मैसूर, 5 नवंबर (आईएएनएस)। मैसूर के नौसेना वेटरन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गजानन भट ने अग्निवीर योजना में दो साल के विस्तार को युवाओं के लिए राष्ट्र सेवा का अच्छा अवसर बताया लेकिन साथ ही सेवानिवृत्ति के बाद अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस में भर्ती, आरक्षण और वरिष्ठता को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। वहीं, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी ने अग्निवीरों के भविष्य को लेकर बनी चिंता के बीच इसे बहुत अच्छा फैसला बताया।
मैसूर के नौसेना वेटरन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गजानन भट ने कहा, “यह युवाओं के लिए वास्तव में अच्छा है। पहले चार साल की योजना थी लेकिन अब इसे बदलकर दो साल का विस्तार दिया गया है। इसलिए जो लोग रक्षा बलों में रहना चाहते हैं, उनके लिए राष्ट्र की सेवा करने का यह बहुत अच्छा अवसर है।”
उन्होंने कहा कि इसमें कुछ समस्याएं भी हैं। सेवानिवृत्ति के बाद वे सभी अर्धसैनिक बलों में शामिल होने वाले हैं। महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही पुलिस विभाग में कुछ लोगों का चयन किया है। इन दो वर्षों में अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस और अन्य अनुशासित बलों जैसी संबंधित सेवाओं में भर्ती रोक दी जाएगी। इससे उनके आरक्षण पर असर पड़ेगा। जब उन्हें नौकरी ही नहीं मिलेगी, तो आरक्षण का क्या लाभ होगा।
गजानन भट ने कहा कि ऐसा भी सुनने में आया है कि चयनित विभागों में उन्हें सबसे कनिष्ठ माना जा रहा है। वरिष्ठता का क्या होगा? अगर योजना को और बढ़ाया जाए और वास्तविक स्थिति को अधिक स्पष्ट किया जाए, तो इससे लोगों को अधिक लाभ होगा। यह भरोसे की बात है। चार साल हों या शायद छह साल, सेवानिवृत्ति के बाद यह उन्हें राष्ट्र की सेवा करने में मदद करेगा। रूस समेत कई देशों में युवाओं के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है। इसलिए समाज पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि अभ्यास से ही व्यक्ति निपुण बनता है। सरकार भी यही कर रही है। कभी यह नुकसानदेह हो सकता है, कुछ नकारात्मक पहलू भी हो सकते हैं और कुछ सकारात्मक भी। वे प्रयोग कर रहे हैं, जैसे नोटबंदी थी और अन्य संबंधित पहलें भी थीं। यह राष्ट्र की दिशा में एक अच्छा कदम है।
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी ने कहा, “यह बहुत अच्छा फैसला है। जब 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की गई थी, तो इसका उद्देश्य सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए धन बचाना था। योजना के तहत अग्निवीर चार साल तक सेवा देंगे, जिसके बाद 25 प्रतिशत को सेना, नौसेना और वायु सेना में बरकरार रखा जाएगा जबकि शेष 75 प्रतिशत बलों को छोड़ देंगे। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और निजी उद्यमों से उन्हें समायोजित करने का अनुरोध किया था और 11.71 लाख रुपये के सेवानिवृत्ति पैकेज की पेशकश की थी। हालांकि, इन युवा सैनिकों के भविष्य को लेकर चिंता बनी रही, जो सेवा पूरी करने के बाद लगभग 23-24 साल के होंगे। उन्हें सैन्य प्रशिक्षण भी मिला होता है।”
–आईएएनएस
केके/पीएम
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