नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले इलेक्शन कमीशन ने बुधवार को जलपाईगुड़ी, मालदा, बर्दवान और मेदिनीपुर डिवीजन के डिवीजनल हेडक्वार्टर में सभी 294 रिटर्निंग ऑफिसर्स (आरओ) के लिए एक ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव की घोषणा करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में चुनाव बिना हिंसा, बिना डर और बिना लालच के कराए जाएंगे ताकि हर वोटर बिना किसी डर या पक्षपात के वोट दे सके।
इसी के मद्देनजर नेशनल लेवल के मास्टर ट्रेनर्स ने ईसीआई के सीनियर अधिकारियों के साथ मिलकर चुनाव कराने के सभी फेज पर बात की, जिसमें नॉमिनेशन प्रोसेस, नॉमिनेशन की स्क्रूटनी, क्वालिफिकेशन और डिसक्वालिफिकेशन, मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (एमसीसी), नामांकन वापस लेना, सिंबल अलॉटमेंट, पोल-डे अरेंजमेंट और काउंटिंग शामिल हैं।
ट्रेनिंग के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि रिटर्निंग अधिकारी (आरओ) यह पक्का करें कि प्रीसाइडिंग ऑफिसर (पीओ) फॉर्म 17सी की साइन की हुई कॉपी, जिसमें वोटों का हिसाब होता है, पोल खत्म होने पर मौजूद सभी पोलिंग एजेंटों के साथ शेयर करें।
ट्रेनिंग प्रोग्राम में, आरओ को ईसीआईएनईटी के प्रीसाइडिंग ऑफिसर मॉड्यूल के बारे में भी बताया गया। इस मॉड्यूल के जरिए, प्रीसाइडिंग ऑफिसर हर दो घंटे में और पोल खत्म होने पर ईसीआईएनईटी ऐप पर वोटर टर्नआउट डेटा अपलोड करेंगे। डेटा आरओ लेवल पर ऑटोमैटिकली इकट्ठा किया जाएगा ताकि रियल टाइम में वोटिंग के लगभग ट्रेंड मिल सकें।
यह ट्रेनिंग प्रोग्राम पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर की ओर से आयोजित किए जा रहे ट्रेनिंग सेशन के अलावा है। चुनाव आयोग, रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951 के सेक्शन 21 और सेक्शन 24 के अनुसार हर चुनाव क्षेत्र के लिए रिटर्निंग अधिकारियों को डेजिग्नेट या नॉमिनेट करता है ताकि यह पक्का हो सके कि चुनाव कानून और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार हों। रिटर्निंग अधिकारी तय समय के दौरान आयोग के कंट्रोल, सुपरिंटेंडेंस, और डिसिप्लिन के अधीन होते हैं।
–आईएएनएस
एसडी/एबीएम
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