बासमती चावल अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा, एसकेयूएएसटी जम्मू के कुलपति ने चकरोई केंद्र का किया दौरा

Summary :

जम्मू, 12 सितंबर (आईएएनएस)। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एसकेयूएएसटी) जम्मू के कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी ने बासमती चावल अनुसंधान केंद्र, चकरोई का दौरा कर वहां विकसित अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं की समीक्षा की। यह केंद्र जम्मू क्षेत्र में बासमती चावल पर शोध को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है। दौरे के दौरान कुलपति ने केंद्र में स्थापित विभिन्न शोध सुविधाओं का विस्तृत निरीक्षण किया और वैज्ञानिकों तथा तकनीकी कर्मचारियों के साथ संवाद किया। उन्हें केंद्र में उपलब्ध आधुनिक अनुसंधान उपकरणों और प्रयोगशालाओं की जानकारी दी गई। साथ ही बासमती चावल…

जम्मू, 12 सितंबर (आईएएनएस)। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एसकेयूएएसटी) जम्मू के कुलपति प्रो. बीएन त्रिपाठी ने बासमती चावल अनुसंधान केंद्र, चकरोई का दौरा कर वहां विकसित अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं की समीक्षा की। यह केंद्र जम्मू क्षेत्र में बासमती चावल पर शोध को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रहा है।

दौरे के दौरान कुलपति ने केंद्र में स्थापित विभिन्न शोध सुविधाओं का विस्तृत निरीक्षण किया और वैज्ञानिकों तथा तकनीकी कर्मचारियों के साथ संवाद किया। उन्हें केंद्र में उपलब्ध आधुनिक अनुसंधान उपकरणों और प्रयोगशालाओं की जानकारी दी गई। साथ ही बासमती चावल की उन्नत किस्मों के विकास, जर्मप्लाज्म संरक्षण, गुणवत्ता सुधार और वैश्विक बाजार में बासमती की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने से जुड़े चल रहे अनुसंधान कार्यक्रमों से भी अवगत कराया गया।

प्रो. त्रिपाठी ने केंद्र के अनुसंधान खेतों और प्रायोगिक प्लॉटों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बासमती धान के बीज उत्पादन कार्यक्रम और विभिन्न फील्ड ट्रायल्स की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नई बासमती किस्मों के प्रदर्शन में विशेष रुचि दिखाई।

कुलपति ने कहा कि बासमती चावल देश की एक महत्वपूर्ण और प्रीमियम कृषि उपज है। उन्होंने पारंपरिक बासमती जर्मप्लाज्म की विरासत, पहचान और आनुवांशिक विविधता को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने वैज्ञानिक तरीकों से इसके निरंतर सुधार की भी आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि अनुसंधान गतिविधियों का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने और उनकी आजीविका को मजबूत बनाने में मदद करना होना चाहिए। इसके साथ ही जम्मू की बासमती की विशिष्ट पहचान और गुणवत्ता को भी बनाए रखना जरूरी है।

प्रो. त्रिपाठी ने वैज्ञानिकों को बहु-विषयक और किसानों की जरूरतों पर आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया, ताकि केंद्र की वैज्ञानिक क्षमता को मजबूत किया जा सके। कुलपति ने केंद्र के विकास और चल रही शोध गतिविधियों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बासमती राइस रिसर्च सेंटर, चकरोई भविष्य में बासमती चावल अनुसंधान, संरक्षण और उन्नत किस्मों के विकास के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता रखता है।

इस अवसर पर डॉ. एस.के. गुप्ता, निदेशक अनुसंधान, तथा डॉ. आर.के. सलगोत्रा, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एवं निदेशक शिक्षा, एसकेयूएएसटी-जम्मू भी उनके साथ मौजूद रहे।

–आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.