नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘इंटीग्रेटेड ट्रेनिंग फॉर प्राइमरी हेल्थकेयर टीम्स’ की शुरुआत की है, जो सीधे तौर पर गांव-गांव और शहरों के आखिरी छोर तक काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को और ज्यादा सक्षम बनाने से जुड़ा है। यह घोषणा हाल ही में हुए 10वें राष्ट्रीय समिट ‘नवाचार और समावेशिता: भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम प्रथाएं’ के दौरान की गई।
अब तक होता यह था कि अलग-अलग स्वास्थ्य योजनाओं के लिए अलग-अलग ट्रेनिंग दी जाती थी, जिससे कई बार प्रक्रिया बिखरी हुई लगती थी। अब इस नई व्यवस्था में सभी ट्रेनिंग को एक ही ढांचे में जोड़ दिया गया है। यानी अब प्राथमिक स्वास्थ्य टीमों को एक ही जगह से, एक ही सिस्टम के तहत पूरी और व्यवस्थित ट्रेनिंग मिलेगी। इससे उनका काम और ज्यादा आसान और प्रभावी हो जाएगा।
भारत में पिछले कुछ सालों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर काफी ध्यान दिया गया है। खासकर ‘आयुष्मान भारत योजना’ के तहत देशभर में ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ बनाए गए हैं, जिनका मकसद लोगों को उनके घर के पास ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देना है। इसका फायदा यह हुआ है कि अब लोगों को छोटे-मोटे इलाज के लिए दूर अस्पतालों तक नहीं जाना पड़ता। इन आरोग्य मंदिरों के साथ-साथ गांवों में कई सामुदायिक समूह भी काम कर रहे हैं, जैसे कि जन आरोग्य समितियां, महिला आरोग्य समितियां और गांव की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियां। ये सभी मिलकर स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में मदद कर रहे हैं।
सरकार का मानना है कि किसी भी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था तभी मजबूत हो सकती है जब उसकी जड़ यानी प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत हो। यही वह स्तर है जहां सबसे पहले मरीज पहुंचता है। अगर यहीं पर सही इलाज, सही सलाह और सही समय पर मदद मिल जाए, तो बड़े अस्पतालों पर बोझ भी कम हो जाता है।
इस पहल में डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जैसे कि आई गॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के जरिए अब ये स्वास्थ्य कर्मी ऑनलाइन ट्रेनिंग ले सकेंगे। इससे वे समय-समय पर नई जानकारी सीखते रहेंगे और अपने काम को और बेहतर बना सकेंगे।
सरकार का लक्ष्य सिर्फ इलाज देना नहीं है बल्कि लोगों को बीमार होने से पहले ही जागरूक करना भी है। इसलिए इस नई व्यवस्था में रोकथाम, समय पर पहचान और सही इलाज तीनों पर जोर दिया गया है।
यह पहल दो महत्वपूर्ण तरीकों से अनूठी है। पहला, यह समुदाय-आधारित स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों की क्षमता को बढ़ाती है, ताकि वे ऐसी देखभाल प्रदान कर सकें जो सहानुभूतिपूर्ण, संवेदनशील और उच्च गुणवत्ता वाली हो। दूसरा, यह उन महिलाओं को सशक्त बनाती है जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं इस कार्यबल में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं ही हैं, जिनमें आशा, एएनएम और सीएचओ शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी लगातार ‘नारी शक्ति’ के महत्व पर जोर दिया है और यह पहल उनके उसी विजन का एक सशक्त उदाहरण है।
यह नई ट्रेनिंग व्यवस्था सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक बड़ा बदलाव है। इससे स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ेगी, मरीजों का भरोसा मजबूत होगा और पूरा सिस्टम ज्यादा संगठित और प्रभावी बनेगा। खास बात यह है कि इससे महिलाओं की भूमिका और भी मजबूत होगी, क्योंकि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में उनकी भागीदारी बहुत ज्यादा है।
–आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
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