4 साल में 111 सांसदों और विधायकों ने बदला पाला, एडीआर रिपोर्ट में नागालैंड और बंगाल सबसे आगे

Summary :

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ा राजनीतिक फेरबदल नागालैंड में देखने को मिला, जहां सबसे ज्यादा 32 जनप्रतिनिधियों ने पाला बदला। इसके ठीक बाद पश्चिम बंगाल 20 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच द्वारा सांसदों और विधायकों के हलफनामों के विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।

Fresh ADR Report on Political Defection

Fresh ADR Report on Political Defection : देश की राजनीति में दलबदल एक बड़े राजनीतिक विवाद के तौर पर सामने आता है। जब जब कोई नेता किसी दल में जाता है तो पूरे देश में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ जाती हैं। सवाल यह कि पिछले कुछ सालों में कितने चुने प्रतिनिधियों ने अपना दल बदला है। आंकड़े हैरान कर देंगे।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की ताजा रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि पिछले चार सालों में यानी 2022 से 2026 के दौरान 111 सांसदों और विधायकों ने अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर दूसरे दल का दामन थामा है।

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ा राजनीतिक फेरबदल नागालैंड में देखने को मिला, जहां सबसे ज्यादा 32 जनप्रतिनिधियों ने पाला बदला। इसके ठीक बाद पश्चिम बंगाल 20 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच द्वारा सांसदों और विधायकों के हलफनामों के विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।

कहां कहां रहा असर

आंकड़ों के मुताबिक, दल बदलने वाले 111 जनप्रतिनिधियों में 26 लोकसभा सदस्य, 7 राज्यसभा सदस्य और 78 विभिन्न राज्यों के विधायक शामिल हैं।

राज्यों के लिहाज से देखें तो तेलंगाना से 9, गोवा से 8, पंजाब से 2, मेघालय से 6, मणिपुर से 5, अरुणाचल और गुजरात से 4-4, हिमाचल व राजस्थान से 2-2 विधायक दूसरी पार्टियों में गए। वहीं कर्नाटक, मध्य प्रदेश, सिक्किम और उत्तर प्रदेश से 1-1 विधायक ने पाला बदला। दिल्ली से राज्यसभा के 1 और महाराष्ट्र से लोकसभा के 6 सदस्यों ने भी दल-बदल किया।

किस पार्टी को नफा-नुक्सान

अगर छोड़ने वाले नेताओं की बात करें तो सबसे ज्यादा झटका NDPP को लगा, जिसके 25 प्रतिनिधियों ने पार्टी छोड़ी। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस के 20, कांग्रेस के 19, BRS के 9, आम आदमी पार्टी और NCP के 7-7, शिवसेना (UBT) के 6, JDU के 5 और NPP के 4 नेताओं ने पार्टी बदली।

एडीआर के अनुसार, दल बदलने वाले 58% यानी 64 नेता एनडीपीपी, टीएमसी और कांग्रेस से ही थे।

दूसरी तरफ, दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को अपनाने में NPF सबसे आगे रही, जहां 32 प्रतिनिधि शामिल हुए। बीजेपी में 29, एनसीपीआई में 20, कांग्रेस में 9, शिवसेना में 8, एनपीपी में 6 और पीपीए में 4 नेता शामिल हुए। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि विधायकों के इस तरह पाला बदलने की वजह से ही कई राज्यों में सरकारें अचानक गिर गईं।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।