उत्तराखंड, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड अपनी पवित्र नदियों, ऊंचे पर्वत और प्राचीन मंदिरों की वजह से जाना जाता है। इन्हीं में से एक है बागेश्वर जिले का प्रसिद्ध बैजनाथ मंदिर। यह मंदिर अपनी सुंदर बनावट, गहरी धार्मिक आस्था और रहस्य भरे इतिहास के लिए जाना जाता है।
यह मंदिर उत्तराखंड की शिव परंपरा का जीवंत प्रतीक माना जाता है। बागेश्वर आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर की शांति और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैजनाथ मंदिर के महत्व पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का खास वीडियो पोस्ट किया। इसके साथ उन्होंने लिखा, “बागेश्वर जनपद की पावन धरती पर स्थित बैजनाथ मंदिर भगवान शिव की दिव्यता और आस्था का जीवंत प्रतीक है। कत्यूरी शासकों की अद्भुत स्थापत्य कला से निर्मित यह धाम न केवल श्रद्धा का केंद्र है बल्कि अपनी भव्य शिल्पकला के लिए भी विशिष्ट पहचान रखता है। अपने बागेश्वर आगमन पर बैजनाथ धाम के दर्शन कर इस अलौकिक अनुभूति का हिस्सा अवश्य बनें।”
बैजनाथ मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं है। यह पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। आसपास की प्राकृतिक सुंदरता, नदी का बहता पानी और पुरानी इमारतें मिलकर एक अनोखा माहौल बनाती हैं। यहां आने वाले लोग मंदिर दर्शन के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और खान-पान का भी लुत्फ उठाते हैं।
इन मंदिरों का निर्माण कत्यूरी राजाओं द्वारा 7वीं से 11वीं शताब्दी के बीच किया गया था और यह प्राचीन कार्तिकेयपुर (बैजनाथ) की राजधानी थी। कत्यूरी शासक कला, संस्कृति और धर्म के बड़े संरक्षक माने जाते थे। उन्हीं की देन है यह भव्य बैजनाथ मंदिर समूह, जो कत्यूर घाटी में गोमती नदी के तट पर स्थित है।
यह मंदिर नागर शैली में निर्मित पत्थरों का एक समूह है, जो अपनी नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर को लेकर मान्यता काफी रोचक है।
कहा जाता है कि कत्यूरी राजाओं को भगवान शिव ने सपने में दर्शन देकर आदेश दिया था कि वे एक ही रात में मंदिर का निर्माण करें। स्वप्नादेश को पाकर राजा ने तत्काल कारीगरों को एकत्र किया और रातभर में पत्थरों से मंदिर का निर्माण करवाया था। मान्यता है कि उसी रात यहां 18 मंदिरों का समूह तैयार हो गया था।
–आईएएनएस
एनएस/पीएम
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