सामना कर रहे हैं, लोग इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह सबसे टिकाऊ और उपयुक्त तरीका है।
उन्होंने यह भी कहा कि आम लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि इस नीति से कुछ कंपनियों और उद्योग समूहों को अधिक लाभ मिल रहा है। भले ही यह धारणा सही हो या नहीं, लेकिन इन चिंताओं का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाना चाहिए।
आदित्य ठाकरे ने अपने पत्र में कहा कि दुनिया के कई देशों में उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने की स्वतंत्रता है। जिन वाहनों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग संभव है, वे उसका इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि अन्य वाहन मालिक सामान्य पेट्रोल का विकल्प चुन सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि भारत में भी उपभोक्ताओं के लिए दोनों विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने कहा कि ऐसा करने से उपभोक्ताओं की पसंद का अधिकार सुरक्षित रहेगा, मौजूदा वाहन मालिकों को होने वाली असुविधा कम होगी और सरकार की नीतियों के प्रति लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री देश के मेहनतकश मध्यम वर्ग, युवाओं और करोड़ों वाहन मालिकों के हित में इस मांग पर विचार करेंगे।
–आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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